Thursday , 1 October 2026

यूपी राज्यसभा चुनाव में 10वीं सीट पर फंसा पेंच: सपा और भाजपा में सेंधमारी की होड़…क्या क्रॉस वोटिंग से ही तय होगी जीत की बाजी ?

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले सियासी संग्राम में 10वीं सीट को लेकर मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटेदार हो गया है। मौजूदा विधानसभा के संख्या बल के अनुसार, समाजवादी पार्टी (सपा) अपने दम पर दो सीटें और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सात सीटें आसानी से जीत सकती हैं। हालांकि, सपा के तीसरे और भाजपा के आठवें उम्मीदवार के लिए संख्या बल अधूरा है। ऐसे में 10वीं सीट पर जीत का सेहरा उसी के सिर बंधेगा, जो विरोधी या सहयोगी खेमे में सेंधमारी कर क्रॉस वोटिंग कराने में कामयाब होगा।

क्या है विधानसभा का गणित और एक सीट का कोटा?

यूपी विधानसभा के 7 पद वर्तमान में रिक्त हैं, जिसके चलते सदन में कुल सदस्यों की संख्या 396 रह गई है। वहीं, जेल में बंद सपा विधायक रमाकांत यादव के मतदान करने आने की संभावना न के बराबर है। ऐसे में अधिकतम 395 वोट ही पड़ने की उम्मीद है। इस चुनावी गणित के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के न्यूनतम 36 मतों की दरकार होगी। सपा के पिछले राज्यसभा चुनाव में बगावत करने वाले विधायकों को अलग कर दिया जाए, तो कांग्रेस के 2 विधायकों को मिलाकर सपा गठबंधन के पास कुल 99 विधायकों का ही संख्या बल बचता है। सपा को अपने तीनों प्रत्याशियों को जिताने के लिए 108 वोटों की जरूरत है, यानी पार्टी को 9 अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करना होगा।

सुभासपा के दो विधायकों से सपा को पक्की उम्मीद

सपा के रणनीतिकारों का मानना है कि एनडीए गठबंधन में शामिल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के दो विधायकों—अब्बास अंसारी और जगदीश नारायण राय—का वोट उनके पाले में आना लगभग तय है। जगदीश नारायण राय ने पिछले चुनाव में भी दलीय व्हिप से इतर सपा प्रत्याशी के पक्ष में ही मतदान किया था। इसके अलावा सपा का दावा है कि एनडीए के अन्य घटक दल, जैसे अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी के कुछ असंतुष्ट विधायक भी लगातार उनके संपर्क में बने हुए हैं। आगामी विधानसभा चुनावों में टिकट की गारंटी के आधार पर ये विधायक पाला बदलने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।

योगी सरकार के दो मंत्रियों और भाजपा विधायकों पर सपा की नजर

सपा के अंदरूनी सूत्रों का दावा इससे भी बड़ा है। पार्टी खेमे की मानें तो भाजपा के करीब 6 से 7 विधायक उनके संपर्क में हैं, जो अगले चुनाव में सुरक्षित राजनीतिक भविष्य के वादे पर क्रॉस वोटिंग के लिए तैयार हैं। इसके अलावा चर्चा है कि मौजूदा सरकार के दो मंत्रियों को लेकर भी सियासी हलचल तेज है। इनमें से एक मंत्री पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आते हैं और रालोद के साथ गठबंधन के चलते असहज महसूस कर रहे हैं, जबकि एक अन्य मंत्री की सपा के शीर्ष नेतृत्व से गुप्त मुलाकात की भी चर्चाएं हैं। सपा का शीर्ष नेतृत्व इन्हीं असंतुष्ट चेहरों के बूते अपने तीसरे प्रत्याशी की जीत का दावा ठोक रहा है।

Check Also

इटावा में दर्दनाक हादसा: मैनपुरी ट्रैक पर मालगाड़ी की चपेट में आए इंजीनियरिंग के दो छात्र, छात्र की मौके पर मौत; छात्रा सैफई रेफर

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में बुधवार शाम एक दर्दनाक रेल हादसे में मैकेनिकल इंजीनियरिंग …