Friday , 23 October 2026

Pakistan Oil Crisis: पश्चिम एशिया तनाव से पाकिस्तान में हाहाकार! तेल बचाने के लिए ‘पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन’ की तैयारी, हफ्ते में सिर्फ 4 दिन खुलेंगे दफ्तर

इस्लामाबाद पश्चिम एशिया में लगातार भड़कती जंग की आग ने अब पाकिस्तान की आर्थिक कमर पूरी तरह तोड़ दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थ बनने का ख्वाब देख रहे पाकिस्तान के हाथ केवल निराशा लगी है, जबकि अमेरिका-ईरान तनाव और सऊदी अरब तथा हूती विद्रोहियों के बीच छिड़े नए संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति को गहरे संकट में डाल दिया है। विदेशी मुद्रा भंडार की भारी किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने हालात बदतर कर दिए हैं। आलम यह है कि देश में ईंधन की खपत नियंत्रित करने के लिए शहबाज शरीफ सरकार अब देशव्यापी ‘पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन’ लागू करने की अभूतपूर्व योजना पर काम कर रही है।

हफ्ते में सिर्फ चार दिन खुलेंगे दफ्तर, तीन दिन की छुट्टी का प्लान सामने आ रही रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में ऊर्जा संकट के चलते सामान्य कामकाजी व्यवस्था ठप होने के कगार पर पहुंच गई है। प्रस्तावित पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन के तहत सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के लिए सप्ताह में केवल चार दिन काम करने की अनिवार्यता लागू की जा सकती है। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए शुक्रवार से रविवार तक तीन दिनों का साप्ताहिक अवकाश घोषित करने की योजना बनाई जा रही है। इसका सीधा उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की दैनिक खपत में भारी कटौती करना है।

वर्क फ्रॉम होम और रोटेशन पर काम करेंगे कर्मचारी योजना के मुताबिक, सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की शत-प्रतिशत मौजूदगी पर रोक लगेगी और उन्हें रोटेशन व्यवस्था के तहत बुलाया जाएगा। शेष कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके साथ ही बिजली और ईंधन बचाने के लिए वाणिज्यिक बाजारों, शॉपिंग मॉल्स और मैरिज हॉलों के संचालन समय को सीमित करते हुए उन्हें शाम को निर्धारित समय से पहले ही बंद करने का कड़ा फैसला लिया जा सकता है।

सरकारी तंत्र पर भी कैंची, 50% सरकारी गाड़ियों के संचालन पर रोक गंभीर आर्थिक तंगी के बीच शहबाज शरीफ सरकार ईंधन बचाने के लिए अपने ही तंत्र पर कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। सरकारी विभागों में लगभग 50 फीसदी वाहनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इसके अतिरिक्त अधिकारियों के गैर-जरूरी दौरों, यात्रा भत्तों और पेट्रोल भत्ते में भारी कटौती की जाएगी। नौबत यहां तक पहुंच गई है कि खर्चों को पाटने के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन में कटौती करने की मजबूरी सामने आ रही है। हालांकि, पूर्व में भी पाकिस्तान ऐसे प्रयोग कर चुका है, लेकिन बुनियादी सुधारों के अभाव में उसे कोई ठोस वित्तीय राहत नहीं मिल सकी थी।

विदेशी मुद्रा संकट और अंतरराष्ट्रीय निर्भरता पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार पहले ही ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर बना हुआ है, जिसके चलते सरकार के सामने बुनियादी आयातों का भुगतान करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। वैश्विक बाजार में ऊर्जा संकट गहराने से तेल की बढ़ी हुई कीमतें इस्लामाबाद के लिए दोहरी मार साबित हो रही हैं। ऐसे में सरकार के पास राहत पैकेज और आपातकालीन वित्तीय सहायता के लिए वाशिंगटन और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के समक्ष हाथ फैलाने के सिवा कोई व्यावहारिक विकल्प शेष नजर नहीं आ रहा है।

 

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