
अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे की रकम चुराने का मामला अब एक सुनियोजित और बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। मामले में दाखिल पुलिस चार्जशीट से कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, मंदिर के कैश काउंटिंग रूम (गणना कक्ष) में यह हेरफेर किसी एक दिन का नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा था। चार्जशीट में दर्ज बयानों में दावा किया गया है कि इस संगठित चोरी में 67 लड़के शामिल थे, जो दान की रकम की गिनती के दौरान नोटों की गड्डियों को पार कर रहे थे।
चेकिंग शुरू होते ही बाथरूम में फेंके 2.25 लाख रुपये
इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ तब हुआ जब निगरानी के दौरान एक कर्मी को नोटों की गड्डी हटाते हुए रंगे हाथों देख लिया गया। शक गहराने पर जैसे ही गणना कक्ष के मुख्य गेट पर तलाशी शुरू की गई, आरोपितों में हड़कंप मच गया। खुद को फंसता देख रकम को आनन-फानन में गणना कक्ष के बाथरूम में छिपा दिया गया। हालांकि, जब सघन तलाशी ली गई तो बाथरूम से 2.25 लाख रुपये की लावारिस नकदी बरामद हो गई, जिसे तत्काल ट्रस्ट के प्रतिनिधि विनय श्रीवास्तव ने सुरक्षित बॉक्स में रखवा दिया।
दिल्ली से लौटते वक्त चंपत राय के पास पहुंचा था वीडियो
चार्जशीट के मुताबिक, इस मामले की पहली जानकारी तत्कालीन महासचिव चंपत राय को 4 जून को मिली थी। उस समय वे दिल्ली से अयोध्या के सफर पर थे। आनंद कुमार चौधरी ने उन्हें व्हाट्सएप के जरिए लिखित संदेश और बाथरूम से बरामद 2.25 लाख रुपये का वीडियो भेजा था। संदेश में बताया गया था कि कुछ लड़के कई दिनों से लगातार चोरी कर रहे हैं और इसमें करीब 67 लड़कों का गिरोह सक्रिय हो सकता है। हालांकि, चार्जशीट के संबंधित हिस्से में इस संख्या के विस्तृत आधार का अलग से जिक्र नहीं है।
लैपटॉप पर फुटेज देखकर दंग रह गए जिम्मेदार
अगले ही दिन, 5 जून को चंपत राय के कारसेवकपुरम स्थित आवास पर डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल और नरेंद्र कुमार सिंह पहुंचे। नरेंद्र ने लैपटॉप पर गणना कक्ष के कई सीसीटीवी वीडियो दिखाए, जिनमें कर्मचारी दान के नोटों की गड्डियां गायब करते साफ नजर आ रहे थे। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अनिल कुमार मिश्रा, गोपाल और नरेंद्र कुमार सिंह के बयानों से भी इस फुटेज और घटनाक्रम की पूरी तस्दीक हुई है।
टेबल के नीचे और कमर में छिपा लेते थे नोटों की गड्डियां
चार्जशीट में गणना कर्मी मदन गोपाल निगम के बयानों को भी अहम आधार बनाया गया है। मदन गोपाल के मुताबिक, 3 जून को दूसरी शिफ्ट की कैश काउंटिंग के दौरान करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला उर्फ शनि और अनुकल्प मिश्रा की गतिविधियों पर संदेह हुआ था। उसने देखा कि ये लोग नोटों के बंडल उठाकर सीधे टेबल के नीचे या अपनी कमर में छिपा रहे थे। इसकी सूचना तुरंत अन्य कर्मियों और ट्रस्ट को दी गई। 4 जून को जब कड़ी निगरानी रखी गई, तो अविनाश शुक्ला उर्फ शनि दोबारा नोटों की गड्डी उठाते पकड़ा गया।
सीसीटीवी फुटेज ने खोले राज: 85 बार चोरी करते दिखा शनि, चैट में बंडलों का कोड
पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से आरोपियों की भूमिका की परतें खुली हैं। चार्जशीट के अनुसार, मुख्य आरोपित अविनाश शुक्ला उर्फ शनि कैमरे में कुल 85 बार चढ़ावे की रकम चुराते और चार बार अन्य साथियों का सहयोग करते कैद हुआ है। वहीं, करुणेश पांडेय 2 बार सीधी चोरी और 68 बार साथियों की मदद करते दिखा। मनीष यादव 16 बार रकम रखते और 19 बार सहयोग करते, रमाशंकर मिश्रा एक बार रकम चुराते, लवकुश मिश्रा एक बार चोरी व 52 बार मदद करते तथा अनुकल्प मिश्रा 56 बार नकदी हटाने में सहयोग करते नजर आए। पुलिस को मिले व्हाट्सएप चैट में भी नकदी के बंडलों के लेन-देन का ब्योरा दर्ज है।
700 बैंक खातों की गहन पड़ताल, चंपत राय के नाम कोई खाता नहीं
राम मंदिर दान चोरी मामले की तह तक जाने के लिए जांच एजेंसियों ने लगभग 700 बैंक खातों की बारीकी से पड़ताल की। इस वित्तीय जांच में ट्रस्टियों, आरोपितों, संदिग्धों, गणना कर्मियों और ट्रस्ट से जुड़े स्टाफ के खातों के लेन-देन का विश्लेषण किया गया। साथ ही ट्रस्ट के आधिकारिक खातों को भी जांच के दायरे में रखा गया। पुलिस जांच में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि पूरे मामले की छानबीन के दौरान चंपत राय के नाम पर कोई भी निजी बैंक खाता नहीं मिला।
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