Monday , 5 October 2026

लखनऊ में गोमती का रौद्र रूप: खतरे के निशान के पार पहुंचा जलस्तर, लेटे हुए हनुमान जी के चरणों तक पहुंचा पानी; अलर्ट पर प्रशासन

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। पिछले कई दिनों से जारी उफान के कारण गोमती नदी सामान्य से करीब आठ फीट ऊपर बह रही है और 108.14 मीटर के खतरनाक निशान तक पहुंच चुकी है। जलस्तर में आए इस अप्रत्याशित उछाल ने शहर के तटीय रिहायशी इलाकों, सार्वजनिक पार्कों और धार्मिक स्थलों को अपनी जद में लेना शुरू कर दिया है। शहर के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

धार्मिक स्थल और रिवरफ्रंट जलमग्न, ‘फूड वैली’ अस्थाई रूप से बंद

नदी में पानी का फैलाव इतनी तेजी से बढ़ा है कि हनुमंत धाम (हनुमान सेतु मंदिर परिसर), प्राचीन शनि देव मंदिर और लक्ष्मण मेला मैदान के आसपास कई फीट तक पानी भर गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गोमती रिवरफ्रंट स्थित लोकप्रिय ‘फूड वैली’ और पार्कों को एहतियात के तौर पर पर्यटकों व आम लोगों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

लेटे हुए हनुमान जी के चरणों तक पहुंचा पानी, बाहर से होगी पूजा

गोमती के उफान का असर प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान मंदिर पर भी पड़ा है, जहां मंदिर परिसर के भीतर तक पानी प्रवेश कर चुका है। मंदिर के मुख्य पुरोहित विनोद तांगड़ी ने बताया कि मां गोमती, श्री हनुमान जी के चरणों तक पहुंच चुकी हैं और शीघ्र ही उन्हें स्नान कराने वाली हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006-07 के बाद ऐसी विकट परिस्थिति बनी है, जब जलस्तर इतना अधिक बढ़ा है। पुरोहित के अनुसार, नदी के उफान से डाउनस्ट्रीम की करीब 20 से 25 प्रतिशत आबादी प्रभावित हुई है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, अत्यधिक जलभराव होने पर मंदिर के कपाट के बाहर से ही पूजन-अर्चन का निर्णय लिया गया है। इस दौरान विग्रह पर लाल चादर रखी जाएगी और दूर से ही आरती व भोग समर्पित किया जाएगा, क्योंकि मान्यता के अनुसार जलमग्न होने पर हनुमान जी ‘विश्राम अवस्था’ में चले जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1956 से 1983-84 के दौर में गोमती हर वर्ष हनुमान जी को स्नान कराती थी।

ग्रामीण इलाकों में नावें तैनात, राहत शिविरों में पहुंचाए जा रहे लोग

शहरी क्षेत्र के साथ-साथ लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में भी बाढ़ का संकट गहराया हुआ है। बख्शी का तालाब (BKT) तहसील के लासा, बहादुरपुर, सुल्तानपुर और अकड़िया मऊ जैसे गांवों में पानी का स्तर हल्का जरूर गिरा है, लेकिन ग्रामीणों की मुश्किलें जस की तस हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों के सुरक्षित आवागमन और मदद के लिए 30 नावें तैनात की हैं। प्रभावितों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था के लिए चार राहत शिविर व सहायता केंद्र सक्रिय किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में मेडिकल किट और पानी साफ करने के लिए क्लोरीन की गोलियां बांट रही हैं, जबकि पशुपालन विभाग मवेशियों के चारे-भूसे और उपचार में जुटा है।

नाव पर सवार होकर निकले डीएम और जेसीपी, ड्रोन से एंटी-लार्वा का छिड़काव

हालात की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी (डीएम) विशाख जी और संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) बबलू कुमार ने खुद मोर्चा संभाला। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने नाव पर सवार होकर जलमग्न क्षेत्रों का दौरा किया और जमीनी हकीकत परखी। डीएम ने मातहत अधिकारियों को राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की सख्त चेतावनी दी है। वहीं, फैजुल्लागंज में भी स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। यहां डीएम ने नाव के जरिए पहुंचकर प्रभावित परिवारों को ड्राई राशन किट वितरित की। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने फैजुल्लागंज का दौरा कर जलनिकासी और बचाव कार्यों की समीक्षा की। नगर निगम पंपसेट लगाकर बस्तियों से पानी बाहर निकालने में जुटा है, जबकि जलभराव के बाद मच्छरों और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए पहली बार ड्रोन के माध्यम से एंटी-लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। समूचे प्रशासनिक और राजस्व अमले को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रखा गया है।

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