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रामलीला मैदान में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन: ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली से कांग्रेस ने फूंका चुनावी बिगुल, CEC के इस्तीफे की मांग; 21 दलों का जमावड़ा, आप-डीएमके ने बनाई दूरी

राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली के माध्यम से कांग्रेस ने विपक्षी राजनीति की धुरी पर दोबारा अपनी पकड़ मजबूत करने की पुरजोर कोशिश की। बाराखंभा रोड से रामलीला मैदान तक निकले विशाल मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और प्रमुख वामपंथी दलों के दिग्गजों की मौजूदगी ने इसे एक व्यापक और एकजुट विपक्षी मोर्चे का स्वरूप दे दिया। आयोजकों के मुताबिक, इस प्रदर्शन में कुल 21 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया, हालांकि आम आदमी पार्टी (आप) और तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके जैसे कई प्रमुख सहयोगियों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही।

मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनाव आयोग पर सीधा प्रहार

इस महारैली का मुख्य एजेंडा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), कथित वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा। कांग्रेस और सहयोगी दलों ने इसे केवल प्रशासनिक या चुनावी प्रक्रिया की खामी मानने से इनकार करते हुए सीधे संविधान, लोकतंत्र और नागरिकों के बुनियादी मताधिकार पर हमला करार दिया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बिना पारदर्शिता के किए जा रहे संशोधनों से लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है, जिससे निष्पक्ष चुनाव प्रणाली पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।

यूपी में बिना समझौते के भी साथ आए अखिलेश यादव

इस महारैली में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी को राजनीतिक विश्लेषक बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी खुद को सूबे का सबसे बड़ा विपक्षी दल मानती है और कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को लेकर फिलहाल कोई औपचारिक तस्वीर साफ नहीं है। इसके बावजूद राहुल गांधी और खरगे के साथ साझा मंच पर उतरकर अखिलेश ने यह साफ संदेश दिया कि मतदाता सूची में निष्पक्षता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा जैसे बड़े राष्ट्रीय सवालों पर वे संकीर्ण चुनावी मतभेदों से ऊपर उठकर खड़े हैं।

ममता का समर्थन, पर सीजेपी की तिकड़ी ने मंच से बनाई दूरी

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के साथ लगातार तनाव और खींचतान के बावजूद ममता बनर्जी का दिल्ली पहुंचकर मंच साझा करना चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर विपक्ष की साझा चिंता को दर्शाता है। वहीं कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने इस आंदोलन का नैतिक समर्थन किया, लेकिन उसके संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका मुख्य मंच से दूर रहे। ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद दिपके ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी आंदोलन की मांगों के साथ पूरी तरह खड़ी है, किंतु अपने स्वतंत्र और तटस्थ स्वरूप को बचाए रखने के लिए उसने राजनीतिक दलों के औपचारिक मंच पर जाने से परहेज किया। इसके उलट आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने न सिर्फ रैली में सक्रिय भागीदारी की, बल्कि अपने आक्रामक भाषण से कार्यकर्ताओं में नया जोश भी भरा।

आप की गैरमौजूदगी: सैद्धांतिक सहमति के बीच सियासी मजबूरी

रैली में आम आदमी पार्टी की गैर-मौजूदगी ने भी सियासी हलकों में खूब सुर्खियां बटोरीं। जानकारों का मानना है कि आप और कांग्रेस के बीच यह दूरी किसी वैचारिक मतभेद से ज्यादा चुनावी मजबूरी का नतीजा है। पंजाब में दोनों दल एक-दूसरे के मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव में दोनों के बीच सीधी टक्कर होनी तय है। ऐसे में दिल्ली के मंच पर कांग्रेस नेताओं के साथ हाथ मिलाना पंजाब में आप की राजनीतिक रणनीति को असहज कर सकता था। हालांकि, चुनाव आयोग और मतदाता सूची के मसले पर आप का सैद्धांतिक रुख विपक्षी दलों जैसा ही रहा है।

राजधानी में अभेद्य सुरक्षा घेरा, 10 हजार जवानों की तैनाती

विपक्षी महारैली के मद्देनजर दिल्ली-एनसीआर से लेकर मध्य दिल्ली तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दिल्ली पुलिस, सीएपीएफ, सीआरपीएफ और आरएएफ समेत करीब 10 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। अकेले रामलीला मैदान और उसके आसपास चार हजार से अधिक जवानों का कड़ा पहरा रहा। दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने भी मुस्तैदी दिखाई। रामलीला मैदान को 14 सुरक्षा जोन में विभाजित कर 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन्स और एआई-आधारित फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी गई, जबकि संवेदनशील इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू रही।

 

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