Wednesday , 30 September 2026

IAS-IPS की नौकरी छोड़ राजनीति में एंट्री, दिव्या मित्तल से पहले इन अफसरों ने भी आजमाया सियासी दांव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी नई राजनीतिक पारी का औपचारिक ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लाल और भगवा रंग की कमल कढ़ाई वाली साड़ी में एक वीडियो संदेश जारी करते हुए उन्होंने अपनी भावी रणनीति साफ कर दी। उन्होंने दो टूक कहा कि वह भाजपा, सपा या कांग्रेस जैसे किसी स्थापित दल में शामिल होने के बजाय अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पार्टी का गठन करेंगी। इस नई शुरुआत की जमीन उत्तर प्रदेश ही होगी, जहां उन्होंने बतौर प्रशासनिक अधिकारी 13 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं।

13 साल की सेवा और यूपी की जनता से पारिवारिक रिश्ता अपने वीडियो संदेश में पूर्व आईएएस ने कहा कि उत्तर प्रदेश उनके लिए सिर्फ कार्यक्षेत्र नहीं बल्कि एक परिवार जैसा है। सिस्टम के भीतर रहकर उन्होंने आम आदमी की उन अनसुनी पीड़ाओं को बेहद करीब से देखा है, जिनका दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी समाधान नहीं निकल पाता। इसी व्यवस्था को बदलने और जनसमस्याओं के सीधे समाधान के लिए उन्होंने सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला किया है।

2027 चुनाव की हलचल के बीच बड़ा दांव, खुद लड़ने पर सस्पेंस दिव्या मित्तल का यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो रही है। हालांकि, उनके नए मंच का आधिकारिक नाम, संगठन का औपचारिक ढांचा, चुनावी रणनीति और वह खुद चुनाव मैदान में उतरेंगी या नहीं, इन सभी बिंदुओं पर स्थिति आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी। संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकीं दिव्या मित्तल के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक लोकप्रियता को मजबूत कैडर और जमीनी संगठन में बदलने की होगी।

पारंपरिक ढांचे से अलग, वॉट्सऐप नेटवर्क से सीधे जनता से जुड़ाव शुरुआती रणनीति के तहत दिव्या मित्तल पारंपरिक राजनीतिक संगठनों के बजाय डिजिटल और जमीनी मॉडल पर फोकस कर रही हैं। वे सीधे वॉट्सऐप नेटवर्क और डिजिटल माध्यमों से आम नागरिकों, युवाओं और महिलाओं को अपने साथ जोड़ने की मुहिम शुरू करने जा रही हैं। उनका लक्ष्य जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित कर एक पारदर्शी विकल्प पेश करना है।

यूपी की सियासत में नौकरशाहों का इतिहास: कुछ चमके तो कई हुए बेअसर उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व नौकरशाहों की एंट्री का इतिहास काफी लंबा रहा है। किसी स्थापित बड़े दल का दामन थामने वाले पूर्व अधिकारियों को जहां चुनावी राजनीति में बड़ी सफलता मिली, वहीं अलग पार्टी बनाकर मैदान में उतरने वाले कई पूर्व अफसरों के लिए प्रशासनिक रुतबे को वोटों में बदल पाना बेहद कठिन साबित हुआ है।

जानिए सियासत में कदम रखने वाले प्रमुख पूर्व आईएएस-आईपीएस अधिकारी:

  • पी.एल. पुनिया: यूपी कैडर के पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशासनिक सेवा से मुक्त होकर कांग्रेस में शामिल हुए। वे पहले लोकसभा सांसद बने और बाद में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा सदस्य भी निर्वाचित कराया।

  • असीम अरुण: 2022 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आईपीएस सेवा से वीआरएस लेकर भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने कन्नौज सदर सीट से शानदार जीत हासिल की और वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं।

  • ब्रजलाल: उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ब्रजलाल ने सेवानिवृत्ति के बाद 2015 में भाजपा की सदस्यता ली। 2018 में उन्हें एससी-एसटी आयोग का अध्यक्ष बनाया गया और बाद में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा।

  • आलोक रंजन: यूपी के मुख्य सचिव रहे पूर्व आईएएस आलोक रंजन ने रिटायरमेंट के बाद समाजवादी पार्टी जॉइन की। सपा ने उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार भी बनाया था।

  • देवमणि दुबे: आईआरटीएस सेवा छोड़कर 2016 में भाजपा में आए और 2017 के विधानसभा चुनाव में सुल्तानपुर की लंभुआ सीट से विधायक चुने गए।

  • सुलखान सिंह: 1980 बैच के आईपीएस और पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने नवंबर 2023 में ‘बुंदेलखंड लोकतांत्रिक पार्टी’ का गठन किया और 15 जिलों को मिलाकर अलग बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग उठाई।

  • अमिताभ ठाकुर: पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने 2021 में ‘आजाद अधिकार सेना’ नाम से अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई और लगातार जनहित के मुद्दों पर सक्रिय हैं।

  • विजय शंकर पांडेय: पूर्व आईएएस विजय शंकर पांडेय ने सेवानिवृत्ति के बाद ‘लोक गठबंधन पार्टी’ बनाई और 2019 में फैजाबाद लोकसभा सीट से चुनावी ताल ठोंकी थी।

  • चंद्रपाल: पूर्व आईएएस चंद्रपाल ने प्रशासनिक सेवा के बाद ‘आदर्श समाज पार्टी’ का गठन कर सियासत में जगह बनाने का प्रयास किया था।

  • राम बहादुर: पूर्व आईएएस राम बहादुर ने 2017 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और बाद में 2022 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

  • एस.आर. दारापुरी: पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी सेवानिवृत्ति के बाद ‘ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट’ से जुड़कर सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों में सक्रिय रहे।

 

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