Wednesday , 30 September 2026

‘मेरा मकसद पार्टी नहीं, देश बचाना है’: अरविंद केजरीवाल बोले- ‘सबको मेरा सीएम बनना याद है, लेकिन झुग्गियों में बिताए 10 साल कोई नहीं जानता’

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी राजनीतिक यात्रा, व्यवस्था परिवर्तन के संघर्ष और केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक निजी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में शिरकत करते हुए केजरीवाल ने साफ किया कि उनका लक्ष्य पार्टी का विस्तार या खुद का राजनीतिक भविष्य नहीं, बल्कि देश को आगे ले जाना है। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर उनके सीधे मुख्यमंत्री बनने की बात करते हैं, लेकिन उस पद तक पहुंचने से पहले उन्होंने अपना सरकारी करियर छोड़कर 10 साल तक झुग्गियों में रहकर जो पसीना बहाया, उसे कोई याद नहीं रखता।

‘जॉइंट कमिश्नर की कुर्सी छोड़ 10 साल झुग्गियों में रहा’

अरविंद केजरीवाल ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी अपने निजी करियर या भविष्य के नफे-नुकसान की चिंता नहीं की। वे आयकर विभाग (Income Tax) में जॉइंट कमिश्नर का प्रतिष्ठित पद छोड़कर सीधे झुग्गी-बस्तियों में लोगों के बीच काम करने चले गए थे। वहां एक दशक तक आम जनता के बुनियादी हकों की लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि लोग अन्ना आंदोलन और उसके बाद दो-तीन बार मुख्यमंत्री बनने की बात तो जानते हैं, लेकिन उस 10 साल की जमीनी तपस्या से अनजान हैं। अगर उस समय तत्कालीन सरकार मजबूत लोकपाल बिल बना देती, तो उन्हें कभी राजनीतिक पार्टी बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। देश को भ्रष्टाचार के दलदल से बाहर निकालने के लिए ही उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना।

‘ठेकों की बंदरबांट रोकी, ऑनलाइन नीलामी से बढ़ाया सरकारी राजस्व’

दिल्ली में अपने प्रशासनिक सुधारों का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले राजधानी में सरकारी और निजी स्तर पर ठेकों में भारी भ्रष्टाचार होता था। अफसरों द्वारा मनमर्जी से रेट तय किए जाते थे और बिना नीलामी के 10-15 प्रतिशत तदर्थ (Ad-hoc) फीस बढ़ाकर पसंदीदा लोगों को ठेके बांट दिए जाते थे। उनकी सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदलकर ऑनलाइन पारदर्शी ऑक्शन सिस्टम लागू किया। इसका परिणाम यह हुआ कि बोली लगाने की खुली प्रतिस्पर्धा से सरकारी खजाने को दोगुना और तीन गुना अधिक राजस्व मिलने लगा।

‘जेल से सरकार चलाने का फैसला विपक्षी सरकारों को बचाने का काउंटर दांव था’

जेल से सरकार चलाने के अपने चर्चित फैसले पर पहली बार खुलकर बोलते हुए आप सुप्रीमो ने कहा कि केंद्र की सत्ता में बैठे लोग राज्यों में चुनाव न जीत पाने पर फर्जी मुकदमों का सहारा लेते हैं। उनका मॉडल यही बन चुका है कि विपक्षी मुख्यमंत्रियों को गिरफ्तार करो और सरकार गिरा दो। उन्होंने कहा कि यही पैंतरा हेमंत सोरेन, ममता बनर्जी, पिनराई विजयन और अन्य गैर-भाजपा सरकारों के खिलाफ आजमाया गया। केजरीवाल ने कहा कि वह इस खतरनाक ट्रेंड को काउंटर करना चाहते थे, ताकि यह संदेश जाए कि सिर्फ फर्जी मामलों में गिरफ्तार करके किसी चुनी हुई सरकार को गिराया नहीं जा सकता। इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा न देकर जेल से सरकार चलाने का संकल्प लिया था, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट की पीठ से भी सकारात्मक टिप्पणी सामने आई थी।

वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ और एसडीएम के अधिकारों में कटौती का गंभीर आरोप

चुनाव प्रणाली और वोटर लिस्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने दावा किया कि स्थानीय स्तर पर एसडीएम (SDM) के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। 75 वर्षों से यह व्यवस्था रही है कि किसी भी नागरिक का वोट जोड़ने या काटने के लिए स्थानीय एसडीएम ही सत्यापन कराकर अंतिम निर्णय लेता था। लेकिन अब एक नया सॉफ्टवेयर लाकर कई क्षेत्रों में यह पावर सीधे एसडीएम से छीन ली गई है। गोवा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक को 97 लोगों के नाम जोड़ने के लिए पत्राचार करना पड़ा, जो काम स्थानीय स्तर पर तुरंत होना चाहिए था।

‘जनता के पास सरकार बदलने का हक नहीं रहेगा तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा’

केजरीवाल ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि दिल्ली में बैठकर कुछ लोग मनमाने तरीके से किसी का भी नाम मतदाता सूची से काट और जोड़ रहे हैं। यदि चुनाव प्रणाली में इस तरह का हस्तक्षेप होगा, तो जनता के हाथ से सत्ता बदलने का लोकतांत्रिक अधिकार ही छिन जाएगा। लोकतंत्र की बुनियादी ताकत यही है कि असंतुष्ट होने पर जनता वोट की चोट से सरकार बदल सके। उन्होंने जानकारी दी कि पंजाब में आम आदमी पार्टी ने एक विशेष और बड़ी टीम गठित की है, जो मतदाता सूची के सत्यापन और वोटर्स के नाम काटे जाने की हर प्रक्रिया पर पैनी नजर रख रही है।

 

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