हफ्ते के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद सुस्त और निराशाजनक रही। पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्र में शानदार बढ़त दर्ज करने वाले घरेलू शेयर बाजारों में सोमवार सुबह खुलते ही चौतरफा बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। शुरुआती कारोबार में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा लुढ़क गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 अहम मनोवैज्ञानिक स्तर 23,000 के नीचे फिसल गया। इस दौरान बाजार में बढ़ते डर और अस्थिरता को दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स (India VIX) भी करीब 6 फीसदी तक उछल गया।
शुक्रवार की तेजी पर फिरा पानी, लाल निशान में खुले प्रमुख सूचकांक
बीते शुक्रवार को शेयर बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ था। निफ्टी 50 77.40 अंक (0.34%) चढ़कर 23,140.50 के स्तर पर, जबकि सेंसेक्स 315.20 अंक (0.43%) की मजबूती के साथ 73,895.74 पर बंद हुआ था। हालांकि, सप्ताहांत के बाद सोमवार सुबह बाजार खुलते ही रुख पूरी तरह पलट गया। सुबह 9:16 बजे सेंसेक्स 599.92 अंक (0.81%) टूटकर 73,295.82 पर आ गया, वहीं निफ्टी 172.75 अंक (0.75%) की कमजोरी के साथ 22,967.75 पर कारोबार करता दिखा। जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ा, बिकवाली तेज हो गई और सेंसेक्स में गिरावट का आंकड़ा 700 अंक को पार कर गया।
बाजार में गिरावट के पीछे ये 5 बड़े कारण
शेयर बाजार में आई इस तेज गिरावट के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण कारक एक साथ हावी रहे:
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भूराजनीतिक अनिश्चितता: वैश्विक स्तर पर जारी भूराजनीतिक तनाव से निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है।
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महंगा वैल्यूएशन: बाजार जानकारों के अनुसार, कई प्रमुख सेक्टरों के शेयरों का वैल्यूएशन ऐतिहासिक स्तरों से काफी ऊपर चल रहा है, जिससे करेक्शन का जोखिम बना हुआ था।
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विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली: विदेशी निवेशक लगातार उभरते बाजारों से पूंजी निकाल रहे हैं, जिसका सीधा असर भारतीय इक्विटी फ्लो पर पड़ा है।
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कच्चे तेल में तेजी का झटका: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें देश के आयात बिल और महंगाई दर पर दबाव बनाती हैं, जिससे कॉरपोरेट मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
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कंपनियों की धीमी आय वृद्धि: चालू तिमाही के दौरान कंपनियों के वित्तीय नतीजों और कमाई की रफ्तार उम्मीद से धीमी रहने की चिंता ने भी बिकवाली को बढ़ावा दिया।
इंडिया वीआईएक्स 6% उछला: क्या बढ़ेगा उतार-चढ़ाव?
मार्केट वोलैटिलिटी इंडेक्स यानी इंडिया वीआईएक्स (India VIX) में लगभग 6% की तेज उछाल दर्ज की गई। वीआईएक्स में बढ़ोतरी इस बात का प्रत्यक्ष संकेत है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता काफी बढ़ सकती है। हालांकि वीआईएक्स सीधे बाजार की दिशा तय नहीं करता, लेकिन यह निवेशकों के बीच अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को स्पष्ट करता है।
एशियाई और वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत
वैश्विक मोर्चे पर एशियाई और पश्चिमी बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जिससे घरेलू बाजार को कोई ठोस सहारा नहीं मिल सका:
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अमेरिका: एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.4% टूटा
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जापान: निक्केई 225 फ्यूचर्स 0.4% नीचे, टॉपिक्स 0.2% की हल्की बढ़त पर
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ऑस्ट्रेलिया: एसएंडपी एएसएक्स 0.5% ऊपर
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हांगकांग: हैंग सेंग में 0.7% की तेजी
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चीन: शंघाई कंपोजिट में 1.8% की तेज गिरावट
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यूरोप: यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स 0.4% की बढ़त पर
आगे कैसा रहेगा बाजार का मिजाज? निवेशकों के लिए अहम सलाह
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अल्पकालिक अवधि (शॉर्ट टर्म) में भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और यह एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। जब तक कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित नहीं होतीं और विदेशी पूंजी की निकासी नहीं रुकती, तब तक दबाव बरकरार रह सकता है। हालांकि, भारत की मजबूत घरेलू आर्थिक वृद्धि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का लगातार आ रहा निवेश और कंपनियों की वित्तीय सेहत गिरावट को थामने में मदद कर सकती है। आने वाले सत्रों में निवेशकों का पूरा ध्यान कच्चे तेल के भाव, वैश्विक घटनाक्रमों, विदेशी निवेशकों के रुख और आने वाले तिमाही नतीजों पर टिका रहेगा।
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