Wednesday , 28 October 2026

Supreme Court on Acid Attacks: देश में एसिड हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिक्री पर रोक की गाइडलाइंस को बताया विफल; केंद्र से मांगी रिपोर्ट

देश भर में एसिड हमलों की लगातार सामने आ रही घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गंभीर चिंता व्यक्त की। सर्वोच्च अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि यह स्थिति स्पष्ट रूप से नीतिगत विफलता को उजागर करती है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देशित किया कि वह एसिड की खुली बिक्री पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करे। पीठ ने दो टूक टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल सहानुभूतिपूर्ण और भावुक भाषा में परिपत्र (सर्कुलर) जारी कर देने से समस्या का समाधान नहीं होने वाला है।

‘बाजारों में एसिड की आसान उपलब्धता पिछले आदेशों को कर रही विफल’

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी राज्य एसिड की बिक्री सीमित करने वाले दिशा-निर्देशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाजारों में एसिड का आसानी से उपलब्ध होना शीर्ष अदालत द्वारा पूर्व में जारी किए गए सभी आदेशों के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर रहा है। पीठ ने केंद्र सरकार को एसिड विनियमन पर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

दिशा-निर्देशों की विफलता पर जताई कड़ी नाराजगी

एसिड हमलों के पीड़ितों के समुचित पुनर्वास और एसिड की बिक्री को पूरी तरह नियंत्रित करने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र की ढिलाई पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि अवैध बिक्री रोकने के लिए बनाए गए नियम और दिशा-निर्देश पूरी तरह निष्प्रभावी साबित हुए हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सवाल करते हुए पीठ ने कहा, “बाजारों में एसिड का इतनी आसानी से मिलना हमारे पिछले आदेशों की मंशा को विफल कर रहा है। इस दिशा में अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं? अदालत में अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाए।” कोर्ट ने याद दिलाया कि वर्ष 2013 और 2015 में स्पष्ट आदेश दिए गए थे कि एसिड की खरीद पर फोटो पहचान पत्र और पते का प्रमाण लेना अनिवार्य होगा, खरीदार को कारण बताना होगा और नाबालिगों को इसकी बिक्री पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। इसके बावजूद एसिड अभी भी दुकानों पर खुलेआम मिल रहा है।

केंद्र का पक्ष: राज्यों को भेजे गए मॉडल नियम, सख्त प्रावधानों पर विचार जारी

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को अवगत कराया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को कई बार परामर्श और ‘मॉडल नियम’ भेजे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनके क्रियान्वयन का दायित्व राज्य सरकारों का है। उन्होंने शीर्ष अदालत को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार भविष्य में सख्त दंडात्मक प्रावधानों के साथ नए और प्रभावी दिशा-निर्देश लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

चार हफ्ते में विस्तृत हलफनामा तलब, 3 दिसंबर को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने इस हलफनामे में राज्यवार आंकड़े शामिल करने को कहा है, जिनमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • राज्यों में अधिकृत व लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं की कुल संख्या।

  • अवैध बिक्री पकड़ने के लिए दुकानों पर किए गए औचक निरीक्षणों का ब्योरा।

  • गैरकानूनी ढंग से एसिड बेचने वालों के खिलाफ दर्ज की गई कुल एफआईआर (FIR)।

  • ऑनलाइन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अवैध बिक्री को लेकर की गई दंडात्मक कार्रवाई।

  • पीड़ितों को वितरित किया गया मुआवजा, CrPC की धारा 357C के तहत मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं और उनके शिक्षा व रोजगार के लिए किए गए प्रयास।

याचिकाकर्ताओं ने बयां किया दर्द: आदेशों के बावजूद नहीं मिल रहा मुफ्त इलाज

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद जमीनी हकीकत भयावह है। पीड़ितों को मुआवजा मिलने में अत्यधिक देरी होती है और कई अस्पतालों में उन्हें निशुल्क उपचार देने से भी मना कर दिया जाता है। इस पर अदालत ने दोहराया कि संविधान के तहत सम्मान के साथ जीने के अधिकार में पीड़ितों का समयबद्ध और उचित पुनर्वास अनिवार्य रूप से शामिल है। मामले की अगली सुनवाई अब 3 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

 

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