Monday , 1 June 2026

कानपुर किडनी कांड: पुलिस के ‘ड्रोन’ फेल, 25 हजारी ‘मुन्ना भाई’ डॉक्टर ने कचहरी में खाकी को ऐसे दिया चकमा!

कानपुर। हाईटेक सर्विलांस, चप्पे-चप्पे पर पहरा और ड्रोन से गिरफ्तारी के बड़े-बड़े दावे… कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की ये सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं। किडनी रैकेट के सबसे शातिर किरदार, 25 हजार के इनामी ‘डॉक्टर’ मुदस्सर अली सिद्दीकी ने पुलिस की घेराबंदी को धता बताते हुए गुरुवार को एसीजेएम-6 की अदालत में सरेंडर कर दिया। जब पुलिस चार राज्यों की खाक छान रही थी, तब यह फर्जी डॉक्टर सिर पर टोपी और चेहरे पर मास्क लगाकर बड़ी आसानी से कचहरी पहुंच गया और पुलिस उसे पहचान तक नहीं पाई।

चार राज्यों की पुलिस को छकाया, मास्क लगाकर जेल पहुंचा ‘डॉक्टर’

किडनी रैकेट का खुलासा होने के बाद से ही मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। कानपुर पुलिस की टीमें यूपी समेत उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही थीं। पुलिस का दावा था कि अली के करीबियों पर शिकंजा कस दिया गया है और वह जल्द ही सलाखों के पीछे होगा। लेकिन गुरुवार को जो हुआ, उसने खाकी की तफ्तीश पर सवालिया निशान लगा दिए। अली के वकील मोहित द्विवेदी के मुताबिक, विवेचक ने 16 मई को कोर्ट को बताया था कि अली वांछित है। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से उसने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

हैरान कर देने वाला सच: ओटी टेक्निशियन बना ‘किडनी सर्जन’

पुलिस की जांच में जो खुलासा हुआ है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। जिसे दुनिया ‘डॉक्टर अली’ समझ रही थी, वह असल में दिल्ली के द्वारका का रहने वाला एक ओटी टेक्निशियन (OT Technician) है। मुदस्सर अली सिद्दीकी ने नोएडा और मेरठ के अस्पतालों में नौकरी करते हुए ऑपरेशन की ट्रेनिंग ली और फिर खुद को ‘किडनी ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट’ घोषित कर दिया। वह असली डॉक्टरों की तरह डोनर और रिसीवर के शरीर पर सर्जिकल कट लगाता था और किडनी शिफ्ट करने जैसा जटिल काम करता था। इस दौरान उसके साथ एक जूनियर डॉक्टर और दो सहायक भी रहते थे।

12वीं पास मास्टरमाइंड और फर्जी डॉक्टरों की फौज

जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह में शामिल ज्यादातर ‘डॉक्टर’ फर्जी हैं। गिरोह का सरगना रोहित तिवारी, जो खुद को एनेस्थीसिया विशेषज्ञ बताता था, वह महज 12वीं पास एक वार्ड-बॉय निकला। इसी तरह डॉ. वैभव मुद्गल, डॉ. अमित चौधरी और डॉ. अफजल के पास भी डॉक्टरी की कोई वैध डिग्री नहीं है। ये लोग केवल अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटर (OT) किराए पर लेते थे और वहां अवैध तरीके से मासूम लोगों की किडनी निकाल लेते थे। गाजियाबाद से पकड़े गए राजेश कुमार ने खुलासा किया है कि अकेले इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच कानपुर में पांच अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए गए थे।

गर्लफ्रेंड की एक गलती से फंसा मास्टरमाइंड रोहित

किडनी रैकेट की कड़ियां तब जुड़ना शुरू हुईं जब मास्टरमाइंड रोहित तिवारी पुलिस के हत्थे चढ़ा। रोहित अपनी गर्लफ्रेंड और दिल्ली के एक नर्सिंग होम संचालक से लगातार वॉट्सऐप कॉलिंग के जरिए संपर्क में था। पुलिस ने इसी सुराग का पीछा किया और पहले उसकी गर्लफ्रेंड तक पहुंची। गर्लफ्रेंड से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने रोहित को तब दबोचा जब वह कल्याणपुर के इंदिरानगर में अपने वकील से मिलने जा रहा था। रोहित की गिरफ्तारी के बाद ही अली दहशत में आ गया था और उसने पुलिस मुठभेड़ के डर से कोर्ट में सरेंडर करना ही बेहतर समझा।

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