Sunday , 27 September 2026

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गरमाई सियासत: कांग्रेस ने फॉर्म-6 में बदलाव को बताया अवैध, सुप्रीम कोर्ट से की CEC की जवाबदेही तय करने की मांग

नई दिल्ली।  निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज और मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर सियासी गलियारों में टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए शनिवार को शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने की अपील की है। मुख्य विपक्षी दल ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट को पूरे मामले का तुरंत स्वतः संज्ञान लेना चाहिए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही तय करनी चाहिए।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट साझा करते हुए आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग द्वारा नियमों को ताक पर रखकर फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ रहा है।

फॉर्म-6 में बदलाव पूरी तरह अवैध, केंद्र सरकार के पास है अधिकार

जयराम रमेश का आरोप है कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किया गया बदलाव पूरी तरह से गैर-कानूनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के पास इस फॉर्म में अपनी मर्जी से या एकतरफा बदलाव करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।

नियमों का हवाला देते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा कि ‘पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960’ के तहत फॉर्म में किसी भी तरह के संशोधन की शक्ति केवल केंद्र सरकार में निहित है। इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत नियमों में संशोधन करना अनिवार्य होता है और पूरे मामले की औपचारिक सूचना संसद को दी जानी चाहिए, जिसे इस मामले में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

नए नियम से पहली बार वोट देने वाले युवाओं के सामने बड़ा संकट

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जुलाई, 2026 की शुरुआत में ही बिना किसी आधिकारिक सार्वजनिक अधिसूचना के ऑनलाइन फॉर्म-6 में चुपचाप संशोधन कर दिया गया। इस संशोधन के जरिए फॉर्म में एक नया और अनिवार्य कॉलम जोड़ दिया गया, जिसमें नए आवेदकों से पूछा गया है कि क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी पिछली एसआईआर (SIR) सूची में शामिल थे या नहीं।

रमेश के अनुसार, आयोग एक तरफ अधिकारियों को युवा वोटरों के लिए विशेष नामांकन शिविर लगाने और सोशल मीडिया पर व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दे रहा है, वहीं दूसरी ओर ऐसे जटिल और अनिवार्य नियम जोड़कर पहली बार मतदाता बनने जा रहे युवाओं की राह में रोड़े अटकाए जा रहे हैं। यह कदम युवाओं को वोटर आईडी कार्ड बनवाने से हतोत्साहित करने वाला है।

चुनाव आयुक्तों के विरोध का दावा, सीईसी पर संवैधानिक उल्लंघन के आरोप

मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए जयराम रमेश ने एक और सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के दोनों साथी चुनाव आयुक्तों ने भी इस संशोधन को “अवैध और अनधिकृत” करार दिया था। दोनों आयुक्तों ने युवाओं और पहली बार वोट करने जा रहे नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस विवादित बदलाव को तुरंत वापस लेने की पुरजोर मांग की थी, ताकि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने में किसी तरह की बाधा न आए।

कांग्रेस महासचिव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और स्थापित संवैधानिक परंपराओं का खुला उल्लंघन हुआ है। उन्होंने दोहराया कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करे और आवश्यक जवाबदेही सुनिश्चित करे।

 

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