
लंदन/वाशिंगटन ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन स्थित रॉयल एयर फोर्स (RAF) के फेयरफोर्ड एयरबेस से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संभावित अभियानों के लिए तैनात अपने सभी सामरिक बॉम्बर्स (रणनीतिक बमवर्षक विमानों) को फेयरफोर्ड से वापस बुला लिया है। यह फैसला एयरबेस पर कथित आतंकी हमले की साजिश का खुलासा होने और सुरक्षा जांच तेज होने के बाद लिया गया है। पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि फेयरफोर्ड पर तैनात सभी अमेरिकी बॉम्बर्स को अमेरिका स्थित उनके मूल ठिकानों (होम बेस) पर सुरक्षित भेज दिया गया है।
B-52 और B-1 बॉम्बर्स ने भरी वतन वापसी की उड़ान RAF फेयरफोर्ड रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां से अमेरिकी B-52 और B-1 बॉम्बर्स लगातार ऑपरेशन संचालित कर रहे थे। एविएशन गतिविधियों पर बारीक नजर रखने वाले स्वतंत्र समूह ‘मिलिट्री एयर ट्रैकिंग अलायंस’ ने भी इन भारी लड़ाकू विमानों की आवाजाही को ट्रैक किया। ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, रविवार को कई B-1 लांसर्स और अन्य बॉम्बर्स को एयरबेस से अमेरिका की ओर उड़ान भरते हुए दर्ज किया गया। लंदन से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में स्थित यह एयरबेस दशकों से मध्य पूर्व में अमेरिकी सामरिक अभियानों का प्रमुख यूरोपीय केंद्र रहा है।
ब्रिटिश-ईरानी नागरिक की गिरफ्तारी और साजिश का खुलासा इस सैन्य वापसी के पीछे सितंबर के अंत में सामने आई एक गंभीर सुरक्षा चूक और आतंकी साजिश को मुख्य वजह माना जा रहा है। पिछले सप्ताह सेंट्रल लंदन में एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक को फेयरफोर्ड एयरबेस पर हमले की साजिश रचने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान कुल छह संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिन्हें बाद में कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत पर छोड़ दिया गया। ब्रिटिश खुफिया एवं सुरक्षा एजेंसियों ने इस साजिश के तार ईरान से जुड़े होने का अंदेशा जताया है। हालांकि, तेहरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उल्लेखनीय है कि ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि उसकी धरती पर हमले के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी विदेशी ठिकाने को वह ‘वैध सैन्य निशाना’ मानेगा।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख: ‘फैसले खुद करूंगा’ बॉम्बर्स की वापसी ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ नए और आक्रामक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। शनिवार को ट्रंप ने तेहरान को सख्त संदेश देते हुए कहा था कि ईरान संघर्ष से बुरी तरह प्रभावित हो चुका है और अब आगे का रास्ता आसान या बेहद मुश्किल हो सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले दिनों में ईरान को लेकर रणनीतिक निर्णय पूरी तरह उनके व्यक्तिगत रुख और समीक्षा पर निर्भर करेंगे।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा: तीन एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात करने की तैयारी ब्रिटेन के एयरबेस से बॉम्बर्स हटाने के बावजूद अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सामरिक मौजूदगी को कमजोर नहीं होने दिया है। पेंटागन के अनुसार, नौसेना का महाविशालकाय विमानवाहक पोत ‘USS Theodore Roosevelt’ और ‘USS Makin Island’ एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप तेजी से इस क्षेत्र की ओर अग्रसर हैं। इन जहाजी बेड़ों पर 7,000 से अधिक नाविक और करीब 2,000 अमेरिकी मरीन कमांडो तैनात हैं। रक्षा अधिकारियों का अनुमान है कि नई तैनाती पूरी होने के बाद अक्टूबर के अंत तक अकेले मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिका के तीन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मौजूद रहेंगे, जिससे किसी भी आकस्मिक टकराव की स्थिति में त्वरित और भारी सैन्य कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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