Tuesday , 22 September 2026

Asian Games 2026: क्या जापान में फिर छिड़ेगा नकवी बनाम टीम इंडिया विवाद? अगर ACC चीफ ने बढ़ाया मेडल तो क्या करेगी भारतीय टीम

जापान में भव्य खेल महाकुंभ एशियन गेम्स 2026 की शुरुआत होने जा रही है। इस बार एशिया के 45 देशों के करीब 11 हजार शीर्ष एथलीट अलग-अलग प्रतिस्पर्धाओं में अपनी दावेदारी पेश करने पहुंच रहे हैं। भारत की ओर से भी लगभग 500 एथलीटों का मजबूत दल पोडियम फिनिश के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने को तैयार है। कई खेल स्पर्धाओं में भारत का पदक पक्का माना जा रहा है, जिसमें क्रिकेट का नाम सबसे आगे है। पिछले सत्र की ऐतिहासिक सफलता को दोहराते हुए इस बार भी भारत की पुरुष और महिला टीमों से गोल्ड मेडल जीतने की प्रबल उम्मीदें हैं। हालांकि, इन स्वर्णिम उम्मीदों के बीच एक बड़ा कूटनीतिक और खेल विवाद भी सुलगता दिख रहा है। खेल प्रेमियों के जेहन में सवाल तैर रहा है कि क्या जापान की धरती पर एक बार फिर टीम इंडिया और मोहसिन नकवी के बीच पुराना ड्रामा दोहराया जाएगा?

एशिया कप की तकरार क्या जापान तक पहुंचेगी

यह विवाद नया नहीं है। सितंबर 2025 में जब भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए एशिया कप का खिताब अपने नाम किया था, तब भारतीय खिलाड़ियों ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के पाकिस्तानी अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था। नतीजा यह हुआ कि वह ट्रॉफी भारतीय ड्रेसिंग रूम के बजाय ACC मुख्यालय भेज दी गई। ठीक इसी तरह का घटनाक्रम इस महीने तब देखने को मिला जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम एशिया कप चैंपियन बनी। महिला टीम ने भी नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से परहेज किया और वह ट्रॉफी भी सीधे ACC के दफ्तर पहुंच गई। अब जब जापान में एशियन गेम्स का मंच सज चुका है, तो क्रिकेट जगत में वही सवाल फिर गूंज रहा है।

नकवी को मेडल वितरण की जिम्मेदारी मिली तो क्या होगा

एशियन गेम्स में क्रिकेट मुकाबलों के आयोजन और तकनीकी समन्वय में एशियन क्रिकेट काउंसिल की सीधी भागीदारी रहती है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि पोडियम सेरेमनी के दौरान एसीसी चीफ मोहसिन नकवी को बतौर मुख्य अतिथि मेडल पहनाने के लिए आमंत्रित कर दिया जाए। सवाल उठता है कि यदि भारतीय टीमें गोल्ड या सिल्वर मेडल जीतती हैं और नकवी मंच पर पदक पहनाने आते हैं, तो क्या टीम इंडिया एशिया कप की तरह यहां भी मेडल लेने से पीछे हट जाएगी? इस पूरे मामले पर जब बीसीसीआई सचिव देवजित सैकिया से बातचीत की गई, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब न देते हुए सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय बोर्ड और खिलाड़ियों का पूरा फोकस केवल पोडियम तक का सफर तय करने पर है। सैकिया के मुताबिक, जो स्थिति अभी सामने आई ही नहीं है, उस पर पहले से बयानबाजी करना ठीक नहीं होगा और वक्त आने पर हालात को देखकर ही कोई उचित कदम उठाया जाएगा।

मेडल सेरेमनी का प्रोटोकॉल और आयोजकों के अधिकार

एशियन गेम्स के स्थापित नियमों के तहत मेडल वितरण का मुख्य विशेषाधिकार एशियाई ओलंपिक कमेटी (OCA) के अध्यक्ष के पास होता है। अमूमन ओसीए अध्यक्ष विभिन्न खेल स्पर्धाओं के लिए यह दायित्व संबंधित खेल की अंतरराष्ट्रीय या एशियाई महासंघों के प्रमुखों को सौंपते हैं। क्रिकेट के संदर्भ में यह जिम्मा प्रोटोकॉल के तहत मोहसिन नकवी की झोली में जा सकता है। जानकारों का मानना है कि भारतीय खेमे के लिए राहत की स्थिति तभी बन सकती है जब ओसीए यह जिम्मेदारी आईसीसी के चेयरमैन जय शाह या किसी अन्य तटस्थ अधिकारी को सौंप दे। हालांकि, खेल सूत्रों का कहना है कि बीसीसीआई या भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) प्रोटोकॉल के स्तर पर ओसीए के सामने ऐसी कोई सीधी शर्त या औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं करा सकते, क्योंकि पुरस्कार वितरण का अंतिम निर्णय पूरी तरह एशियाई ओलंपिक कमेटी के अधिकार क्षेत्र में आता है।

मेडल ठुकराना भारत के लिए क्यों नहीं होगा आसान

एशिया कप की ट्रॉफी न लेना एक द्विपक्षीय या क्रिकेट-विशिष्ट मंच का फैसला हो सकता था, लेकिन ओलंपिक और एशियन गेम्स जैसे बहु-खेल आयोजनों की नियमावली बेहद सख्त और अनुशासनबद्ध होती है। मेडल सेरेमनी के दौरान किसी भी प्रकार का राजनीतिक संकेत, व्यक्तिगत विरोध या पोडियम बहिष्कार अंतरराष्ट्रीय खेल संहिताओं का सीधा उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मंचों पर पदक, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान की गरिमा का पालन अनिवार्य होता है। इसका बड़ा उदाहरण 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में देखने को मिला था, जब भारतीय महिला मुक्केबाज सरिता देवी ने विवादित फैसले के विरोध में पोडियम पर ब्रॉन्ज मेडल गले में पहनने से इनकार कर दिया था और उसे सिल्वर मेडलिस्ट के गले में डाल दिया था। इस कदम के बाद ओलंपिक काउंसिल और अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग संघ ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरिता देवी पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया था और कोचों को भी सस्पेंड कर दिया था, जिसके बाद सरिता को औपचारिक माफी मांगते हुए मेडल स्वीकार करना पड़ा था। ऐसे में टीम इंडिया के सामने इस बार चुनौती केवल खेल की नहीं, बल्कि प्रोटोकॉल और गरिमा की भी होगी।

 

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