जापान के नागोया में आयोजित हुए एशियाई खेल 2026 का महाकुंभ अब समाप्त हो चुका है। इस बार के एशियाई खेलों में भारतीय दल का अभियान कुल 85 पदकों (जिसमें 21 स्वर्ण पदक शामिल हैं) के साथ शानदार अंदाज में संपन्न हुआ। हालांकि इस बार भारतीय दल पिछली बार के अपने 106 पदकों के रिकॉर्ड आंकड़े को पार नहीं कर सका, लेकिन नागोया की इस खेल भूमि पर भारतीय महिला खिलाड़ियों ने एक ऐसी ऐतिहासिक और सुनहरी कहानी लिख दी है, जो आने वाले कई सालों तक याद रखी जाएगी। इस बार के पदकों के गणित में महिलाओं और पुरुषों की कुल संख्या तो बराबर (38-38) रही, लेकिन ‘सोने की चमक’ के मामले में देश की बेटियों ने पुरुषों को पीछे छोड़ते हुए बाजी मार ली है।
पदक तालिका का पूरा लेखा-जोखा: महिलाओं का दबदबा
नागोया एशियाई खेल 2026 में भारतीय महिला और पुरुष खिलाड़ियों के पदकों का प्रदर्शन बेहद दिलचस्प रहा है। दोनों ने ही व्यक्तिगत स्पर्धाओं में ठीक 38-38 पदक अपने नाम किए, लेकिन गोल्ड मेडल (स्वर्ण पदक) जीतने के मामले में बेटियां बेटों पर भारी पड़ीं।
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महिला वर्ग: कुल 38 पदक जीते, जिसमें 11 स्वर्ण, 11 रजत और 16 कांस्य पदक शामिल रहे।
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पुरुष वर्ग: कुल 38 पदक जीते, जिसमें 7 स्वर्ण, 14 रजत और 17 कांस्य पदक आए।
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मिश्रित (Mixed) स्पर्धाएं: भारत को मिक्स्ड इवेंट्स से कुल 9 पदक (3 स्वर्ण, 2 रजत और 4 कांस्य) हासिल हुए।
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कुल योग: भारत के कुल 85 पदकों (21 स्वर्ण, 27 रजत, 37 कांस्य) में महिलाओं और पुरुषों की हिस्सेदारी कुल पदकों के लिहाज से बिल्कुल बराबर रही, लेकिन देश के कुल 21 स्वर्ण पदकों में अकेले महिलाओं का योगदान आधे से भी ज्यादा (11 स्वर्ण) रहा।
| वर्ग | स्वर्ण | रजत | कांस्य | कुल पदक |
| महिलाएं | 11 | 11 | 16 | 38 |
| पुरुष | 7 | 14 | 17 | 38 |
| मिश्रित | 3 | 2 | 4 | 9 |
| कुल | 21 | 27 | 37 | 85 |
तीरंदाजी से लेकर गोल्फ तक: बेटियों ने रचे नए इतिहास
नागोया के मैदान पर भारतीय महिला एथलीटों ने हर खेल में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। तीरंदाजी के क्षेत्र में भारतीय महिलाओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इसमें कुमकुम मोहोद ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर एशियाई खेलों के इतिहास में इस स्पर्धा का भारत के लिए पहला स्वर्ण हासिल किया, साथ ही उनकी टीम ने भी सोने का तमगा जीता।
गोल्फ के मैदान पर प्रणवी उर्स ने महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया, क्योंकि एशियाई खेलों के व्यक्तिगत गोल्फ में किसी भी भारतीय महिला का यह पहला स्वर्ण पदक था। इसके अलावा बॉक्सिंग रिंग में परवीन हुड्डा और ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने अपने-अपने भार वर्ग में बेहतरीन खेल दिखाते हुए देश के लिए स्वर्ण जीते। शूटिंग रेंज में भी नीरू ढांढा ने व्यक्तिगत और मिश्रित टीम स्पर्धा में सोना जीतकर अहम भूमिका निभाई।
क्रिकेट और कबड्डी का दबाव, हॉकी में 44 साल का सूखा खत्म
टीम स्पर्धाओं की बात करें तो महिला क्रिकेट और कबड्डी टीमों पर देश की उम्मीदों का भारी दबाव था, जिसे उन्होंने बखूबी निभाते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। सबसे ऐतिहासिक पल महिला हॉकी टीम की तरफ से आया, जहां टीम ने फाइनल मुकाबले में मजबूत चीन को शिकस्त देकर पूरे 44 साल का लंबा इंतजार खत्म करते हुए एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा एथलेटिक्स ट्रैक पर भी महिलाओं का जलवा देखने को मिला, जहां 4×400 मीटर रिले रेस में विद्या रामराज, किरण पहल, एमआर पूवम्मा और प्राची चौधरी की चौकड़ी ने शानदार दौड़ लगाते हुए देश को स्वर्ण पदक दिलाया।
पदक बराबर, लेकिन देश की झोली में असर बड़ा
भले ही भारत पदक तालिका में अपना चौथा स्थान बरकरार रखने में कामयाब रहा हो, लेकिन महिला खिलाड़ियों के इन 11 स्वर्ण पदकों का योगदान सबसे बड़ा और निर्णायक साबित हुआ। 38-38 पदकों की बराबरी के बाद भी ’11 बनाम 7′ का यह स्वर्ण आंकड़ा इस बात की गवाही देता है कि नागोया एशियाई खेलों में भारतीय महिलाओं ने सिर्फ मेडल ही नहीं जीते, बल्कि सबसे चमकदार और मूल्यवान पदकों में अपनी बड़ी हिस्सेदारी दर्ज कराकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
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