Tuesday , 22 September 2026

सोनौली बॉर्डर पर पकड़े गए ब्रिटिश नागरिक जॉर्डन ब्राउन के फोन से मिले 113 अश्लील वीडियो, बच्चों के शोषण से जुड़े गंभीर सुराग; तिहाड़ जेल भेजा गया

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर थाईलैंड पुलिस की कस्टडी से फरार होकर करीब नौ महीने तक देश के विभिन्न हिस्सों में फरारी काटने वाले ब्रिटिश नागरिक जॉर्डन ब्राउन के मामले में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। फॉरेंसिक जांच में आरोपी के क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन से बच्चों से जुड़े 113 आपत्तिजनक व अश्लील वीडियो बरामद हुए हैं। नेपाल भागने की फिराक में भारत-नेपाल सीमा (सोनौली बॉर्डर) पर दबोचे जाने के दौरान आरोपी ने साक्ष्य नष्ट करने की नीयत से अपने दोनों मोबाइल तोड़ दिए थे, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों ने उसका बड़ा हिस्सा रिकवर कर लिया है।

टीसीएल फोन से 80 फीसदी डेटा रिकवर, कैमरे के फोल्डर में मिलीं क्लिप्स

फॉरेंसिक लैब की टीम ने आरोपी के टीसीएल (TCL) स्मार्टफोन से करीब 80 प्रतिशत डेटा सफलतापूर्वक निकाल लिया है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि बच्चों के अश्लील वीडियो फोन के प्राथमिक ‘कैमरा फोल्डर’ में सुरक्षित पाए गए हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियां प्रबल आशंका जता रही हैं कि ये सभी 113 वीडियो खुद आरोपी के मोबाइल से ही शूट किए गए थे। बरामद वीडियो क्लिप्स अमूमन तीन से पांच मिनट की अवधि की हैं। पुलिस ने इन सभी तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट को अपनी चार्जशीट का हिस्सा बना लिया है।

डार्कवेब, ऑनलाइन नेटवर्क और वीडियो बेचने के सिंडिकेट की जांच

फॉरेंसिक और साइबर विशेषज्ञ अब वीडियो फाइलों के मेटा डेटा, लोकेशन स्टैम्प और डिवाइस टाइमलाइन का गहन विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ये वीडियो किस स्थान और किस तारीख को रिकॉर्ड किए गए थे। मोबाइल से ऑनलाइन गतिविधियों, विशिष्ट सॉफ्टवेयर टूल्स और संदिग्ध वेब लिंक्स की भी जानकारी मिली है। जांच एजेंसियां इस बिंदु पर केंद्रित हैं कि क्या जॉर्डन ब्राउन बाल शोषण सामग्री (CSAM) के किसी अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन नेटवर्क या डार्कनेट गिरोह से जुड़ा था और क्या इन वीडियो को व्यावसायिक लाभ के लिए बेचा गया था।

नौ महीने की फरारी और फंडिंग का रहस्य

गिरफ्तारी के वक्त जॉर्डन के पास से 31,460 रुपये की नकदी और एक एयरटेल का स्थानीय सिम कार्ड बरामद हुआ था। अब जांच का अहम दायरा उसके वित्तीय स्रोतों की ओर मुड़ गया है। एजेंसियां यह खंगाल रही हैं कि अक्टूबर 2025 में दिल्ली एयरपोर्ट से भागने के बाद देश के अलग-अलग शहरों में फरारी काटने के दौरान उसके ठहरने, यात्रा करने और रोजमर्रा के भारी खर्चों की फंडिंग कहां से हो रही थी और इसमें किन स्थानीय मददगारों की भूमिका थी।

पटियाला हाउस कोर्ट ने भेजा तिहाड़, 28 सितंबर को अगली सुनवाई

उल्लेखनीय है कि 29 अक्टूबर 2025 को आईजीआई एयरपोर्ट पर ट्रांजिट के दौरान थाई पुलिस की गिरफ्त से भागने के बाद दिल्ली पुलिस, केंद्रीय खुफिया एजेंसी (IB) और सीआईएसएफ समेत कई एजेंसियां उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थीं। अंततः जून 2026 में सोनौली बॉर्डर पार करते समय उसे धर दबोचा गया। सोनौली पुलिस द्वारा आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद मामले में दो तारीखें पड़ चुकी हैं, लेकिन प्रशासनिक कारणों और दिल्ली में पेशी के चलते बहस पूरी नहीं हो सकी। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है।

विधिक सेवा प्राधिकरण के लीगल डिफेंस काउंसिल आशुतोष पांडेय के मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने विवेचना में जॉर्डन पर बच्चों के आपत्तिजनक वीडियो बनाकर और बेचकर अवैध आर्थिक लाभ कमाने का गंभीर आरोप लगाया है। बाल वीडियोग्राफी और पॉक्सो/आईटी एक्ट से जुड़े इन नए बिंदुओं पर अदालत में अब अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय की गई है।

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