Thursday , 24 September 2026

एसआईआर पर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद के दावों से गरमाई सियासत : जानिए किन राज्यों में कितने कटे नाम और क्या है पूरा विवाद

देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष जहां इस पूरी कवायद की समयसीमा, नोटिस भेजने के तौर-तरीकों और वैध मतदाताओं के नाम कटने का आरोप लगाकर मोर्चा खोले हुए था, वहीं अब आयोग के आंतरिक कामकाज को लेकर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट ने इस विवाद को और हवा दे दी है।

दावा किया गया है कि बीते 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने आयोग की कार्यप्रणाली, फॉर्म-6 में बदलाव और आईटी डेटाबेस नियंत्रण जैसे मुद्दों पर 14 बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। हालांकि, आयोग ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और सुझाव या आपत्तियां आंतरिक विमर्श का सामान्य हिस्सा थीं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह समझना आवश्यक है कि एसआईआर का दायरा देश में कहां तक पहुंचा है और ड्राफ्ट रोल में किन राज्यों में कितने मतदाताओं के नाम बाहर हुए हैं।

किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रक्रिया पूरी या जारी?

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को आयोग द्वारा चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है:

  • पहला चरण: बिहार में जून से सितंबर 2025 के बीच एसआईआर की प्रक्रिया पूरी की गई।

  • दूसरा चरण: अक्तूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में पुनरीक्षण का काम पूरा हुआ। इनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल और गोवा शामिल हैं। इसके अलावा पुदुचेरी, अंडमान व निकोबार और लक्षद्वीप में भी यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

  • तीसरा चरण: मई 2026 में शुरू हुए तीसरे चरण में 16 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश शामिल किए गए। इनमें मिजोरम, मणिपुर, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और चंडीगढ़ में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

  • जहां ड्राफ्ट सूची जारी हुई और प्रक्रिया जारी है: महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, नागालैंड, मेघालय, कर्नाटक, झारखंड, त्रिपुरा, दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव में ड्राफ्ट रोल प्रकाशित कर दावों व आपत्तियों का निस्तारण किया जा रहा है।

ड्राफ्ट रोल में किन राज्यों में कटे सबसे ज्यादा नाम?

तीसरे चरण के तहत जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट सूची प्रकाशित हुई है, वहां भारी संख्या में नाम हटाए जाने (ASDDO—अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृतक और डुप्लिकेट श्रेणी) के आंकड़े सामने आए हैं:

  • दिल्ली (NCT): कुल वोटर 1.45 करोड़ से घटकर 97.50 लाख रह गए। यहां 47.60 लाख नाम कटे, जो कि 32.8% की सबसे बड़ी गिरावट है।

  • दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव: मतदाताओं की संख्या 4.28 लाख से घटकर 3.01 लाख हुई, यानी 1.27 लाख (29.7%) नाम कटे।

  • तेलंगाना: 3.38 करोड़ में से 73.40 लाख नाम हटे और ड्राफ्ट सूची में 2.65 करोड़ वोटर बचे, जो 21.7% की कमी है।

  • महाराष्ट्र: एसआईआर से पहले 9.79 करोड़ मतदाता थे, जो ड्राफ्ट में घटकर 7.72 करोड़ रह गए। यहां 2.06 करोड़ (21.1%) नाम कटे।

  • कर्नाटक: 5.54 करोड़ मतदाताओं में से 1.08 करोड़ (19.5%) नाम कटकर संख्या 4.46 करोड़ पर आ गई।

  • झारखंड: 2.65 करोड़ से 43.60 लाख (16.5%) नाम हटे और संख्या 2.21 करोड़ रह गई।

  • हरियाणा: 2.06 करोड़ से घटकर 1.72 करोड़ हुई, जहां 34 लाख (16.4%) नाम कटे।

  • नगालैंड: 13.60 लाख से 1.60 लाख (11.7%) नाम कटने के बाद 12.00 लाख वोटर बचे।

  • आंध्र प्रदेश: 4.16 करोड़ में से 44.90 लाख (10.8%) नाम कटे, ड्राफ्ट में संख्या 3.71 करोड़ है।

  • उत्तराखंड: 79.60 लाख से 8.30 लाख (10.4%) नाम हटे और संख्या 71.30 लाख रही।

  • पंजाब: 2.15 करोड़ से 20.70 लाख (9.6%) नाम कटे और ड्राफ्ट में 1.94 करोड़ वोटर दर्ज हुए।

  • मेघालय: 23.50 लाख में से 1.80 लाख (7.7%) नाम हटे, ड्राफ्ट में 21.70 लाख मतदाता हैं।

(नोट: ये आंकड़े ड्राफ्ट सूची के हैं। फॉर्म-6 के जरिए पात्र मतदाताओं को जोड़ने और सुनवाई पूरी होने के बाद अंतिम सूची में आंकड़ों में बदलाव संभव है।)

एसआईआर पर क्यों मचा है सियासी और कानूनी बवाल?

एसआईआर को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों (कांग्रेस, सपा, आप, टीएमसी, माकपा आदि) का आरोप है कि जिन राज्यों में हाल के वर्षों में चुनाव हुए, वहां भारी संख्या में नाम हटाए गए। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में दस्तावेजों की कमी के आधार पर नाम हटाने को लेकर एनआरसी जैसी आशंकाएं जताई गईं।

राज्यवार भी तीखी आपत्तियां दर्ज कराई गईं:

  • पश्चिम बंगाल: हटाए गए नामों की अपीलों पर 24 ट्रिब्यूनल में सुनवाई चल रही है। टीएमसी और कांग्रेस ने आंकड़े सार्वजनिक न करने को लेकर अदालत का रुख किया।

  • महाराष्ट्र: 2.06 करोड़ मतदाताओं को अलग-अलग श्रेणियों में डालने पर कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग की और त्योहारों के दौरान सत्यापन कराने पर सवाल खड़े किए।

  • दिल्ली: 47 लाख से अधिक नाम कटने और लाखों लोगों को अस्पष्ट नोटिस मिलने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई।

  • उत्तर प्रदेश: ड्राफ्ट में 2.89 करोड़ नाम कटने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने चिंता जताई थी, जिसके बाद अंतिम सूची में कई नाम जोड़े गए।

  • कर्नाटक, तेलंगाना व हरियाणा: बेंगलुरु के महादेपुरा में विसंगतियों, तेलंगाना में 2002 की सूची से मैपिंग न होने पर 92 लाख नोटिस थमाने और हरियाणा में 19 लाख से अधिक नोटिसों पर विवाद हुआ।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

सर्वोच्च न्यायालय ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने के चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकार को रेखांकित करते हुए एसआईआर प्रक्रिया की वैधता को बरकरार रखा है। हालांकि, अदालत ने नोटिसों की स्पष्टता और सुनवाई में हो रही देरी को लेकर लगातार निर्देश दिए हैं। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने बंगाल में ट्रिब्यूनल की संख्या 24 से बढ़ाकर 42 करने और न्यायिक अधिकारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने जैसी पहल की है, ताकि दावों व आपत्तियों का त्वरित निपटारा हो सके।

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