
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: अमेरिका में विदेशी प्रोफेशनल्स को ग्रीन कार्ड दिलाने वाली प्रक्रिया ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम’ (PERM) से 8 दिग्गज आईटी कंपनियों को निलंबित किए जाने के बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का आधिकारिक रुख सामने आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई के बावजूद भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि इस निलंबन से उसकी अमेरिकी भर्ती रणनीति (Recruitment Strategy) और कारोबारी कामकाज पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। कंपनी अपने पूर्व निर्धारित लक्ष्य के अनुसार अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 स्थानीय लोगों को नौकरी देने की योजना पर मजबूती से कायम रहेगी।
इन 8 दिग्गज कंपनियों पर गिरी है अमेरिकी श्रम विभाग की गाज अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट ने वर्क वीजा नियमों और भर्ती प्रक्रियाओं की जांच के तहत जिन आठ बड़ी टेक कंपनियों को PERM प्रोग्राम से सस्पेंड किया है, उनमें भारत की प्रमुख आईटी कंपनियां टीसीएस (TCS), इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro) और एचसीएलटेक (HCL) शामिल हैं। इनके अलावा ग्लोबल आईटी और टेक सेक्टर के प्रमुख नाम कॉग्निजेंट (Cognizant), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), कैपजेमिनी (Capgemini) और एडोबी (Adobe) पर भी यह पाबंदी लगाई गई है। इस कार्रवाई के बाद संबंधित कंपनियों द्वारा दाखिल किए जाने वाले नए आवेदनों और पहले से लंबित प्रक्रियाओं पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।
आखिर क्या है PERM प्रोग्राम और निलंबन के क्या हैं मायने? प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट (PERM) दरअसल अमेरिका में रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) हासिल करने का पहला और अनिवार्य कानूनी चरण है। इसके तहत नियोक्ता कंपनी को अमेरिकी श्रम विभाग के समक्ष यह सिद्ध करना होता है कि संबंधित पद के लिए कोई योग्य, सक्षम और इच्छुक अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नहीं है। साथ ही कंपनी को यह भी सत्यापित करना होता है कि विदेशी पेशेवर को नियुक्त करने से स्थानीय कर्मचारियों के वेतन या कामकाजी परिस्थितियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
इस प्रक्रिया को मंजूरी मिलने के बाद ही कंपनी कर्मचारी के ग्रीन कार्ड के अगले चरणों को आगे बढ़ा पाती है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि PERM से निलंबन को H-1B वीजा पर पाबंदी समझना बिल्कुल गलत है। H-1B एक गैर-आप्रवासी वर्क वीजा है जो अस्थायी रूप से काम करने की छूट देता है, जबकि PERM स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) से जुड़ी प्रक्रिया है। इस आदेश का मतलब यह कतई नहीं है कि इन कंपनियों में कार्यरत पेशेवरों के H-1B वीजा रद्द हो गए हैं या उनकी नौकरियां समाप्त हो गई हैं।
TCS का दो टूक जवाब: लोकल हायरिंग पर फोकस, निलंबन का असर नगण्य अमेरिकी सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए टीसीएस ने कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के सभी दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करेगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में उसकी भर्ती नीति पूरी तरह से स्थानीय प्रतिभाओं को प्राथमिकता देने पर टिकी है, जिसे कॉलेज कैंपस रिक्रूटमेंट के एक मजबूत तंत्र के जरिए संचालित किया जाता है। टीसीएस के अमेरिका भर में 31 कार्यालय और अत्याधुनिक डिलीवरी सेंटर मौजूद हैं, जहां अधिकांश स्थानीय कार्यबल कार्यरत है।
कंपनी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान उसकी ओर से किए गए PERM आवेदनों की संख्या महज ‘एक अंक’ (Single Digit) में रही है। चूंकि कंपनी विदेशी कामगारों के ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप पर अत्यधिक निर्भर नहीं है, इसलिए PERM निलंबन से उसके ग्राहकों को मिलने वाली सेवाओं या उसकी दीर्घकालिक योजनाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। कंपनी अगले 5 सालों में 15,000 और अमेरिकी नागरिकों को नौकरी देने के अपने वादे पर अडिग है।
किसे झेलनी पड़ सकती है परेशानी और किन पर नहीं होगा असर? इस प्रशासनिक रोक का सीधा असर मुख्य रूप से उन विदेशी कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनके ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया इन कंपनियों के जरिए PERM के शुरुआती या लंबित चरण में अटकी है। नए आवेदन स्वीकार न होने से ऐसे पेशेवरों को स्थायी निवास के लिए अतिरिक्त इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, प्रभाव का दायरा हर कर्मचारी की व्यक्तिगत स्थिति, उसके वर्तमान वीजा स्टेटस और ग्रीन कार्ड आवेदन के चरण पर निर्भर करेगा। जो पेशेवर पहले ही प्रक्रिया के अग्रिम चरणों में पहुंच चुके हैं या वैध H-1B वीजा पर सेवाएं दे रहे हैं, उनके नियमित रोजगार पर इस फैसले का कोई तात्कालिक खतरा नहीं है।
voice of india