
वॉशिंगटन। अमेरिका और चीन के बीच जारी भू-राजनीतिक खींचतान के बीच एक ऐसा दृश्य सामने आया है जिसने पूरी दुनिया के राजनयिक गलियारों में हलचल मचा दी है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर अमेरिका की धरती पर उतरे। मैरीलैंड स्थित ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने उनका जिस गर्मजोशी और सैन्य भव्यता के साथ इस्तकबाल किया, उसने कूटनीति के नए समीकरण गढ़ दिए हैं।
1962 के बाद पहली बार टूटा प्रोटोकॉल, खुद रनवे पर पहुंचे ट्रंप
इस स्वागत की सबसे असाधारण बात अमेरिकी इतिहास के दशकों पुराने प्रोटोकॉल का टूटना रही। आम तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में करते हैं, लेकिन डोनल्ड ट्रंप ने परंपरा दरकिनार करते हुए खुद ज्वाइंट बेस एंड्रयूज के रनवे (टारमैक) पर पहुंचकर चीनी राष्ट्रपति की अगवानी की। अमेरिकी कूटनीतिक इतिहास में ऐसा नजारा वर्ष 1962 के बाद पहली बार देखने को मिला है, जब किसी वर्तमान राष्ट्रपति ने खुद एयरपोर्ट जाकर किसी विदेशी मेहमान का स्वागत किया हो।
100 फीट लंबा रेड कार्पेट, 21 जवानों का ऑनर कॉर्डन और तोपों की सलामी
विमान का दरवाजा खुलते ही अमेरिकी प्रशासन की ओर से की गई शाही तैयारियों का नजारा साफ दिखा। दोनों नेताओं के सम्मान में 100 फीट लंबा लाल कालीन बिछाया गया था। अमेरिकी सेना की सलामी बैटरी, 21 जवानों का विशेष सम्मान गार्ड (ऑनर कॉर्डन) और दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज लिए कलर टीमें मुस्तैद थीं। दोनों देशों के राष्ट्रगान की धुन के बीच चीनी राष्ट्रपति का काफिला रवाना हुआ, जिसके बाद ट्रंप और मेलानिया मरीन वन हेलिकॉप्टर से सीधे व्हाइट हाउस लौट गए।
आसमान में गरजे बी-1 बॉम्बर्स, शक्ति और सम्मान का अनूठा मेल
एयरपोर्ट पर हुए इस स्वागत का सबसे चौंकाने वाला और हैरतअंगेज पहलू अमेरिकी वायुसेना के दो बी-1 लांसर सुपरसोनिक बॉम्बर्स का लो-लेवल फ्लाईओवर रहा। बी-1 बॉम्बर्स की कान फोड़ देने वाली गड़गड़ाहट से पूरा आसमान गूंज उठा। सुपरसोनिक बॉम्बर्स का यह फ्लाईपास्ट न केवल मेहमान नवाजी का चरम था, बल्कि वाशिंगटन की ओर से बीजिंग को अपनी सामरिक शक्ति का एक मूक संदेश भी माना जा रहा है।
साल 2015 के बाद पहला दौरा और पारस्परिक कूटनीति का दांव
साल 2015 के बाद शी चिनफिंग की यह पहली वॉशिंगटन यात्रा है, जो पारस्परिक कूटनीति के नजरिए से बेहद संवेदनशील मोड़ पर हो रही है। गौरतलब है कि मई महीने में जब ट्रंप बीजिंग पहुंचे थे, तब शी चिनफिंग खुद उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट नहीं आए थे; उनकी जगह उपराष्ट्रपति हान झेंग ने ट्रंप का स्वागत किया था, हालांकि वहां भी उन्हें भव्य गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। अब ट्रंप का व्यक्तिगत रूप से रनवे तक चलकर आना और आसमान में रणनीतिक बॉम्बर्स उड़ाना यह साफ करता है कि अमेरिका इस रिश्ते में अपनी बढ़त और सम्मान दोनों को शिखर पर दिखाना चाहता है।
दिखावा या बड़ा संदेश: क्या हैं इस महाबैठक के असली मायने?
दोनों देशों के बीच ताइवान से लेकर ट्रेड वॉर तक भारी तनाव के बावजूद ट्रंप का यह अंदाज महज औपचारिक दिखावा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा भू-राजनीतिक और आर्थिक एजेंडा है। दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच बंद कमरे में कई अहम मुद्दों पर चर्चा तय है:
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व्यापार और टैरिफ: दोनों आर्थिक महाशक्तियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे टैरिफ विवाद को सुलझाना और आपसी व्यापारिक संतुलन साधना।
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प्रौद्योगिकी और एआई: चिप्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक प्रभुत्व और आपूर्ति श्रृंखला के कड़े नियम तय करना।
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भू-राजनीतिक संकट: ताइवान जलडमरूमध्य में स्थिरता, दक्षिण चीन सागर, ईरान संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान पर आम सहमति तलाशना।
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