Wednesday , 7 October 2026

बसपा के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह की कंपनियों पर आयकर का शिकंजा: 400 करोड़ से अधिक की देनदारी संभव, दिल्ली मुख्यालय भेजी जा रही रिपोर्ट

 लखनऊ।  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के कद्दावर नेता और रसड़ा से तीन बार विधायक रहे दिवंगत उमाशंकर सिंह से जुड़ी कंपनियों की वित्तीय मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। आयकर विभाग की इंवेस्टीगेशन विंग ने छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों, डिजिटल डेटा और भौतिक साक्ष्यों के गहन विश्लेषण के बाद अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों पर 400 करोड़ रुपये से अधिक की भारी टैक्स देनदारी निकल सकती है। जांच विंग अब इस अंतरिम रिपोर्ट को अंतिम कर निर्धारण (फाइनल टैक्स असेसमेंट) के लिए नई दिल्ली स्थित केंद्रीय आयकर मुख्यालय भेजने की तैयारी में है।

30 से अधिक ठिकानों पर हुई थी व्यापक छापेमारी, मिली थी 10 करोड़ की नकदी

उमाशंकर सिंह के कारोबारी साम्राज्य पर आयकर विभाग की जांच का दायरा काफी बड़ा रहा है। फरवरी 2026 में इंवेस्टीगेशन विंग ने उनके लखनऊ, बलिया, सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयागराज और कौशांबी स्थित 30 से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ बड़े पैमाने पर छापे मारे थे। कई दिनों तक चली इस कार्रवाई के दौरान लगभग 10 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की गई थी। इसके अतिरिक्त कंपनियों की अचल संपत्तियों, खनन ठेकों, सड़क निर्माण परियोजनाओं और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े भारी मात्रा में दस्तावेज व हार्ड डिस्क जब्त किए गए थे।

कैग (CAG) रिपोर्ट के खुलासे के बाद शुरू हुई थी जांच की कड़ी

इस पूरी जांच का आधार सोनभद्र में हुए कथित अवैध खनन से सरकारी खजाने को पहुंचे नुकसान की रिपोर्ट बनी। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में सोनभद्र क्षेत्र में अवैध खनन के जरिए लगभग 60 करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व के नुकसान का स्पष्ट उल्लेख किया गया था। इस खुलासे के बाद आयकर विभाग ने सड़क निर्माण और खनन क्षेत्र में सक्रिय उमाशंकर सिंह की कंपनियों के वित्तीय खातों और परमिटों की पड़ताल शुरू की। जांच दल ने खनन के लिए स्वीकृत पट्टे के रकबे और कंपनियों द्वारा वास्तव में निकाले गए खनिज के बीच के अंतर का बारीकी से मिलान किया।

ड्रोन और सैटेलाइट इमेजिंग से पकड़ी गई कागजों और जमीन की दूरी

विभाग ने इस मामले में जांच को केवल कागजी फाइलों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आधुनिक फॉरेंसिक व तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। मिर्जापुर और सोनभद्र के खनन क्षेत्रों में ड्रोन सर्वे और सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए वास्तविक खनन क्षेत्र की 3D मैपिंग कराई गई। इससे यह उजागर हुआ कि आधिकारिक दस्तावेजों में जितना खनन दर्ज था, मौके पर उससे कई गुना ज्यादा पहाड़ी और वन क्षेत्र खोदा गया था। जांच में सामने आया कि बड़े पैमाने पर खनिजों की गुप्त बिक्री कर आयकर की भारी चोरी की गई।

खनन विभाग के अधिकारियों पर भी आंच, उपकृत करने के मिले संकेत

आयकर विभाग की रिपोर्ट में खनन महकमे के कई जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जब्त दस्तावेजों में ऐसे लेन-देन और डायरियों के अंश मिले हैं, जिनसे खनन विभाग और खनन निदेशालय के कुछ अफसरों को गैर-वाजिब तरीके से उपकृत किए जाने के संकेत मिलते हैं। रिपोर्ट में इन अधिकारियों को चिन्हित करते हुए उनसे जवाब-तलब करने और संबंधित प्रशासनिक विभागों को कार्रवाई के लिए लिखने की बात कही गई है।

तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह का अगस्त में हुआ था निधन

बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले उमाशंकर सिंह का 6 अगस्त 2026 को आकस्मिक निधन हो गया था। हालांकि, उनके देहांत के बाद भी कानूनन उनकी कंपनियों, पार्टनरशिप फर्मों और संबंधित व्यावसायिक संस्थाओं के स्तर पर आयकर विभाग की यह जांच निरंतर जारी रही। अब दिल्ली मुख्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद टैक्स निर्धारण और रिकवरी की कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी।

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