नई दिल्ली: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के शुरुआती रुझानों ने भारतीय राजनीति की दिशा और दशा बदलने के संकेत दे दिए हैं। आज आ रहे परिणामों ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। पश्चिम बंगाल के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता की दहलीज पर खड़ी दिख रही है, वहीं दक्षिण भारत के दो कद्दावर क्षत्रप—एमके स्टालिन और पिनराई विजयन—की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। अगर ये रुझान नतीजों में तब्दील होते हैं, तो यह न केवल क्षेत्रीय दलों के लिए बड़ा झटका होगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का पूरा भूगोल ही बदल जाएगा।
केसरिया रंग में रंगा बंगाल, दशकों का इंतजार खत्म होने की ओर
पश्चिम बंगाल के चुनावी रुझान सबसे ज्यादा चौंकाने वाले हैं। आजादी के बाद यह पहला मौका होगा जब बीजेपी बंगाल में सरकार बनाने जा रही है। पिछले कई दशकों से इस राज्य में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश में जुटी बीजेपी के लिए यह जीत किसी ‘संजीवनी’ से कम नहीं है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) फिलहाल रेस में पिछड़ती दिख रही है। बंगाल की जीत बीजेपी के लिए महज एक राज्य की जीत नहीं, बल्कि उसके वैचारिक विजय की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है।
विपक्ष के किलों में सेंध: केजरीवाल और नीतीश के बाद अब स्टालिन-विजयन की बारी?
विपक्ष के बिखरने की पटकथा फरवरी 2025 में ही लिखी जाने लगी थी, जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और अरविंद केजरीवाल सत्ता से बाहर हुए। इसके बाद बिहार में एनडीए की जीत और फिर नीतीश कुमार के इस्तीफे ने गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों के कुनबे को छोटा कर दिया। अब ताजा झटके तमिलनाडु और केरल से लग रहे हैं। तमिलनाडु में पिछले 10 साल से राज कर रही डीएमके और एमके स्टालिन को अभिनेता थलापति विजय की नई पार्टी ‘टीवीके’ (TVK) कड़ी शिकस्त देती दिख रही है। वहीं, केरल में एलडीएफ की विदाई और पिनराई विजयन की हार लगभग तय मानी जा रही है।
राहुल गांधी का बढ़ेगा कद: क्या कांग्रेस बनेगी विपक्ष की इकलौती धुरी?
इन चुनाव नतीजों के बीच कांग्रेस के लिए राहत भरी खबर केरल से आ रही है, जहां वह सरकार बनाती दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी, स्टालिन और विजयन जैसे कद्दावर क्षेत्रीय नेताओं की हार के बाद विपक्ष में राहुल गांधी की स्वीकार्यता और बढ़ेगी। चूंकि क्षेत्रीय क्षत्रप अपनी सत्ता गंवा चुके होंगे, ऐसे में 2029 के आम चुनाव से पहले राहुल गांधी निर्विवाद रूप से विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर उभर सकते हैं।
दक्षिण से पूर्व तक बीजेपी का बढ़ता विजय रथ
बीजेपी का विजय रथ 2014 से जो शुरू हुआ था, वह 2026 में भी थमता नजर नहीं आ रहा है। बंगाल की जीत के साथ भारत के नक्शे पर केसरिया रंग का विस्तार और अधिक हो जाएगा। हालांकि, बीजेपी के हाथ में नया राज्य केवल बंगाल ही आता दिख रहा है, लेकिन विपक्ष के बड़े चेहरों का एक साथ चुनावी रेस से बाहर होना बीजेपी के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक जीत साबित हो रही है। आज शाम तक जब अंतिम नतीजे आएंगे, तो देश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी होगी।
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