Monday , 5 October 2026

GST सुधार 2.0: अब टैक्स अफसर सीधे नहीं भेज सकेंगे जेल, 7 अक्टूबर की बैठक में इन बड़े बदलावों पर लग सकती है मुहर

 नई दिल्ली देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को अधिक कारोबार-अनुकूल और पारदर्शी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। 7 अक्टूबर को आयोजित होने वाली जीएसटी परिषद की अहम बैठक में कर अधिकारियों की सीधे गिरफ्तारी करने की शक्ति को समाप्त करने और किसी भी गिरफ्तारी के लिए अदालत की पूर्व मंजूरी को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कर चोरी और फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों में आपराधिक मुकदमा चलाने की न्यूनतम सीमा को मौजूदा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर सीधे पांच करोड़ रुपये करने की तैयारी है। सरकार का स्पष्ट संकेत है कि अब कारोबारियों में गिरफ्तारी का डर पैदा करने के बजाय आधुनिक तकनीक के जरिए टैक्स वसूली, ब्याज और जुर्माने पर प्राथमिक ध्यान दिया जाएगा।

गिरफ्तारी और मुकदमों के नियमों में क्या होगा बदलाव जीएसटी परिषद के समक्ष केंद्रीय माल और सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 69 में संशोधन का मसौदा रखा जाएगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत निर्धारित शर्तें पूरी होने पर आयुक्त स्तर का अधिकारी सीधे किसी भी कर अधिकारी को संबंधित व्यक्ति की गिरफ्तारी की मंजूरी दे सकता है। नए प्रस्ताव के तहत यह विशेषाधिकार अधिकारियों से वापस ले लिया जाएगा और किसी भी व्यापारी या उद्यमी को हिरासत में लेने से पहले सक्षम अदालत से आदेश लेना अनिवार्य होगा।

इसके साथ ही, अभियोजन (क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन) की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये की जा रही है। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि पांच करोड़ रुपये तक की टैक्स चोरी करने वालों को छूट मिल जाएगी; बल्कि सरकार ऐसे मामलों में कठोरता से बकाया कर, ब्याज और जुर्माना वसूल करेगी। गंभीर एवं सुनियोजित धोखाधड़ी के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अदालत के जरिए ही आपराधिक कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

व्यापारियों को राहत: नियमित कारोबारी विवाद नहीं बनेंगे ‘अपराध’ इस प्रस्तावित सुधार का मुख्य उद्देश्य नियमित व्यावसायिक मतभेदों को आपराधिक मुकदमों से अलग रखना है। अक्सर वस्तुओं के वर्गीकरण (एचएसएन कोड), मूल्यांकन या इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की व्याख्या को लेकर करदाताओं और मूल्यांकन अधिकारियों के बीच कानूनी मतभेद हो जाते हैं। ऐसे मामलों में अब दंडात्मक गिरफ्तारी के बजाय आर्थिक देनदारी तय करने को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, नकदी प्रवाह में रुकावट, रिटर्न दाखिल करने में तकनीकी देरी या समय पर कर न चुका पाने जैसे प्रकरणों में टैक्स, ब्याज और जुर्माना अदा कर विवाद सुलझाने का रास्ता पहले से कहीं अधिक सुगम हो जाएगा।

कानून का डीक्रिमिनलाइजेशन: 24 अपराधों के प्रावधान होंगे सरल जीएसटी कानून के तहत आपराधिक दायरे में आने वाले 24 विभिन्न अपराधों के प्रावधानों को व्यावहारिक व नरम बनाने, 9 अपराधों को कानून से पूरी तरह विलोपित करने और 11 प्रावधानों को यथावत बनाए रखने का प्रस्ताव है। अदालतों की बाध्यता समाप्त करने के उद्देश्य से न्यूनतम कारावास के प्रावधान को हटाने और सजा की एक प्रमुख श्रेणी में अधिकतम कारावास को तीन साल से घटाकर दो साल करने का विचार है। साथ ही, कारावास के स्थान पर आर्थिक दंड का विकल्प और छोटे व्यापारियों के लिए विलंब शुल्क में राहत देने का खाका भी तैयार किया गया है।

तकनीकी मिलान से बदली व्यवस्था: डर नहीं, डेटा बनेगा हथियार एक जुलाई 2017 को जब जीएसटी लागू किया गया था, तब फर्जी बिलों और जाली आईटीसी दावों की रोकथाम के लिए रियल-टाइम बिल मिलान की प्रणाली मजबूत नहीं थी, जिसके चलते गिरफ्तारी जैसे सख्त दंडात्मक प्रावधान जोड़े गए थे। वर्तमान समय में आधुनिक जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) के जरिए विक्रेता द्वारा अपलोड किए गए बिल और खरीदार द्वारा दावा किए गए आईटीसी का त्वरित और सटीक मिलान संभव हो चुका है। ऐसे में फर्जीवाड़े की शुरुआती चरण में ही पहचान हो जाती है, जिससे दंडात्मक गिरफ्तारी की जगह डेटा-संचालित जांच और आर्थिक वसूली को मुख्य आधार बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अधिकारियों के अनावश्यक हस्तक्षेप और गिरफ्तारी के दबाव से कारोबार जगत को बड़ी राहत मिलेगी।

सोना-चांदी और प्लैटिनम के आयात पर खत्म हो सकती है आईजीएसटी छूट बैठक में बहुमूल्य धातुओं के आयात से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण फैसला भी संभव है। वर्तमान में बैंकों और सरकार से मान्यता प्राप्त नामित एजेंसियों को सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर लगने वाले तीन प्रतिशत एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) से जो छूट मिल रही है, उसे समाप्त किया जा सकता है। सरकार विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और आयात असंतुलन को लेकर सतर्क है। इस छूट के हटने से सभी नामित एजेंसियों और घरेलू सर्राफा एक्सचेंजों के लिए आयात कर की दरें पूरी तरह समान हो जाएंगी।

जीएसटी 2.0 का एजेंडा: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा यह पूरी कवायद सरकार के ‘जीएसटी 2.0’ सुधारों की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सितंबर 2025 में कर दरों के युक्तिकरण के बाद अब पूरा जोर अनुपालन की लागत घटाने, पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने, तेजी से रिफंड जारी करने और नोटिस व जुर्माने की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर है। ‘जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के अनुरूप आर्थिक कानूनों को गैर-आपराधिक (डीक्रिमिनलाइज) बनाने की इस मुहिम से देश के सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़े उद्यमों के लिए व्यापार करना पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम हो जाएगा।

 

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