
वॉशिंगटन/रियाद । पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर किए गए सैन्य हमलों का जोरदार बचाव करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह से मटियामेट कर दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की छूट देना पूरी दुनिया के लिए भयानक तबाही का सबब बन सकता था, इसलिए किसी भी संभावित परमाणु जंग को रोकने के लिए समय रहते सैन्य कार्रवाई करना बेहद अपरिहार्य हो चुका था।
‘अगर परमाणु बम बनता तो वे इस्तेमाल कर लेते, हमने सब खत्म कर दिया’
मिशिगन में एक चुनावी रैली को संबोधित करने से पहले एक साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने अपने इस फैसले को जायज ठहराते हुए कहा कि लोग समस्याओं की कल्पना नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि मामला केवल वैश्विक ऊर्जा संकट तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बड़े पैमाने पर मौतों से जुड़ा था। अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता, तो वह उसका इस्तेमाल जरूर करता। ट्रंप ने दावा किया कि जब यह सैन्य कार्रवाई की गई, तब उन्हें पूरा भरोसा था कि ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को जबर्दस्त चोट पहुंचाई गई है। उनके मुताबिक, यह नुकसान किसी के भी अनुमान से कहीं अधिक बड़ा था और अब ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म हो चुका है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य से तेज: ट्रंप
वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से अब युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले कहीं अधिक कच्चे तेल का सुरक्षित परिवहन हो रहा है। इसका श्रेय उन्होंने अमेरिकी नौसेना की रणनीतिक नाकेबंदी और ऑपरेशनों को दिया। ट्रंप ने कहा कि शुरुआत में कीमतों में थोड़ी तेजी का अनुमान था, लेकिन अमेरिकी नौसेना के मजबूत नियंत्रण की वजह से अब वहां से तेल की सप्लाई पहले से भी तेज गति से चल रही है।
‘जंग हो या न हो, नीतियां नहीं बदलेंगी’: ईरान का पलटवार
दूसरी ओर, वाशिंगटन के इन आक्रामक बयानों के बीच ईरान ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ लफ्जों में कहा कि भविष्य में युद्ध के हालात बनें या न बनें, ईरान अपनी रणनीतिक नीतियों से पीछे नहीं हटेगा। ईरानी समाचार एजेंसी के हवाले से अराघची ने चेतावनी दी कि तेहरान पर किसी भी तरह का नया सैन्य हमला अमेरिका के लिए पूरी तरह अतार्किक साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर युद्ध की बातें दोबारा शुरू हो चुकी हैं, लेकिन चाहे युद्ध हो अथवा शांति, ईरान अपने सिद्धांतों और मौजूदा नीतियों पर अडिग रहेगा।
सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद अमेरिका का बड़ा फैसला
इस बीच खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात तब और ज्यादा बिगड़ गए जब यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई अहम ठिकानों पर भीषण ड्रोन और मिसाइल हमले किए। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी के अनुसार, रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, तेल रिफाइनरियों, महत्वपूर्ण ऊर्जा संयंत्रों और सैन्य हवाई ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों के तुरंत बाद अमेरिका के विदेश विभाग ने कड़ा कदम उठाते हुए सऊदी अरब में तैनात अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को तुरंत देश छोड़ने का निर्देश जारी कर दिया है। रियाद स्थित अमेरिकी मिशन ने सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए आगाह किया है कि सीमा पार से हो रहे इन हमलों से समूचे मध्य पूर्व में तनाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकता है।
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