Monday , 26 October 2026

ब्राजील में लूला डा सिल्वा की ऐतिहासिक वापसी: कड़े मुकाबले में बोल्सोनारो को चटाई धूल, जीतते ही अमेरिका को दिखाई आंखें; चौथी बार संभालेंगे देश की सत्ता

लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील के चुनावी रण में दिग्गज राजनेता लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने जबरदस्त बाजी मार ली है। अमेरिकी रुख की अनदेखी और तमाम अंदरूनी सियासी दांव-पेचों को दरकिनार करते हुए लूला ने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को चुनावी समर में करारी शिकस्त दी। इस शानदार जीत के साथ ही लूला डा सिल्वा चौथी बार देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होने जा रहे हैं। चुनावी नतीजों के सामने आते ही लैटिन अमेरिका की सीमाओं से लेकर वाशिंगटन के गलियारों तक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक पारा अचानक चढ़ गया है।

जीत के तुरंत बाद सख्त तेवर, वाशिंगटन को दिया दो टूक संदेश

चुनावी मैदान फतह करने के फौरन बाद लूला डा सिल्वा बेहद आक्रामक अंदाज में नजर आए। उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका को आड़े हाथों लेते हुए साफ कहा कि ब्राजील किसी की निजी जागीर नहीं है और देश अब किसी भी विदेशी ताकत के इशारे पर नहीं चलेगा। कूटनीतिक विश्लेषक लूला के इस कड़े बयान को अमेरिका की पूर्व नीतियों और ब्राजील पर थोपे गए भारी-भरकम व्यापारिक टैरिफ पर सीधा पलटवार मान रहे हैं। लूला ने पूरे अभियान के दौरान भी यह रेखांकित किया था कि ब्राजील अपने संप्रभु फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

कांटे के मुकाबले में 44 लाख वोटों से पलटी बाजी

यह चुनावी जंग बेहद उतार-चढ़ाव भरी रही। पहले चरण के मतदान में बोल्सोनारो ने 47 फीसदी वोट पाकर 45 फीसदी वोट पाने वाले लूला पर बढ़त बना ली थी, जिससे मुकाबला सांस रोक देने वाला बन गया था। हालांकि, दूसरे दौर में लूला ने युवाओं को लामबंद करते हुए कमरतोड़ महंगाई, खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ते अपराध को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया। जनता ने इन मुद्दों पर मुहर लगाते हुए लूला की झोली में बंपर वोट डाले और उन्होंने बोल्सोनारो को करीब 44 लाख वोटों के भारी अंतर से धूल चटा दी।

वोटिंग के आखिरी मिनटों में बढ़ा समय, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बवाल

मतदान के दिन ब्राजील में अप्रत्याशित सियासी ड्रामा भी देखने को मिला। जब वोटिंग समाप्त होने में महज तीन मिनट का समय बचा था, तभी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मतदान का समय दो घंटे के लिए बढ़ा दिया गया। अदालत ने यह फैसला साओ पाउलो और साल्वाडोर में मतदाताओं की बसों से जुड़ी समस्याओं और दक्षिणी ब्राजील में मूसलाधार बारिश को देखते हुए लिया था। इस विस्तार पर विरोधी खेमे ने जोरदार विरोध दर्ज कराते हुए इसे अनुचित ठहराया है और नतीजों को अदालत में चुनौती देकर चुनाव रद्द कराने की मांग तेज कर दी है।

मजदूर नेता से राष्ट्रपति भवन तक: जेल की सलाखों से ऐतिहासिक कमबैक

लगभग 81 वर्ष की उम्र में अमेरिकी महाद्वीप के सबसे बुजुर्ग राष्ट्रपतियों की कतार में शामिल होने वाले लूला का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। 1970 के दशक में एक श्रमिक संगठन के साधारण नेता के तौर पर उभरने वाले लूला ने वर्कर्स पार्टी की नींव रखी थी। वर्ष 2002 और 2006 में देश की कमान संभालने के बाद उन्हें भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों और जेल की सजा का भी सामना करना पड़ा। बाद में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद चुनावी राजनीति में लूला का यह कमबैक वैश्विक सियासत के लिए एक मिसाल बन चुका है, जिनका नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से औपचारिक रूप से शुरू होगा।

 

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