
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए होने वाले चुनिंदा व्यापारी लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल फौरी राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने नई चार्ज व्यवस्था पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने केंद्र सरकार, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: CJI सूर्यकांत की पीठ का रुख
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। अदालत में दाखिल जनहित याचिका में केंद्र सरकार और एनपीसीआई द्वारा 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगाने के निर्णय की संवैधानिक और कानूनी वैधता को चुनौती दी गई है। पीठ ने दोनों पक्षों की शुरुआती दलीलें सुनने के बाद प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाए बिना सभी संबंधित पक्षों से उनका पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।
याचिकाकर्ता की आपत्तियां और मुख्य दलीलें
याचिका में आरोप लगाया गया है कि यूपीआई भुगतानों पर चार्ज लगाने का फैसला बिना पर्याप्त कानूनी ढांचे, पारदर्शिता और जन-परामर्श (Public Consultation) के लिया गया है:
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शून्य-शुल्क नीति में बदलाव: याचिका में केंद्र सरकार के जनवरी 2020 से लागू जीरो-चार्ज (Zero MDR) व्यवस्था को खत्म करने के कदम को मनमाना बताया गया है।
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डिजिटल इंडिया पर प्रभाव: दलील दी गई है कि इस तरह के शुल्क डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रसार और कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने की दिशा में रुकावट बन सकते हैं।
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पारदर्शिता का अभाव: याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह निर्णय नीतिगत स्पष्टता और नियामक समीक्षा के बिना अचानक थोपा गया है।
15 अक्टूबर से क्या बदलेगा? चार्ज का गणित और नियम
एनपीसीआई के सर्कुलर के अनुसार, 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए दिशा-निर्देशों में आम उपभोक्ताओं और छोटे खुदरा व्यापारियों के हितों की सुरक्षा का दावा किया गया है:
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आम जनता पर असर नहीं: व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P – Person to Person) होने वाले सामान्य लेन-देन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे। आम उपयोगकर्ताओं के बैंक खातों या डिजिटल वॉलेट से ट्रांसफर पर कोई चार्ज नहीं कटेगा।
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2,000 रुपये से अधिक पर 0.4% चार्ज: यह शुल्क केवल चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट्स पर लागू होगा, जहां 2,000 रुपये से ऊपर के लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर लगेगा।
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अधिकतम सीमा (कैपिंग): 75,000 रुपये या उससे अधिक के बड़े व्यापारी भुगतानों पर अधिकतम चार्ज 300 रुपये निर्धारित किया गया है।
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विशेष क्षेत्रों में फ्लैट चार्ज: रेलवे, टेलीकॉम, बीमा प्रीमियम, पेट्रोल-डीजल और कृषि इनपुट्स जैसे आवश्यक क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट चार्ज तय किया गया है।
छोटे दुकानदारों को पूरी छूट, 96% लेन-देन अप्रभावित रहने का दावा
सरकार और एनपीसीआई का कहना है कि इस नई व्यवस्था से बाजार का बड़ा वर्ग अप्रभावित रहेगा:
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1 लाख रुपये तक मासिक सीमा फ्री: यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से प्रतिमाह 1 लाख रुपये तक की कुल राशि प्राप्त करने वाले छोटे दुकानदारों और वेंडरों को किसी भी तरह का चार्ज नहीं देना होगा।
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व्यापक असर सीमित: आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से दावा किया गया है कि देश में होने वाले लगभग 96 फीसदी मर्चेंट ट्रांजेक्शन इस चार्ज के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम रोक न लगाए जाने के चलते 15 अक्टूबर से यह नई व्यवस्था लागू होने का रास्ता साफ है, जबकि चार सप्ताह बाद केंद्र और एनपीसीआई के जवाब पर अंतिम कानूनी स्थिति तय होगी।
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