Thursday , 1 October 2026

TMC में घमासान: ममता बनर्जी और अरूप रॉय दोनों गुटों पर चला चुनाव आयोग का हंटर, पार्टी नाम और ‘जोड़ा फूल’ सिंबल फ्रीज, चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के मुख्य बिंदु

कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर छिड़ी वर्चस्व की जंग अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है। आगामी विधानसभा उपचुनावों से ठीक पहले भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पार्टी के संगठनात्मक विवाद पर एक बड़ा अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों प्रतिद्वंद्वी खेमों को तगड़ा झटका दिया है। आयोग ने तत्काल प्रभाव से पार्टी के आधिकारिक नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (AITC) और उसके आरक्षित चुनाव चिन्ह ‘जोड़ा फूल’ (Flowers & Grass) के इस्तेमाल पर पूर्ण रोक लगा दी है। अब ममता बनर्जी और अरूप रॉय, दोनों में से कोई भी गुट आगामी उपचुनाव में इस मूल नाम और सिंबल का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

ममता बनर्जी बनाम अरूप रॉय गुट: चुनाव आयोग ने लागू की अंतरिम व्यवस्था चुनाव आयोग के समक्ष तृणमूल कांग्रेस पर दावेदारी को लेकर दो समानांतर गुट आमने-सामने खड़े हैं। इसमें एक खेमे की कमान खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथों में है, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व याचिकाकर्ता अरूप रॉय कर रहे हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश के पैरा 15 के तहत मूल विवाद के निपटारे के लिए एक विस्तृत और साक्ष्य-आधारित विधिक प्रक्रिया की आवश्यकता है। चूंकि 6 अक्टूबर को राज्य की दो अहम विधानसभा सीटों—रेजीनगर और नंदीग्राम—में उपचुनाव होने हैं और समय बहुत कम बचा है, इसलिए आयोग ने विवाद की अंतिम सुनवाई पूरी होने तक यह तात्कालिक अंतरिम व्यवस्था प्रभावी की है।

विधानसभा चुनाव के बाद से गहराया था संकट, 60 विधायकों की बगावत उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद तृणमूल कांग्रेस भीतर ही भीतर दो फाड़ हो चुकी थी। पार्टी में बगावत का बिगुल उस वक्त फूंका गया जब ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 60 विधायकों ने अलग राह पकड़ ली। हालात इस कदर बदले कि विधानसभा अध्यक्ष ने इस बागी खेमे को मुख्य विपक्षी दल के रूप में मान्यता देते हुए नेता प्रतिपक्ष का पद तक सौंप दिया। हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल टीएमसी ने विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए चुनाव आयोग के साथ-साथ देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा भी खटखटाया है। दोनों गुट संगठन और राष्ट्रीय कार्यसमिति के ढांचे की वैधता को लेकर लगातार अपने-अपने दावों पर अड़े हुए हैं।

आज सुबह 11 बजे तक मांगी 3 नए नाम और सिंबल की प्राथमिकता सूची आयोग ने दोनों धड़ों को निर्देश दिया है कि वे 18 सितंबर 2026 को सुबह 11:00 बजे तक अपनी पसंद के तीन नए नामों और तीन मुक्त चुनाव चिन्हों (Free Symbols) के विकल्प आयोग को प्राथमिकता क्रम में सौंप दें। निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार, दोनों गुट अपने नए समूह के नाम के साथ मूल पार्टी ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के संदर्भ का उपयोग कर सकते हैं। आयोग की अधिसूचित फ्री सिंबल सूची में से दोनों पक्षों के प्रत्याशियों को अलग-अलग प्रतीक आवंटित किए जाएंगे, जिसके आधार पर वे नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के रण में ताल ठोकेंगे।

चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के मुख्य बिंदु

  • दोनों में से किसी भी गुट को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम का अकेले स्वतंत्र रूप से उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।

  • पार्टी का आरक्षित चुनाव चिन्ह ‘घास और फूल’ (Flowers & Grass) आगामी उपचुनावों के लिए पूरी तरह सीज रहेगा।

  • दोनों खेमों को अपने समूह के लिए अलग नाम चुनना होगा, हालांकि वे अपने मूल दल AITC से जुड़ाव का उल्लेख कर सकेंगे।

  • आयोग द्वारा जारी मुक्त चुनाव चिन्हों की आधिकारिक सूची में से दोनों गुटों के उम्मीदवारों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह दिए जाएंगे।

  • दोनों पक्षों को 18 सितंबर 2026 की सुबह 11:00 बजे तक वरीयता क्रम में तीन-तीन नाम और चुनाव चिन्ह आयोग को अनिवार्य रूप से सौंपने होंगे।

  • यह पूरी व्यवस्था केवल आगामी उपचुनावों के सुचारू संचालन के लिए एक अस्थायी कदम है।

  • चुनाव चिन्ह आदेश के पैरा 15 के तहत पार्टी के असली स्वामित्व और अंतिम अधिकार पर विस्तृत सुनवाई और फैसला बाद में किया जाएगा।

 

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