Saturday , 10 October 2026

Lucknow Crime: लखनऊ में मोबाइल किस्त वसूली के नाम पर युवक का निकाला खून, डीसीपी की फटकार पर दो हिरासत में; मुख्य आरोपी की तलाश में दबिश

 लखनऊ राजधानी लखनऊ के निगोहां इलाके में मोबाइल फाइनेंस की किस्त वसूली के नाम पर इंसानियत को शर्मसार करने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है। समय पर किस्त न चुका पाने पर दबंग रिकवरी एजेंटों ने एक युवक को बंधक बनाकर उसके हाथ से सिरिंज के जरिए जबरन खून निकाल लिया। मामले ने तूल पकड़ा तो डीसीपी दक्षिणी की कड़ी फटकार के बाद स्थानीय पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने आनन-फानन में मुकदमा दर्ज कर पीड़ित युवक का मेडिकल परीक्षण कराया, जिसमें उसके हाथ से खून निकाले जाने की पुष्टि हुई है। मामले में दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि मुख्य आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार है।

खून बेचकर पैसे वसूलने की थी साजिश, दो संदिग्ध हिरासत में डीसीपी दक्षिणी मो. मुश्ताक के अनुसार, पीड़ित नवल की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने दो संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया है। पुलिस पूछताछ में दोनों संदिग्धों ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उनके फरार मुख्य साथी ने किस्त की भरपाई के लिए खून बेचने की बात कही थी। हालांकि, निकाला गया खून किस ब्लड बैंक, अस्पताल या व्यक्ति को बेचा गया अथवा उसका क्या किया गया, इस बारे में दोनों ने अनभिज्ञता जताई है। पुलिस की तीन विशेष टीमें गठित की गई हैं जो मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।

मोबाइल शॉप संचालक और फाइनेंस एजेंटों से पूछताछ जांच की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस टीम ने मंगलवार को निगोहां कस्बे स्थित ‘गीता मोबाइल शॉप’ के संचालक शिवम को थाने तलब कर लंबी पूछताछ की। इसके साथ ही इलाके में काम करने वाली विभिन्न निजी फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंटों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। पुलिस यह स्पष्ट करने में जुटी है कि पीड़ित के मोबाइल फाइनेंस की रिकवरी का जिम्मा किस वित्तीय संस्थान और किन अधिकृत एजेंटों के पास था। सोमवार देर रात मुख्य आरोपी से फोन पर संपर्क हुआ था, लेकिन पुलिस की भनक लगते ही उसने अपना मोबाइल बंद कर लिया और भूमिगत हो गया।

दुकानदार का दावा: हमारा काम सिर्फ फोन बेचना, वसूली से कोई नाता नहीं पूछताछ के दौरान मोबाइल शॉप संचालक शिवम ने पूरी वसूली प्रक्रिया से खुद को अलग करते हुए पल्ला झाड़ लिया। संचालक ने पुलिस को बयान दिया कि दुकान का दायरा सिर्फ फोन की बिक्री और कागजी औपचारिकताएं पूरी कराने तक सीमित है। जैसे ही किसी ग्राहक का मोबाइल फाइनेंस स्वीकृत होता है, फाइनेंस कंपनी दुकान को पूरा भुगतान कर देती है। इसके बाद किस्त जमा कराने या न मिलने पर वसूली करने का पूरा जिम्मा संबंधित फाइनेंस कंपनी और उसके रिकवरी एजेंटों का होता है, इसमें दुकान की कोई भूमिका नहीं रहती। फिलहाल पुलिस ब्लड स्मगलिंग और अमानवीय प्रताड़ना के सभी पहलुओं पर गहन छानबीन कर रही है।

 

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