Friday , 6 November 2026

Crude Oil Price Today: $100 के करीब पहुंचा कच्चा तेल, ब्रेंट क्रूड में 1.6% का उछाल; जानिए क्यों फिर भड़की कीमतों की आग

नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी भारी उठापटक के बीच शुक्रवार को एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिला है। शुक्रवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गए। सुबह के कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड 1.6 फीसदी की तेजी के साथ 99.86 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 1.15 प्रतिशत की मजबूती के साथ 91.56 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।

बुधवार की भारी गिरावट के बाद लौटी जोरदार तेजी

इससे पहले बुधवार को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी बिकवाली दर्ज की गई थी, जब दोनों प्रमुख बेंचमार्क 8 फीसदी से ज्यादा टूटकर 31 अगस्त के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गए थे। हालांकि, यह मंदी ज्यादा देर नहीं टिकी। गुरुवार शाम से बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिली। गुरुवार के कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड 3.8 फीसदी की छलांग लगाकर 98.29 डॉलर और अमेरिकी WTI क्रूड 2.7 फीसदी उछलकर 90.52 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। गुरुवार की इस तेजी का सिलसिला शुक्रवार सुबह भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों से कूटनीतिक उम्मीदें

बाजार में कूटनीतिक स्थिरता की उम्मीद हालिया अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों के बाद बंधी है। चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। जानकारों का मानना है कि इस राजनीतिक बदलाव के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए मिलने वाला समर्थन सीमित हो सकता है। इसके अलावा, तेहरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम पर मध्यस्थों के शांति प्रस्तावों की समीक्षा किए जाने की खबरों ने भी बाजार को कुछ समय के लिए राहत दी थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त रुख

कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद तेल आपूर्ति मार्ग को लेकर संशय के बादल छंटे नहीं हैं। ईरान ने दो-टूक कहा है कि जब तक उसके बंदरगाहों से अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह नहीं हटाई जाती, तब तक वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सामान्य आवाजाही के लिए नहीं खोलेगा। इसके साथ ही तेहरान ने अपने ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने और विदेशी बैंकों में जब्त अपनी संपत्तियों को तुरंत रिलीज करने की पूर्व शर्त भी रखी है।

समंदर में जहाजों पर हमले और रिफाइनरियों पर संकट

समुद्री व्यापार मार्गों पर जहाजों की सुरक्षा को लेकर जोखिम लगातार बना हुआ है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, रविवार से अब तक फारस की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों से जुड़ी कम से कम पांच घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुताबिक, अनधिकृत जलमार्गों का इस्तेमाल करने के प्रयास में दो तेल टैंकरों और एक टगबोट में आग लगने की घटनाएं घटी हैं।

इसके साथ ही यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जिसके चलते सऊदी अरब ने लाल सागर स्थित अपने प्रमुख तेल निर्यात हब ‘यानबू’ (Yanbu) के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। वहीं, यूक्रेन की ओर से रूसी रिफाइनरियों पर किए गए ताजा हमलों ने रूस के डीजल निर्यात तंत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है।

क्या फिर $125 तक जाएगा कच्चा तेल?

सप्लाई के मोर्चे पर राहत भरी खबर यह है कि खाड़ी देशों से कच्चे तेल का निर्यात धीरे-धीरे युद्ध-पूर्व स्तर के करीब पहुंच रहा है, हालांकि महंगे समुद्री भाड़े (Freight Rates) ने लागत को ऊंचा बनाए रखा है। वैश्विक थिंक टैंक और रिसर्च फर्म यूरेशिया ग्रुप (Eurasia Group) ने अपने ताजा आकलन में ईरान पर नए अमेरिकी हमलों की संभावना को 65 फीसदी से घटाकर 60 फीसदी कर दिया है, जबकि कूटनीतिक समझौते की उम्मीद को 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। फर्म ने दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सैन्य गतिरोध खिंचने की आशंका को 15 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया है। विश्लेषकों ने आगाह किया है कि यदि यह भू-राजनीतिक टकराव दोबारा भड़कता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें एक बार फिर 110 से 125 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच सकती हैं।

 

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