
सऊदी अरब की राजधानी रियाद और अल-खर्ज में शनिवार तड़के सिलसिलेवार धमाकों की भीषण आवाजों से हड़कंप मच गया। आसमान में तेज गूंज के साथ ही स्थानीय निवासियों के मोबाइल पर हवाई सुरक्षा और आपातकालीन अलर्ट बजने लगे। हालांकि, कुछ ही देर बाद सऊदी नागरिक सुरक्षा निदेशालय ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि हवाई रक्षा प्रणाली द्वारा संभावित खतरों को निष्क्रिय कर दिया गया है और अब खतरा पूरी तरह टल चुका है। प्रशासन ने आम नागरिकों से सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने, घटनास्थल पर भीड़ न लगाने और घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न करने की सख्त हिदायत दी है।
हूतियों का दावा: 24 घंटे में सऊदी अरब ने किए 26 बड़े हमले
दूसरी ओर यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब की सेना ने पिछले 24 घंटों के भीतर उनके नियंत्रण वाले यमनी ठिकानों पर 26 भीषण हवाई हमले किए हैं। हूती संगठन के अनुसार, बीते एक सप्ताह में उनके सैन्य और सामरिक ठिकानों पर सऊदी गठबंधन द्वारा किए गए हमलों की कुल संख्या 300 के पार पहुंच चुकी है। यमन की रियाद समर्थित सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच यह संघर्ष अब एक बार फिर पूर्णकालिक गृहयुद्ध का रूप लेता नजर आ रहा है, जिससे समूचे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात बेहद नाजुक हो गए हैं।
ताइफ में ड्रोन मलबे से मौत, मक्का की ओर बढ़ता ड्रोन भी मार गिराया
इससे पहले सऊदी अरब के अल-खर्ज गवर्नरेट में राष्ट्रीय प्रारंभिक चेतावनी मंच ने नागरिकों को संभावित मिसाइल व ड्रोन हमले की चेतावनी दी थी। पश्चिमी सऊदी अरब के ताइफ शहर में हूतियों द्वारा दागे गए एक आत्मघाती ड्रोन को सऊदी एयर डिफेंस ने बीच हवा में ही नष्ट कर दिया था, लेकिन उसके मलबे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अतिरिक्त, सऊदी सेना ने मक्का की दिशा में तेजी से बढ़ रहे एक अज्ञात ड्रोन को भी मार गिराने का दावा किया है, हालांकि हूती नेतृत्व ने मक्का को निशाना बनाने के आरोपों का खंडन किया है।
अरामको की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ठप, यूरोप की तेल सप्लाई रोकी
इस खूनी सैन्य टकराव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और सऊदी अरब की लाइफलाइन मानी जाने वाली ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर पड़ा है। हूतियों द्वारा किए गए घातक ड्रोन हमलों में पाइपलाइन के तीन पंपिंग स्टेशन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिसके चलते परिचालन को तत्काल प्रभाव से रोकना पड़ा। पाइपलाइन ठप होने से लाल सागर के तट पर स्थित प्रमुख यानबू बंदरगाह से कच्चे तेल की लोडिंग प्रक्रिया बाधित हो गई है। नतीजतन, सऊदी सरकारी तेल कंपनी अरामको ने अपने कम से कम दो बड़े यूरोपीय रिफाइनिंग खरीदारों को आधिकारिक तौर पर सूचित कर दिया है कि उन्हें अक्तूबर महीने में अनुबंधित कच्चे तेल की खेप नहीं मिल सकेगी।
अमेरिका का बड़ा फैसला: सऊदी अरब को मिलेंगे 48 F-35 लड़ाकू विमान
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य खतरे और बुनियादी तेल ढांचों पर हमलों के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब के पक्ष में बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब को 48 अत्याधुनिक 5वीं पीढ़ी के एफ-35 (F-35) स्टेल्थ लड़ाकू विमान बेचने के लिए 24.3 अरब डॉलर (करीब दो लाख करोड़ रुपये) की संभावित विदेशी सैन्य बिक्री (FMS) को औपचारिक मंजूरी दे दी है। रियाद लंबे समय से हूती विद्रोहियों और क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत अमेरिकी हथियारों की मांग कर रहा था, जिस पर अब वॉशिंगटन ने अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।
2014 से सुलग रही यमन की जंग का खौफनाक इतिहास
यमन संकट की शुरुआत साल 2014 में हुई थी, जब हूती विद्रोहियों ने तख्तापलट करते हुए राजधानी सना पर कब्जा जमा लिया था। इसके जवाब में साल 2015 से सऊदी अरब के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन ने यमन सरकार की बहाली के लिए सीधा दखल दिया। साल 2022 में हुए संघर्ष विराम के बाद से दोनों पक्षों के बीच जंग काफी हद तक थमी हुई थी, लेकिन जुलाई से यह खूनी टकराव फिर से भड़क उठा। वर्षों से जारी इस युद्ध ने यमन को दुनिया के सबसे भयावह मानवीय संकट में झोंक दिया है, जहां लाखों लोग भुखमरी और विस्थापन का दंश झेल रहे हैं।
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