Saturday , 24 October 2026

ट्रंप की नई सैन्य कार्रवाई की धमकी से भड़का तनाव : ईरान की समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काटने की तैयारी, वैश्विक कारोबार पर संकट

वाशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। इस बयान के सामने आते ही युद्ध की लपटें और तेज होने की आशंका पैदा हो गई है। दूसरी ओर, ईरान ने जवाबी रणनीति के तहत बड़ा दांव चलने की चेतावनी दी है। ईरानी सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यदि अमेरिका और इजराइल ने दोबारा ईरान की सीमा में कोई हमला किया, तो खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी प्रमुख संचार और इंटरनेट केबल्स को सीधे निशाना बनाया जाएगा।

ट्रंप बोले- एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ के लिए तैयार अमेरिका

फ्लोरिडा में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ अभियान चला सकता है। उन्होंने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किए गए अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन के नाम का हवाला देते हुए यह बात कही। हालांकि, ट्रंप ने यह खुलासा नहीं किया कि यह संभावित सैन्य कार्रवाई किस तारीख को होगी या इसका स्वरूप क्या रहेगा।

लगातार गहराते युद्ध के बीच ईंधन की वैश्विक कीमतों में उछाल जारी है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमराने की चिंता बढ़ गई है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाइयों के चलते पहले ही हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग बेघर हो चुके हैं।

युद्ध समाप्ति को लेकर ट्रंप के बदले सुर

भाषण से पहले ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका इस युद्ध को बहुत कम समय में खत्म करने की पूरी ताकत रखता है। हालांकि, उन्होंने रणनीतिक सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका को इसे तुरंत समाप्त करना चाहिए या इसे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने देना चाहिए। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका युद्ध खत्म करने में सक्षम है, लेकिन फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि रणनीति क्या अपनाई जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आवाजाही बिना रुकावट जारी है और अमेरिका को रणनीतिक रूप से वह सब कुछ हासिल हो रहा है जो वह चाहता है। गौरतलब है कि ट्रंप युद्ध को लेकर लगातार अलग-अलग रुख अपनाते रहे हैं; हाल ही में उन्होंने यह संकेत भी दिया था कि अमेरिकी संसद पर नियंत्रण तय करने वाले आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर सैन्य हमला नहीं किया जाएगा।

तुर्की और फ्रांस समेत यूरोपीय देशों ने दी चेतावनी

ईरान पर संभावित सैन्य हमले की खबरों से अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में बेचैनी बढ़ गई है। इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के शीर्ष राजनयिकों की एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान पर किसी भी नए हमले से तनाव बेकाबू हो जाएगा और युद्ध पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मसले का एकमात्र हल कूटनीति और बातचीत की मेज पर ही निकल सकता है।

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने भी संयम बरतने की अपील करते हुए आगाह किया कि टकराव बढ़ने से किसी पक्ष को लाभ नहीं होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ेंगी। उधर, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने स्पष्ट किया कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन अभी भी ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के पक्षधर हैं, ताकि उसे परमाणु हथियार बनाने से रोका जा सके।

होर्मुज की 7 प्रमुख अंडरसी केबल्स पर ईरान की नजर

संभावित हमले के जवाब में ईरान ने डिजिटल दुनिया की रीढ़ माने जाने वाले समुद्र के नीचे बिछे संचार नेटवर्क पर प्रहार करने का खाका तैयार किया है। रॉयटर्स से बातचीत में दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की कि हमले की स्थिति में समुद्र के नीचे मौजूद केबल से लेकर सैन्य ठिकानों तक, कुछ भी सुरक्षित नहीं रहेगा। अधिकारियों का दावा है कि इन अहम संचार लाइनों तक ईरान की सीधी पहुंच है और उन्हें तबाह करना बेहद आसान है।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने भी चेतावनी दी है कि यदि ईरान के घरेलू बुनियादी ढांचे पर आंच आई, तो होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे से गुजरने वाली सात बड़ी इंटरनेट केबल्स को काट दिया जाएगा।

वैश्विक इंटरनेट, बैंकिंग और डिजिटल कारोबार पर खतरे के बादल

आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर का लगभग 99 फीसदी इंटरनेट ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी इन्हीं फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए संचालित होता है। यद्यपि होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक बैंडविड्थ का महज एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा गुजरता है, लेकिन यहां केबल कटने की स्थिति में इंटरनेट की गति में भारी गिरावट आ सकती है। इससे सीमा पार वित्तीय लेनदेन, ई-कॉमर्स और क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाओं में बड़ा व्यवधान पैदा हो सकता है।

इस नुकसान की भरपाई इस बात पर निर्भर करेगी कि नेटवर्क ट्रैफिक को अन्य वैकल्पिक मार्गों पर कितनी तेजी से डायवर्ट किया जा सकता है। युद्धग्रस्त क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध और बीमा लागत में अत्यधिक वृद्धि के चलते समुद्र के भीतर टूटी केबलों की तुरंत मरम्मत करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

खाड़ी के ‘एआई विजन’ और टेक हब बनने की राह में रोड़ा

कच्चे तेल पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए खाड़ी देशों ने बड़े पैमाने पर तकनीकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर का निवेश किया है। इसी रणनीति के तहत अमेरिकी तकनीकी कंपनियों की मौजूदगी इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ी है। हालांकि, मार्च में हुए ईरानी हमलों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) की दो इकाइयों और बहरीन में उसकी एक सुविधा से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई थी।

हालात को देखते हुए खाड़ी देशों की सरकारें और टेक कंपनियां अब जमीन के जरिए वैकल्पिक नेटवर्क तैयार करने में जुटी हैं ताकि निर्भरता केवल समुद्री केबलों पर न रहे। इसी कड़ी में माइक्रोसॉफ्ट ने साल 2030 तक पश्चिम एशिया में समुद्र और जमीन के जरिए कनेक्टिविटी को अभेद्य बनाने के लिए 40 करोड़ डॉलर से अधिक के बड़े निवेश की योजना तैयार की है।

 

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