बीजिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में दो दिवसीय महाशिखर सम्मेलन का आगाज हो चुका है। बैठक की शुरुआत में ट्रंप का अंदाज बेहद गर्मजोशी भरा रहा। उन्होंने शी जिनपिंग की तारीफों के पुल बांधते हुए उन्हें एक ‘महान नेता’ और ‘बेहतरीन दोस्त’ करार दिया। हालांकि, इस दोस्ती और कूटनीतिक मुस्कुराहटों के पीछे एक गहरी अविश्वास की खाई भी नजर आ रही है, जिसे ट्रंप प्रशासन का ‘डिजिटल लॉकडाउन’ साफ बयां कर रहा है।
व्यापार से लेकर हथियारों तक, मेज पर होंगे ये बड़े मुद्दे
साल 2017 के बाद यह पहला मौका है जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति अपने सबसे बड़े रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी देश चीन की सरजमीं पर कदम रख रहा है। इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच नाजुक व्यापारिक समझौते, ईरान संकट और ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री जैसे ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होनी है। मध्य-पूर्व के मोर्चे पर उलझने के कारण ट्रंप की घरेलू अप्रूवल रेटिंग में जो गिरावट आई है, उसे देखते हुए इस दौरे को उनकी छवि सुधारने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
चीन में ‘डिजिटल लॉकडाउन’: जासूसी के खौफ में अमेरिकी अधिकारी
इस हाई-प्रोफाइल दौरे की सबसे चौंकाने वाली बात अमेरिकी डेलिगेशन का ‘डिजिटल व्यवहार’ है। सूत्रों के मुताबिक, बीजिंग पहुंचने से पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप की सुरक्षा टीम और अधिकारियों ने खुद पर ‘डिजिटल लॉकडाउन’ लागू कर दिया है। अमेरिकी अधिकारी अपने नियमित मोबाइल फोन और लैपटॉप वॉशिंगटन में ही छोड़ आए हैं। इसकी वजह है चीन का आक्रामक साइबर माहौल, जिसे दुनिया में सबसे खतरनाक माना जाता है। जासूसी और डेटा चोरी के खतरे को टालने के लिए पूरी टीम ‘क्लीन डिवाइस’ और अस्थायी लैपटॉप का इस्तेमाल कर रही है।
होटल का वाई-फाई और मैसेजिंग ऐप भी रडार पर
अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि चीन में होटल के वाई-फाई से लेकर क्लाउड एक्सेस तक, कुछ भी सुरक्षित नहीं है। यही कारण है कि जो काम एक साधारण एन्क्रिप्टेड मैसेज से हो सकता था, उसके लिए अब अधिकारी आमने-सामने की मुलाकातों या बेहद नियंत्रित सरकारी चैनलों पर निर्भर हैं। सुरक्षा इतनी सख्त है कि कई अधिकारियों का डिजिटल फुटप्रिंट पूरी तरह गायब हो गया है। अमेरिकी सरकार के भीतर यह धारणा घर कर चुकी है कि चीन में इस्तेमाल किया गया कोई भी नेटवर्क संभावित रूप से ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ (हैक) हो सकता है।
‘जूस जैकिंग’ का खतरा: फोन चार्ज करने पर भी पाबंदी
सावधानी का आलम यह है कि अधिकारियों को सार्वजनिक या अनजान USB पोर्ट से फोन चार्ज न करने की सख्त हिदायत दी गई है। साइबर एक्सपर्ट्स इसे ‘जूस जैकिंग’ कहते हैं, जिसमें चार्जिंग पोर्ट के जरिए डिवाइस में मालवेयर डालकर डेटा चोरी किया जा सकता है। ट्रंप के साथ आए प्रतिनिधिमंडल में Apple जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि चीन में उनके हर कदम और हर क्लिक पर ड्रैगन की नजर हो सकती है।
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