Thursday , 22 October 2026

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि में राशि अनुसार लगाएं मां दुर्गा को प्रिय भोग और करें इन सिद्ध मंत्रों का जाप, बरसेगी असीम कृपा

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ ही शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आरंभ होने जा रहा है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर, रविवार से हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन अनुष्ठान में मां भगवती के नौ दिव्य स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार, यदि भक्त नवरात्रि के पावन दिनों में अपनी राशि के अनुकूल नैवेद्य (भोग) अर्पित करें और अभीष्ट मंत्रों का निष्ठापूर्वक जप करें, तो जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। प्रत्येक राशि के स्वामी ग्रह और प्रकृति के अनुरूप देवी को प्रिय भोग समर्पित करने से मां दुर्गा प्रसन्न होकर साधक के घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वरदान देती हैं।

मेष से सिंह राशि: किस नैवेद्य और मंत्र से प्रसन्न होंगी मां भगवती

नवरात्रि के दौरान मेष से सिंह राशि तक के जातकों के लिए विशेष पूजन विधि और मंत्र साधना फलदायी मानी गई है। मेष राशि के जातकों को मां दुर्गा को लाल पुष्प (गुड़हल या गुलाब) अर्पित करने के साथ बेसन के लड्डू अथवा हलवे का भोग लगाना चाहिए। पूजा के दौरान “ॐ ऐं क्रीं क्लीं महादुर्गादेव्यै नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। वृषभ राशि के जातकों को मां अंबे को सफेद मिष्ठान, रसगुल्ला, मिश्री-माखन और सुगंधित इत्र अर्पित करना चाहिए तथा “ॐ श्रीं क्लीं महालक्ष्मी नमः” का नियमित पाठ करना चाहिए। मिथुन राशि के जातक हरी इलायची, केतकी के पुष्प या ताजे केले का भोग समर्पित करें और “ॐ गं गणपतये नमः” के साथ “ॐ ऐं नमः” मंत्र का जप करें। कर्क राशि के साधक दूध व चावल की खीर, मखाना तथा श्वेत पुष्प देवी के चरणों में अर्पित करें और “ॐ दुं दुर्गायै नमः” का जप करें। सिंह राशि के जातकों को केसर युक्त खीर, अनार और गुड़ का भोग चढ़ाना चाहिए तथा “ॐ ह्रीं श्रीं दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जप करना कल्याणकारी रहता है।

कन्या से मीन राशि: इन उपायों और मंत्रों से चमकेगा भाग्य

कन्या से लेकर मीन राशि के जातकों के लिए शास्त्रों में अचूक भोग और मंत्र बताए गए हैं। कन्या राशि के जातक हरी सब्जियां, ताजे मौसमी फल, इलायची और मालपुआ मां को अर्पित करें तथा “ॐ ऐं श्रीं क्लीं कमलवासिन्यै नमः” मंत्र का जप करें। तुला राशि के लोगों को पंचामृत, सफेद मिठाई और मालती के सुगंधित पुष्प चढ़ाने चाहिए और “ॐ महालक्ष्मी नमः” मंत्र का ध्यान करना चाहिए। वृश्चिक राशि के जातक लाल रंग की मिठाई, गुड़ या अनार का नैवेद्य चढ़ाएं और “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” मंत्र का जप करें। धनु राशि वालों के लिए पीली मिठाई, बेसन के व्यंजन, केसरिया भात और पीले पुष्प अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है, साथ ही “ॐ ऐं क्लीं सौंः दुर्गायै नमः” का उच्चारण करें। मकर राशि के जातक नारियल, उड़द की दाल का हलवा या तिल की वस्तुएं अर्पित करें और सिद्ध मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का जप करें। कुंभ राशि के साधक हलवा-पूरी, नीले पुष्प या तिल के मिष्ठान का भोग लगाएं और “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं नमः” का ध्यान करें। मीन राशि के जातकों को पके केले, चने की दाल-गुड़ अथवा केसरयुक्त दूध अर्पित करते हुए “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं दुर्गादेव्यै नमः” मंत्र का निष्ठा से पाठ करना चाहिए।

राशि अनुसार पूजन का महत्व और ध्यान रखने योग्य जरूरी सावधानियां

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से नवरात्रि में राशि अनुसार पूजन करने से साधक की जन्मकुंडली में मौजूद अशुभ व प्रतिकूल ग्रहों का दुष्प्रभाव शांत होता है और देवी की विशेष कृपा से भौतिक व आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं। सही नैवेद्य और मंत्रों के सटीक स्पंदन से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है। हालांकि इस साधना काल में नियमों और संयम का पालन करना बेहद अनिवार्य है। मंत्रों का उच्चारण सदैव शुद्ध और शांत चित्त से करें तथा भोग सामग्री पूर्णतः सात्विक एवं स्वच्छ होनी चाहिए। पूजन की अवधि में तामसिक आहार, नकारात्मक विचारों और कलह से पूरी तरह दूर रहें। शुद्ध मन, निष्ठा और श्रद्धा से किया गया नियमबद्ध अनुष्ठान ही साधक को सर्वतोमुखी सफलता दिलाता है।

नोट: इस आलेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है।

 

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