Sunday , 27 September 2026

UP Rent Agreement Stamp Duty: यूपी में मकान-दुकान किराये पर लेना-देना हुआ बेहद सस्ता, योगी सरकार का बड़ा फैसला; अब मात्र ₹1000 में होगा रजिस्ट्रेशन

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मकान, दुकान या व्यावसायिक गोदाम किराये पर लेने और देने वाले लोगों के लिए योगी सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में किरायेदारी व्यवस्था (Rent Agreement) को पारदर्शी, सरल और किफायती बनाने के ऐतिहासिक प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। प्रदेश सरकार ने 10 वर्ष तक की अवधि के लिए निष्पादित होने वाले किरायेदारी और पट्टा विलेखों (लीज डीड) पर प्रभावी स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण फीस में संशोधन करते हुए स्लैब आधारित निर्धारित शुल्क व्यवस्था लागू कर दी है। इस फैसले से आम नागरिकों और व्यापारियों को भारी-भरकम स्टाम्प खर्च से मुक्ति मिलेगी।

सर्किल रेट के झंझट से मिली मुक्ति, खत्म हुआ अतिरिक्त वित्तीय बोझ कैबिनेट बैठक में लिए गए इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी साझा करते हुए स्टाम्प, न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि अब तक प्रदेश में कोई भी भवन, दुकान या गोदाम किराये पर लेने-देने के दौरान स्टाम्प शुल्क की गणना सर्किल रेट के आधार पर की जाती थी। सर्किल रेट आधारित इस जटिल व्यवस्था के कारण औपचारिक किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) तैयार कराना और उसका उप-निबंधक कार्यालय में कानूनी पंजीकरण कराना काफी महंगा पड़ता था। अत्यधिक खर्च के डर से अधिकांश लोग कानूनी अनुबंध कराने से बचते थे, जिससे भविष्य में मकान मालिक और किरायेदार के बीच कानूनी विवाद बढ़ जाते थे। इसी विसंगति को दूर करते हुए सरकार ने स्टाम्प गणना को सर्किल रेट के दायरे से बाहर कर एकमुश्त और किफायती शुल्क में बदल दिया है।

सालाना किराये के हिसाब से समझें नया शुल्क ढांचा योगी सरकार ने सालाना 10 लाख रुपये तक के किराये पर स्टाम्प और पंजीयन शुल्क का एक स्पष्ट और बेहद सस्ता ढांचा तैयार किया है। इसके अंतर्गत अब निर्धारित स्लैब के अनुसार ही शुल्क देना होगा:

  • दो लाख रुपये तक के सालाना किराये पर: अब केवल 1,000 रुपये शुल्क देना होगा।

  • छह लाख रुपये तक के सालाना किराये पर: मात्र 3,000 रुपये का निर्धारित शुल्क लगेगा।

  • 10 लाख रुपये तक के सालाना किराये पर: अधिकतम 4,500 रुपये का वार्षिक शुल्क तय किया गया है।

10 साल तक के पट्टा विलेखों पर प्रभावी होगा नया नियम यह नई सरल दरें अधिकतम 10 वर्ष तक की समयावधि के लिए निष्पादित होने वाले किरायेदारी विलेखों (पट्टा विलेख) पर लागू होंगी। सरकार का मानना है कि शुल्क बेहद मामूली होने के कारण अब लोग नोटरी पर साधारण अनुबंध कराने के बजाय विधिवत पंजीकृत रेंट एग्रीमेंट कराने के लिए आगे आएंगे। इससे न केवल किरायेदारों को अनुचित विवादों से सुरक्षा मिलेगी, बल्कि मकान मालिकों के संपत्ति अधिकारों को भी कानूनी मजबूती हासिल होगी। साथ ही रजिस्ट्री प्रक्रिया आसान होने से प्रदेश में किरायेदारी विवादों में भी भारी कमी आने की उम्मीद है।

 

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