तेहरान। पश्चिम एशिया (Middle East) में हालात अब पूरी तरह से बेकाबू और संवेदनशील हो चुके हैं। शांति की तमाम अंतरराष्ट्रीय कोशिशें मरुस्थल की रेत की तरह बिखरती नजर आ रही हैं। एक तरफ जहां इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हुआ बहुचर्चित सीजफायर सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को लेकर बेहद कड़े और खतरनाक संकेत दे दिए हैं। इस महासंकट के बीच क्षेत्र में शांति बहाली की आखिरी कोशिश के तहत पाकिस्तानी गृहमंत्री मोहसिन नकवी अचानक ईरान पहुंचे हैं, ताकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ रहे परमाणु और सैन्य तनाव को कम किया जा सके। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि ईरान के भीतर युद्ध की तैयारियां विश्व युद्ध के स्तर पर शुरू हो चुकी हैं। ईरानी मीडिया में आम नागरिकों को बकायदा एके-47 (AK-47) राइफल चलाने और सैन्य मोर्चे पर डटने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसने दुनिया भर की चिंताओं को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
कागजों में सीजफायर, जमीन पर बारूद: इजरायल ने लेबनान में 100 ठिकानों को बमों से उड़ाया
अमेरिकी मध्यस्थता के बाद इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर (युद्धविराम) को 45 दिनों के लिए बढ़ाने पर सहमति तो बनी थी, लेकिन हकीकत में दोनों ओर से हो रही भीषण बमबारी ने शांति की उम्मीदों को पूरी तरह धूमिल कर दिया है। इजरायली सेना (IDF) ने आधिकारिक दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान के टायर इलाके सहित हिजबुल्लाह के करीब 100 से अधिक ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले किए हैं। इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई हिजबुल्लाह द्वारा किए गए हालिया ड्रोन, मोर्टार और विस्फोटक हमलों के जवाब में की गई है। इन हमलों में हिजबुल्लाह के हथियारों के गोदाम, आतंकी ढांचे और ऑब्जर्वेशन पोस्ट पूरी तरह तबाह कर दिए गए हैं। दूसरी ओर, हिजबुल्लाह भी पीछे हटने को तैयार नहीं है और वह लगातार इजरायली सैनिकों पर किए जा रहे ड्रोन हमलों के वीडियो जारी कर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, इस खूनी संघर्ष में अब तक 2,969 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 9,000 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
यरुशलम के पास रक्षा कंपनी में जोरदार धमाका, खाड़ी देशों को ईरान की आखिरी चेतावनी
तनाव की यह भयावह आंच अब नए-नए इलाकों को अपनी चपेट में ले रही है। यरुशलम के पास स्थित बीत शेमेश इलाके में एक इजरायली रक्षा कंपनी के टेस्टिंग ग्राउंड पर अचानक हुए एक बेहद जोरदार धमाके ने पूरे इजरायल में हड़कंप मचा दिया। हालांकि, कंपनी ने बाद में सफाई देते हुए इसे एक पूर्व-निर्धारित रूटीन टेस्ट बताया, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के हुए इस धमाके ने युद्ध के साए में जी रहे स्थानीय लोगों में भारी दहशत पैदा कर दी है। इसी बीच, ईरान के सुप्रीम लीडर आयतौल्लाह खामेनेई के शीर्ष सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों को खुली और आखिरी चेतावनी दे डाली है। मोखबर ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि इन देशों ने अपनी जमीन ईरान के दुश्मनों (अमेरिका और इजरायल) के मिलिट्री ऑपरेशंस के लिए खोल रखी है, जिसे ईरान अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा और इसका अंजाम भुगतने के लिए खाड़ी देश तैयार रहें।
होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका VS ईरान: 78 जहाजों को खदेड़ा, लागू हुआ नया ट्रैफिक सिस्टम
इस पूरे विवाद का सबसे खतरनाक मोर्चा वैश्विक व्यापार के लाइफलाइन कहे जाने वाले ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में खुल गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की घेरेबंदी को बेहद कड़ा करते हुए अब तक ईरान से जुड़े या उसकी मदद करने वाले 78 जहाजों को समुद्र से खदेड़कर वापस लौटा दिया है। अमेरिका की इस दादागिरी पर पलटवार करते हुए ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में एक नया ‘ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम’ लागू करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस नए ईरानी कानून के तहत होर्मुज स्ट्रेट से अब केवल उन्हीं अंतरराष्ट्रीय जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जाएगी जो ईरान को पूरा सहयोग करेंगे। इसके साथ ही, अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ से जुड़े किसी भी जहाज के इस समुद्री मार्ग में प्रवेश पर ईरान ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। वैश्विक व्यापार, कच्चे तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अमेरिका और ईरान का यह सीधा टकराव आने वाले दिनों में किसी विनाशकारी महायुद्ध में तब्दील हो सकता है।
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