Sunday , 5 July 2026

सड़क पर नमाज बर्दाश्त नहीं, प्यार से मानें तो ठीक वरना दूसरा तरीका भी जानते हैं: सीएम योगी की सीधी चेतावनी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक अनुशासन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। एक हालिया कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़े जाने को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है, जिसने अब राज्य से लेकर देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज पढ़ने की कतई इजाजत नहीं दी जा सकती और यह नियम बिना किसी भेदभाव के सभी पर समान रूप से लागू होता है।

‘सड़कें चलने के लिए हैं, चौराहा जाम करने का अधिकार किसी को नहीं’

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक व्यवस्था को सर्वोपरि बताते हुए कहा, “सड़कें आम जनता के आने-जाने और यातायात के सुचारू संचालन के लिए होती हैं। देश के किसी भी नागरिक या व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह मुख्य चौराहे या सड़क पर आकर बैठ जाए और लोगों के आवागमन को पूरी तरह बाधित कर दे।” उन्होंने साफ किया कि अगर किसी को भी अपनी धार्मिक गतिविधियां पूरी करनी हैं, तो उसके लिए पहले से निर्धारित और सुरक्षित स्थल ही सही जगह हैं।

शिफ्ट में नमाज पढ़ने का दिया विकल्प, बोले- हम विरोधी नहीं

धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के बीच संतुलन की बात करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक व्यावहारिक सुझाव भी सामने रखा। उन्होंने कहा, “हमें किसी की नमाज से या किसी की धार्मिक आस्था से कोई विरोध नहीं है। अगर मस्जिदों या तय स्थानों पर जगह कम पड़ती है, तो लोग शिफ्ट में (बारी-बारी से) नमाज अदा कर सकते हैं। लेकिन इसके नाम पर सार्वजनिक सड़कों को पूरी तरह ब्लॉक कर देना कहीं से भी जायज नहीं है। हम किसी भी कीमत पर सार्वजनिक व्यवस्था और शांति को बिगड़ने की अनुमति नहीं देंगे।”

पहले संवाद से समाधान, बात न मानने पर होगी सख्त कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने कानून के राज का हवाला देते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को भी कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में कानून का शासन सबके लिए एक समान है और कोई भी व्यक्ति खुद को नियमों से ऊपर समझने की भूल न करे। सीएम योगी ने आगे कहा, “हमारी सरकार की नीति साफ है। हम सबसे पहले संवाद (बातचीत) के जरिए किसी भी समस्या का शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास करते हैं। लेकिन अगर इसके बावजूद भी नियमों की अनदेखी की जाती है और कानून हाथ में लिया जाता है, तो प्रशासन बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।”

आम जनता की सुरक्षा और सुविधा सबसे पहले

इस फैसले के पीछे का मुख्य उद्देश्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की यह पहली जिम्मेदारी है कि वह राज्य के हर एक नागरिक की सुविधा, सुरक्षा और सुकून को सुनिश्चित करे। उन्होंने भावुक और तार्किक अंदाज में कहा, “सड़क जाम होने से एक गंभीर बीमार व्यक्ति, ड्यूटी पर जा रहा कर्मचारी, अपनी दुकान खोलने जा रहा व्यापारी या कोई भी आम नागरिक परेशानी में फंस सकता है। किसी भी व्यक्ति की वजह से इन आम लोगों को आने-जाने में रत्ती भर भी तकलीफ नहीं होनी चाहिए।”

सीएम योगी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आयोजनों और गतिविधियों को लेकर लगातार चर्चाएं और विवाद हो रहे हैं। जहां एक तरफ सरकार के समर्थक इसे कानून-व्यवस्था और जनता के हित में उठाया गया एक ऐतिहासिक और जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आलोचक इसे एक बेहद संवेदनशील मुद्दा मानकर इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। बहरहाल, इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थलों को लेकर नियमों का पालन और कड़ाई से होने की उम्मीद है।

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