Wednesday , 30 September 2026

DUSU Election 2026: डूसू में 40.46% वोटिंग के साथ थमा घमासान, आज आएंगे नतीजे; हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर लगाई सख्त रोक

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया शुक्रवार को संपन्न हो गई। इस बार कैंपस में 40.46 फीसदी छात्र मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पिछले वर्ष दर्ज किए गए 39.45 फीसदी के मुकाबले 1.01 प्रतिशत अधिक है। कुल 1.51 लाख पंजीकृत मतदाताओं के लिए विश्वविद्यालय के 52 संबद्ध कॉलेजों और विभागों में कड़ी सुरक्षा के बीच पोलिंग बूथ बनाए गए थे। केंद्रीय पैनल के चार प्रमुख पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—के लिए कुल 20 प्रत्याशी चुनावी रण में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। शनिवार सुबह आठ बजे से विश्वविद्यालय के मल्टीपर्पज हॉल में मतों की गिनती शुरू हो रही है और दोपहर तक स्थिति पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है। इसी बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने परिणाम के बाद निकाले जाने वाले विजय जुलूसों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है।

जीत-हार तय करेंगे ये एक दर्जन प्रमुख कॉलेज

डूसू चुनाव की सियासी बिसात पर असली बाजी उन चुनिंदा कॉलेजों के दम पर पलटती है, जहां मतदाताओं की संख्या और टर्नआउट अधिक रहता है। रणनीतिकारों की नजर हमेशा उन संस्थानों पर टिकी रहती है, जहां एक हजार से लेकर दो हजार से अधिक वोट पड़ते हैं। कालकाजी क्षेत्र के देशबंधु कॉलेज और रामानुजन कॉलेज में बंपर वोटिंग की परंपरा रही है, जिसका सीधा असर केंद्रीय पैनल के आंकड़ों पर पड़ता है। इसके अलावा साउथ कैंपस के शहीद भगत सिंह कॉलेज, अदिति कॉलेज, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, भगिनी निवेदिता कॉलेज, राजधानी और शिवाजी कॉलेज में होने वाला भारी मतदान प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करता है। वहीं, ईवनिंग कॉलेजों में होने वाली वोटिंग अक्सर जीत-हार के अंतर को तय करने में निर्णायक साबित होती है।

नॉर्थ और ईस्ट दिल्ली के गढ़ में किसकी बनेगी बढ़त

विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित प्रमुख कॉलेज हमेशा से छात्र संगठनों की प्रतिष्ठा का सवाल रहे हैं। हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज (KMC) और श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में औसतन दो हजार से ज्यादा वोट डलने की स्थिति में केंद्रीय पैनल की बढ़त तय मानी जाती है। इसी तरह पूर्वी दिल्ली के श्यामलाल कॉलेज और विवेकानंद कॉलेज में भी करीब एक हजार से अधिक वोटिंग प्रत्याशियों के खाते में बड़ा उछाल लाती है। यही कारण रहा कि मतदान समाप्त होने तक इन कॉलेजों के बाहर छात्र संगठनों ने मतदाताओं को बूथों तक पहुंचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी।

आचार संहिता की उड़ीं धज्जियां, सड़कों पर पटीं पर्चियां

छात्र राजनीति के इस सबसे बड़े उत्सव के दौरान चुनाव आचार संहिता के गंभीर उल्लंघन भी देखने को मिले। दिल्ली हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों और लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को दरकिनार करते हुए जमकर शक्ति प्रदर्शन किया गया। नॉर्थ, साउथ और आउटर कैंपस के कॉलेजों के बाहर प्रत्याशियों के नाम और बैलेट नंबर वाली पर्चियों का अंबार लग गया, जिससे सड़कें पटी नजर आईं। श्यामलाल कॉलेज के बाहर समर्थकों द्वारा पर्चियां उड़ाने के साथ आतिशबाजी करने का मामला सामने आया। विश्वविद्यालय मार्गों पर महंगी गाड़ियों और एसयूवी के काफिलों के कारण दिनभर भीषण ट्रैफिक जाम लगा रहा, जिसने सुरक्षा और प्रशासनिक प्रबंधों पर सवाल खड़े कर दिए।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख: 140 उम्मीदवारों को नोटिस, जुलूस पर बैन

चुनावी गतिविधियों में नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने चुनाव प्रचार के दौरान हथियार लहराने, लक्जरी गाड़ियों के काफिले निकालने और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर भारी नाराजगी जताई। अदालत ने 140 छात्र प्रत्याशियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए मतगणना के बाद किसी भी तरह के विजय जुलूस या रोड शो निकालने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

सत्य निकेतन हादसा, पीजी सुरक्षा और मेट्रो पास रहे बड़े मुद्दे

इस बार छात्रों के चुनावी सरोकार केवल कैंपस की सियासत तक सीमित नहीं रहे, बल्कि बुनियादी समस्याओं ने मतदान के रुख को काफी प्रभावित किया। साउथ कैंपस में वोट डालने पहुंचे विद्यार्थियों के बीच हालिया सत्य निकेतन हादसा सबसे बड़ा मुद्दा बना रहा। प्राइवेट पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने मांग उठाई कि किराये और दूरी के साथ-साथ इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा की भी सख्त जांच होनी चाहिए। इसके अलावा डीयू में पर्याप्त हॉस्टल सुविधाओं का अभाव, छात्राओं के लिए कैंपस के बाहर भी पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था, बढ़ी हुई कॉलेज फीस और दैनिक यात्रा के लिए रियायती मेट्रो पास की मांग प्रमुखता से छाई रही।

 

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