Saturday , 17 October 2026

अंकिता भंडारी हत्याकांड: दिल्ली में माता-पिता के आंदोलन के बाद गरमाया मामला, उत्तराखंड पुलिस ने गिनाई त्वरित कार्रवाई और मजबूत पैरवी की उपलब्धियां

दिल्ली में अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा न्याय की मांग को लेकर किए गए आंदोलन और उन्हें पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद इस बहुचर्चित मामले ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। इस घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड पुलिस ने सामने आकर अब तक की न्यायिक कार्रवाई, जांच प्रक्रिया और अदालत में की गई ठोस पैरवी का पूरा ब्योरा साझा किया है। एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. वी मुरुगेशन ने मीडिया को मामले से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं और जारी सीबीआई जांच की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया।

24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी और 88 दिन में पूरी हुई एसआईटी जांच

एडीजी कानून व्यवस्था डॉ. वी मुरुगेशन ने बताया कि वर्ष 2022 में ऋषिकेश के समीप स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या की खबर सामने आते ही पुलिस प्रशासन ने त्वरित एक्शन लिया था। घटना सामने आने के महज 24 घंटे के भीतर ही पुलिस ने तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया था।

500 पन्नों की चार्जशीट और महिला आईपीएस के नेतृत्व में साक्ष्य संकलन

मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तुरंत एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। इस एसआईटी की कमान डीआईजी स्तर की एक वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई थी। एसआईटी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य जुटाए। साथ ही चश्मदीदों और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए गए। फॉरेंसिक रिपोर्ट्स और कड़े साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर एसआईटी ने रिकॉर्ड 88 दिनों के भीतर जांच मुकम्मल कर अदालत में लगभग 500 पृष्ठों का विस्तृत आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया।

तीनों दोषियों को उम्रकैद, वर्तमान में जारी है सीबीआई जांच

पुलिस द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किए गए पुख्ता साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी के दम पर 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। वर्तमान में तीनों दोषी जेल में अपनी सजा काट रहे हैं। इसके साथ ही एडीजी ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार की संस्तुति पर केंद्र की मंजूरी के बाद प्रकरण की सीबीआई जांच भी जारी है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में त्वरित गिरफ्तारी, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और अदालत में मजबूत पैरवी सबसे अहम रही।

 

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