
लखनऊ। राजधानी के बहुचर्चित कारोबारी शिवा शर्मा हत्याकांड में गिरफ्तार मॉडल श्रद्धा दुबे के खिलाफ पुलिस ने कानूनी शिकंजा और मजबूत कर दिया है। फरारी के दौरान सोशल मीडिया पर सामने आए श्रद्धा के कई ऑडियो और वीडियो की गहन जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने इन सभी डिजिटल साक्ष्यों को प्रामाणिकता की जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेज दिया है। फोरेंसिक विशेषज्ञ श्रद्धा के वॉयस सैंपल का मिलान वायरल ऑडियो क्लिप्स से कराएंगे। हाई-प्रोफाइल मामले को देखते हुए पुलिस बेहद सतर्कता से पुख्ता वैज्ञानिक व तकनीकी साक्ष्य जुटा रही है।
बयानों, सीसीटीवी फुटेज और पड़ोसियों की गवाही का होगा मिलान
पुलिस जांच टीम आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और कार चालक दानिश के बयानों का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर रही है। इन बयानों का मिलान घटना के समय उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और प्रागनारायण रोड स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट के निवासियों के बयानों से किया जा रहा है। जांच में अपार्टमेंट के सुरक्षा गार्ड, नौकरानी और पड़ोसियों के बयान बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
पुलिस तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच अधिकारियों के अनुसार, यदि बयानों में विरोधाभास मिला तो अदालत से अनुमति लेकर आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लेकर आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी। इसके अतिरिक्त श्रद्धा के एक करीबी समेत दो मददगारों के खिलाफ भी सबूत जुटाए जा रहे हैं, जिनकी गिरफ्तारी जल्द संभावित है।
फरारी के दौरान वायरल हुए 4 वीडियो और 3 धमकी भरे ऑडियो
हत्याकांड के बाद श्रद्धा की फरारी के दौरान इंटरनेट मीडिया पर लगातार कई वीडियो और ऑडियो सामने आए थे:
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14 अक्तूबर की रात: श्रद्धा का पहला 1 मिनट 15 सेकंड का वीडियो सामने आया। इसी रात दूसरा 36 सेकंड का वीडियो वायरल हुआ।
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15 अक्तूबर की दोपहर: 5 मिनट 28 सेकंड का एक लंबा वीडियो जारी हुआ।
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18 अक्तूबर की शाम: न्यूज एजेंसी को दिया गया 3 मिनट 57 सेकंड का साक्षात्कार सामने आया, जिसमें उसने खुद को बेकसूर बताया था।
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21 अक्तूबर की सुबह: सोशल मीडिया पर तीन ऑडियो क्लिप वायरल हुईं, जिनमें श्रद्धा कथित तौर पर कारोबारी शिवा शर्मा को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देती सुनाई दे रही थी।
चचेरा भाई बनकर जेल पहुंचा युवक बैरंग लौटा, वकील ने 30 मिनट की बातचीत
सोमवार को लखनऊ जिला जेल में निरुद्ध श्रद्धा से मिलने पहुंचे एक युवक को जेल गेट से ही लौटा दिया गया। त्रिवेणी नगर निवासी ओम वर्मा नामक युवक ने ऑनलाइन पर्ची बनवाते समय खुद को श्रद्धा का चचेरा भाई बताया था। हालांकि, जेल प्रशासन के अनुसार श्रद्धा द्वारा दी गई स्वीकृत आगंतुक सूची में केवल उसके पिता व कुछ अन्य निकट परिजन शामिल थे। पुलिस सत्यापन न होने के कारण जेल नियमों के तहत मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई।
वहीं, दोपहर करीब दो बजे श्रद्धा के अधिवक्ता ने जेल पहुंचकर करीब 30 मिनट तक कानूनी प्रक्रिया और मामले की पैरवी को लेकर चर्चा की। वकील की ओर से श्रद्धा को रोजमर्रा के उपयोग का सामान दिया गया, जिसे जेल सुरक्षाकर्मियों ने कड़ी जांच के बाद उसकी बैरक में पहुंचाया। शुक्रवार को जेल दाखिल होने के बाद श्रद्धा पहली बार महिला सर्किल से बाहर मुलाकात कक्ष तक आई थी।
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