जमुई ब्यूरो। बिहार के जमुई जिले में सड़क किनारे एक नाबालिग छात्रा और उसके दोस्त के साथ बदसलूकी व छेड़खानी का सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक और सियासी हलकों में हड़कंप मच गया है। मामले का वीडियो सार्वजनिक होते ही जमुई पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और अब तक तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
19 सितंबर की शाम हुई वारदात, वाहन नंबर से पीड़ितों तक पहुंची पुलिस
पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह वारदात 19 सितंबर की शाम की है, जबकि इसका आपत्तिजनक वीडियो 21 सितंबर को विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर तेजी से प्रसारित हुआ। वीडियो में कुछ युवक सड़क किनारे एक लड़के और लड़की को घेरकर अभद्र व्यवहार और छेड़खानी करते साफ नजर आ रहे हैं।
जमुई के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विश्वजीत दयाल ने बताया कि वारदात के बाद पीड़ित पक्ष की तरफ से थाने में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। सोमवार को जैसे ही वीडियो संज्ञान में आया, पुलिस ने वीडियो में दिख रहे वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए छानबीन की और दोनों पीड़ितों की पहचान कर उनसे संपर्क साधा। जांच में स्पष्ट हुआ कि पीड़ित छात्र-छात्रा एक ही कोचिंग संस्थान में पढ़ते हैं। पुलिस ने पीड़िता की निजता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी है।
BNS और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में केस दर्ज, 7 आरोपियों की पहचान
पीड़ितों से बातचीत और वीडियो के तकनीकी विश्लेषण के बाद 21 सितंबर 2026 को जमुई थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 76(3)(5) के अलावा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 8 और 12 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। वीडियो फुटेज की गहन जांच के आधार पर लगभग सात मुख्य आरोपियों की पहचान की गई है, जिनमें से तीन को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ जारी है।
एसडीपीओ दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में SIT गठित, सोशल मीडिया से वीडियो हटाने के निर्देश
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी विश्वजीत दयाल ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। एसआईटी की टीम घटनास्थल के भौतिक साक्ष्यों, वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच और गवाहों के बयानों को जुटाने में लगी है। इसके साथ ही साइबर सेल के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वायरल वीडियो को तत्काल हटाने की कानूनी प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
राज्य महिला आयोग ने लिया संज्ञान, डीएम से तलब की विस्तृत रिपोर्ट
बिहार राज्य महिला आयोग ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मामले पर संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं और बालिकाओं की गरिमा पर हमला किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने जमुई के जिलाधिकारी से घटना और पुलिस की कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
इधर, इस घटना को लेकर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस वारदात को विचलित करने वाला करार देते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त पॉक्सो धाराओं में कड़ी सजा की मांग उठाई। वहीं आम आदमी पार्टी ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, जिसके जवाब में सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने आश्वस्त किया कि सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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