
ईटानगर/नई दिल्ली: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमा निर्धारण को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग धारणाओं के कारण अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के टक्सिंग सर्कल स्थित असफिला और लोंगजू सेक्टर संवेदनशील बने हुए हैं। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, संवेदनशील भौगोलिक स्थिति के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह नियंत्रण में और स्थिर हैं। दोनों देशों के गश्ती दलों के बीच नियमित गश्त के दौरान आमना-सामना (फेस-ऑफ) होना आम बात है, लेकिन भारतीय सेना के ग्राउंड कमांडरों के सख्त ऑपरेशनल कंट्रोल और संयम के चलते किसी भी तरह की हिंसक झड़प की सूचना नहीं है।
मिलिट्री मैकेनिज्म और पहली बार पूर्वोत्तर में कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता
सीमा पर पैदा होने वाले गतिरोधों को सुलझाने के लिए दोनों सेनाएं फ्लैग मीटिंग और हॉटलाइन संपर्क जैसे स्थापित सैन्य तंत्रों का सक्रिय उपयोग कर रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर उपजे तनाव को तुरंत शांत किया जा सके। सीमा प्रबंधन को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पूर्वोत्तर क्षेत्र में पहली बार ऐतिहासिक कॉर्प्स कमांडर स्तर की उच्चस्तरीय वार्ता भी सफलतापूर्वक आयोजित की गई है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे गतिरोध फौरी तौर पर ऑपरेशनल चुनौतियां पेश करते हैं, लेकिन यह दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर अधिक गंभीरता से जुड़ने के लिए प्रेरित भी करते हैं, जिससे सीमा पर दीर्घकालिक सहमति का मार्ग प्रशस्त होता है।
ITBP डीजी का बड़ा बयान: LAC से छह किमी दूर चीनी सेना के तंबू
इस बीच, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश के कई सेक्टरों में जुलाई माह से चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ लगातार आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। राजस्थान के अलवर में एक कार्यक्रम के दौरान डीजी ने बताया कि असफिला जैसे संवेदनशील इलाकों में चीनी सैनिकों ने भारत की वास्तविक नियंत्रण रेखा की समझ से महज छह से सात किलोमीटर की दूरी पर अपने तंबू गाड़ रखे हैं, जिस पर भारतीय सुरक्षा बल पूरी मुस्तैदी से नजर बनाए हुए हैं।
बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर से बदला परिदृश्य, ऑल-वेदर सड़कों का जाल
विवादित माने जाने वाले इन अग्रिम इलाकों में भारतीय सुरक्षा बलों की लगातार तैनाती ने सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी नई दिशा दी है। उपेक्षित रहे इन सीमांत क्षेत्रों में ऑल-वेदर सड़कें, सामरिक पुल, उन्नत टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क और आवश्यक नागरिक सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से भविष्य में नियंत्रित सीमा व्यापार, स्थानीय आर्थिक आत्मनिर्भरता और पर्यटन के नए अवसर खुल रहे हैं।
सांस्कृतिक धरोहर और सीमावर्ती जनजातियों का सशक्तिकरण
यह सीमावर्ती भूभाग सांस्कृतिक एवं धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां बौद्ध धर्म के कई पवित्र स्थल स्थित हैं, जिनमें प्रसिद्ध ‘त्सारी तीर्थ यात्रा सर्किट’ शामिल है, जिसकी मान्यता सीमा के दोनों ओर बसे समुदायों में समान रूप से है। सीमा पर स्थायी शांति स्थापित होने से भविष्य में इस सीमा-पार तीर्थ यात्रा के दोबारा सुचारु होने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके अलावा, सीमावर्ती इलाकों में तैनात सेना और आईटीबीपी की यूनिटें स्थानीय जनजातीय समुदायों के लिए नियमित स्वास्थ्य शिविर, आपातकालीन मेडिकल इवैक्यूएशन, स्कूल निर्माण और स्थानीय रोजगार के साधन उपलब्ध कराकर उन्हें राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
voice of india