
उम्र बढ़ने के साथ त्वचा की चमक और कसावट का कम होना स्वाभाविक है, लेकिन जब जवानी में ही चेहरे पर झुर्रियां, फाइन लाइन्स और ढीलापन नजर आने लगे, तो सतर्क हो जाना चाहिए। लोग अपनी त्वचा को जवां बनाए रखने के लिए महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं, फिर भी कई बार मनचाहा निखार नहीं मिल पाता। इसका सबसे बड़ा कारण हमारी दिनचर्या में छुपी वे गलतियां हैं, जो शरीर में ‘कोलेजन’ के प्राकृतिक उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। कोलेजन एक तरह का महत्वपूर्ण प्रोटीन है, जो न केवल त्वचा के लचीलेपन और कसावट को बनाए रखता है, बल्कि बालों, नाखूनों और हड्डियों की मजबूती के लिए भी रीढ़ का काम करता है। जैसे ही शरीर में इसका स्तर घटता है, समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण चेहरे पर दस्तक देने लगते हैं।
1. मीठी चीजों का ज्यादा सेवन और ग्लाइकेशन का खतरा
अगर आप मिठाई, रिफाइंड शुगर या शुगरी ड्रिंक्स के शौकीन हैं, तो यह आदत आपकी त्वचा के लिए सबसे बड़ा खतरा है। अत्यधिक चीनी का सेवन शरीर में ‘ग्लाइकेशन’ प्रक्रिया को तेज कर देता है। इस प्रक्रिया में शुगर के अणु कोलेजन और इलास्टिन फाइबर्स से जुड़ जाते हैं, जिससे कोलेजन कठोर और कमजोर होकर टूटने लगता है। इसका नतीजा यह होता है कि त्वचा का प्राकृतिक खिंचाव कम हो जाता है और चेहरे पर महीन रेखाएं दिखने लगती हैं। मीठे की क्रेविंग होने पर सफेद चीनी की जगह सीमित मात्रा में शहद, गुड़ या खजूर जैसे प्राकृतिक विकल्पों को चुनना बेहतर होता है।
2. सिगरेट और निकोटिन का घातक असर
धूम्रपान सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि त्वचा के स्वास्थ्य को भी तेजी से तबाह करता है। सिगरेट में मौजूद निकोटिन रक्त वाहिकाओं को संकरा कर देता है, जिससे त्वचा की कोशिकाओं तक पर्याप्त ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते। इसके अलावा, स्मोकिंग से शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ते हैं, जो कोलेजन को सीधे नुकसान पहुंचाते हैं। इससे त्वचा अपनी चमक खोकर बेजान, पीली और समय से पहले ढीली होने लगती है।
3. सनस्क्रीन से दूरी और यूवी किरणों की मार
अक्सर लोग केवल चिलचिलाती धूप में ही सनस्क्रीन लगाना जरूरी समझते हैं, जबकि यह एक बड़ी भूल है। मौसम चाहे सर्दी का हो, बारिश का या फिर आसमान में बादल छाए हों, सूरज से निकलने वाली हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें लगातार त्वचा पर असर डालती हैं। यूवी किरणें त्वचा की गहराई में जाकर कोलेजन टिश्यू को नष्ट कर देती हैं। नियमित सनस्क्रीन न लगाने से समय से पहले झुर्रियां, पिगमेंटेशन, डार्क स्पॉट्स और टैनिंग की समस्या तेजी से बढ़ती है। इसलिए घर से बाहर निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल अनिवार्य है।
4. अधूरी नींद और बाधित रिपेयरिंग सिस्टम
रात की नींद के दौरान हमारा शरीर ‘सेल्युलर रिपेयर’ मोड में चला जाता है, जहां त्वचा की नई कोशिकाएं बनती हैं और कोलेजन का पुनर्निर्माण होता है। यदि आप रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद नहीं ले रहे हैं, तो यह रिपेयरिंग साइकिल पूरी तरह बाधित हो जाती है। नींद की कमी से चेहरे की रंगत फीकी पड़ जाती है, आंखों के नीचे काले घेरे (डार्क सर्कल्स) उभर आते हैं और त्वचा समय से पहले बेजान नजर आने लगती है।
5. हर वक्त तनाव में रहना और कोर्टिसोल का बढ़ना
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव आम बात है, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला क्रॉनिक स्ट्रेस त्वचा का सबसे बड़ा दुश्मन है। जब कोई व्यक्ति लगातार तनाव में रहता है, तो शरीर में ‘कोर्टिसोल’ यानी स्ट्रेस हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है। कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर कोलेजन फाइबर्स को तेजी से तोड़ने का काम करता है। इससे त्वचा डल दिखने लगती है, नेचुरल ग्लो गायब हो जाता है और एजिंग प्रोसेस कई गुना तेज हो जाती है। तनाव प्रबंधन के लिए योग, मेडिटेशन और नियमित वॉक को जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है।
voice of india