Monday , 2 November 2026

दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर नकेल: 1 नवंबर से बाहर की नॉन BS-VI गाड़ियों की नो-एंट्री, दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम; पार्किंग शुल्क दोगुना

दिल्ली-एनसीआर में ठंड की शुरुआत के साथ ही गहराने वाले प्रदूषण संकट से निपटने के लिए 1 नवंबर से कड़े दिशा-निर्देश और नई पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। नए नियमों के अनुसार, दिल्ली के बाहर पंजीकृत उन वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है जो बीएस-6 (BS-VI) मानकों को पूरा नहीं करते हैं। इसके अलावा प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से सभी सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए कई सार्वजनिक पार्किंग स्थलों की दरों को दोगुना कर दिया गया है।

अक्टूबर में हवा की गुणवत्ता में ऐतिहासिक सुधार, 2018 के बाद सबसे बेहतर स्तर

सर्दियों के आगमन पर अमूमन दिल्ली की हवा दमघोंटू हो जाती थी, लेकिन इस बार पिछले वर्षों की तुलना में वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2026 में दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 166 दर्ज किया गया है। वर्ष 2018 के बाद यह पहला मौका है जब अक्टूबर के महीने में वायु प्रदूषण का स्तर इतना कम रहा है।

28 फरवरी तक लागू रहेगा विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान

दिल्ली सरकार ने जुलाई 2026 में विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान को हरी झंडी दिखाई थी। इस योजना के तहत प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर से 28 फरवरी तक राजधानी में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए चरणबद्ध उपाय अमल में लाए जाएंगे। पहले जहां वायु गुणवत्ता बिगड़ने के बाद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत प्रतिबंध लगाए जाते थे, वहीं अब नए एक्शन प्लान में पूर्व-निर्धारित तिथियों के अनुसार पाबंदियों को अग्रिम तौर पर लागू किया जा रहा है ताकि स्थिति बिगड़ने से पहले ही उस पर नियंत्रण पाया जा सके।

GRAP की व्यवस्था और उसके चरणबद्ध प्रतिबंध

ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) को पहली बार जनवरी 2017 में लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता के बिगड़ने पर एक्यूआई के स्तर के अनुसार तात्कालिक और सख्त पाबंदियां लागू करना है। ग्रैप के अंतर्गत वायु प्रदूषण के विभिन्न पैमानों (खराब, बहुत खराब, गंभीर और अति-गंभीर) को चार चरणों में विभाजित किया गया है, और जैसे-जैसे एक्यूआई का स्तर बढ़ता है, उसी अनुपात में निर्माण गतिविधियों, डीजल जेनरेटरों और वाहनों पर बंदिशें कड़ी होती जाती हैं।

2026 में 220 दिन हवा रही संतोषजनक, पिछले वर्षों का रिकॉर्ड टूटा

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच दिल्लीवासियों को 220 दिन ऐसे मिले जब हवा की गुणवत्ता ‘अच्छी’ से ‘संतोषजनक’ श्रेणी (AQI 200 से कम) में रही। यह आंकड़ा पिछले कई वर्षों के मुकाबले सबसे बेहतर है। वर्ष 2025 में ऐसे दिनों की संख्या 200, वर्ष 2024 में 201 और वर्ष 2023 में 206 दर्ज की गई थी। इसके विपरीत इस वर्ष जनवरी से अक्टूबर के दौरान केवल 84 दिन ऐसे रहे जब वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘गंभीर’ (AQI 200 से ऊपर) श्रेणी में पहुंची, जबकि 2025 और 2024 में ऐसे 104-104 दिन, 2023 में 98 दिन और 2022 में 144 दिन दर्ज किए गए थे।

 

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