Thursday , 24 September 2026

रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ का खतरा? ट्रंप को मिला नया कानूनी ‘हथियार’, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया राष्ट्रपति ट्रंप का नया प्लान

अमेरिकी विदेश नीति में टैरिफ (आयात शुल्क) एक बार फिर सबसे बड़े आर्थिक और रणनीतिक हथियार के रूप में सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रीय नीति के एक प्रभावी औजार के रूप में टैरिफ के इस्तेमाल में गहरा विश्वास रखते हैं। हाल ही में लागू हुए एक कड़े प्रतिबंध कानून ने अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस-यूक्रेन संघर्ष और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों को प्रभावित करने के लिए व्यापक शक्तियां सौंप दी हैं।

क्या है नया रूस-ईरान प्रतिबंध कानून?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) पर हस्ताक्षर कर इसे प्रभावी कानून बना दिया है।

इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह विशेष अधिकार मिल गया है कि वे रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगा सकते हैं। चूंकि भारत और चीन रूसी ऊर्जा के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए इस कदम को सीधे तौर पर इन देशों के व्यापार से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, यह कानून स्वतः टैरिफ लागू नहीं करता, बल्कि राष्ट्रपति को यह कदम उठाने का कानूनी अधिकार देता है।

70 वर्षों बाद राष्ट्रपति को मिला ऐसा व्यापक अधिकार: मार्को रुबियो

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उच्चस्तरीय बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि करीब 70 वर्षों में यह पहला अवसर है जब अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति को इस स्तर का टैरिफ लगाने का विशेषाधिकार दिया है।

रुबियो ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास अब एक बेहद प्रभावी माध्यम है, जिसका उपयोग वे रूस-यूक्रेन युद्ध की दिशा बदलने और ईरान से जुड़े मामलों में दबाव बनाने के लिए कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कानून में राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर विशिष्ट छूट देने का प्रावधान भी शामिल है, जिससे परिस्थितियों के अनुसार लचीला रुख अपनाया जा सकता है। इसका अंतिम उपयोग कब और किस रूप में होगा, इसका पूरा निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप पर निर्भर करेगा।

संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप का कड़ा संदेश

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कानून को असाधारण रूप से ‘शक्तिशाली’ बताया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि रूस से ऊर्जा आयात करने वाले भारत और चीन जैसे बड़े देशों पर टैरिफ लगाने के मजबूत अधिकार उनके पास हैं और युद्ध में हिंसा रोकने के लिए जरूरत पड़ने पर वे इसका इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे।

भारत का रुख: 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं

बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नए अमेरिकी प्रतिबंध कानून को लेकर भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को पूरी स्पष्टता के साथ अमेरिकी प्रशासन के समक्ष रखा।

भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाते हुए दोहराया है कि देश अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारतीय पक्ष ने साफ कर दिया है कि अपने राष्ट्रीय आर्थिक हितों, बाजार की स्थिरता और घरेलू ऊर्जा जरूरतों की रक्षा के लिए भारत आवश्यक और स्वतंत्र कदम उठाना जारी रखेगा।

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