
उत्तर प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में बादलों ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल कर रख दिया है। अगस्त महीने में सामान्य से 24 फीसदी अधिक बारिश दर्ज किए जाने के बाद अब सितंबर की शुरुआत भी मूसलाधार बारिश के साथ हुई है। महीने के पहले ही दिन यानी 1 सितंबर को प्रदेश के कई जिलों में बादलों ने जमकर कहर बरपाया। प्रतापगढ़ में 147 मिलीमीटर और सोनभद्र में 140 मिलीमीटर की भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस बीच मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के 21 जिलों में भारी बारिश, वज्रपात और गरज-चमक को लेकर ताजा चेतावनी जारी कर दी है।
21वीं सदी का दूसरा सबसे भीगा अगस्त साबित हुआ अगस्त-2026
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, अगस्त-2026 उत्तर प्रदेश के इतिहास में 21वीं सदी का दूसरा सबसे अधिक बारिश वाला अगस्त साबित हुआ है। इस पूरे महीने में प्रदेशभर में 291.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इसका दीर्घकालिक औसत 235.5 मिमी रहता है। इस तरह पूरे राज्य में सामान्य से 24 प्रतिशत अधिक पानी बरसा। इससे पहले सदी का सबसे अधिक बारिश वाला रिकॉर्ड वर्ष 2018 के नाम दर्ज है, जब अगस्त में 293.1 मिमी वर्षा हुई थी।
प्रयागराज और बांदा में 1901 के बाद सबसे ज्यादा बारिश, टूटे सर्वकालिक रिकॉर्ड
इस मानसूनी सीजन में कई दशक पुराने ऐतिहासिक आंकड़े भी ध्वस्त हो गए हैं। प्रयागराज में अगस्त के दौरान 631.6 मिमी और बांदा में 646 मिमी अभूतपूर्व बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के 1901 से उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन दोनों जिलों में अगस्त महीने में दर्ज की गई यह अब तक की सबसे अधिक वर्षा है।
बंगाल की खाड़ी में बने सात सिस्टम ने बढ़ाई सक्रियता
अगस्त माह में हुई इस अप्रत्याशित बारिश के पीछे मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी में बने बैक-टू-बैक चक्रवाती सिस्टम रहे। पूरे महीने के दौरान बंगाल की खाड़ी में कुल सात निम्न दबाव क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) विकसित हुए, जिन्होंने सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के मौसम तंत्र को प्रभावित किया। इनमें से तीन वेदर सिस्टम बेहद शक्तिशाली होकर डिप्रेशन (अवदाब) में तब्दील हो गए, जिसकी बदौलत राज्य में लगातार नमी की आपूर्ति होती रही और मानसून अपनी पूरी ताकत के साथ सक्रिय बना रहा।
बांदा, कानपुर, प्रयागराज समेत 21 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
सितंबर की शुरुआत के साथ ही दक्षिण और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां चरम पर हैं। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर और रायबरेली समेत कुल 21 जिलों में भारी बारिश का येलो/ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने इस दौरान आकाशीय बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ वज्रपात की गंभीर आशंका जताई है।
राजधानी लखनऊ में दो घंटे की बारिश से बनी जलभराव की स्थिति
राजधानी लखनऊ में भी सितंबर के पहले ही दिन जोरदार मानसूनी फुहारों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। सुबह हल्की बारिश के बाद शाम को करीब दो घंटे तक लगातार तेज बारिश हुई, जिससे शहर के निचले इलाकों और मुख्य मार्गों पर भारी जलजमाव हो गया और लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ के चिनहट में 59 मिमी, 1090 चौराहे पर 54 मिमी और राजभवन क्षेत्र में 45.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। हालांकि, इस झमाझम बारिश से पारा लुढ़कने के कारण लोगों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिली।
सितंबर में कैसा रहेगा मौसम: पश्चिमी यूपी में सूखा, दक्षिण-पूर्व में झमाझम
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, सितंबर महीने में पूरे उत्तर प्रदेश का मौसम एक समान नहीं रहेगा। पश्चिमी यूपी के अधिकांश जनपदों में मानसूनी गतिविधियां सुस्त पड़ने से सामान्य से कम बारिश के आसार हैं। इसके विपरीत दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में औसत से अधिक वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना है। वहीं दक्षिणी और मध्य यूपी के क्षेत्रों में सामान्य स्तर के आसपास बारिश हो सकती है।
तापमान रहेगा सामान्य से ऊपर, एल-नीनो और IOD का दिखेगा असर
बारिश के सिलसिले के बावजूद सितंबर महीने के दौरान औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से कुछ अधिक बना रह सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सक्रिय मजबूत एल-नीनो (El Nino) की स्थितियां और हिन्द महासागरीय द्विध्रुव (IOD) की गतिविधियां समेत कई वैश्विक मौसमी कारक सितंबर के तापमान और आर्द्रता को सीधे प्रभावित करेंगे।
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