Thursday , 8 October 2026

बिहार-झारखंड सीमा पर जमीन खोदकर निकाला हथियारों का जखीरा: गयाजी के जंगलों से 9mm कार्बाइन, राइफल और 92 कारतूस बरामद, सुरक्षाबल अलर्ट

बिहार-झारखंड सीमा से सटे गयाजी जिले के घने जंगलों में सुरक्षाबलों ने जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए हथियारों के एक बड़े जखीरे को बरामद कर बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। ऊपर से शांत और सामान्य नजर आ रहे जंगली इलाके में जमीन के भीतर प्लास्टिक के बोरों में लपेटकर आधुनिक हथियार और गोला-बारूद दबाकर रखे गए थे। धनगांई थाना क्षेत्र के अंतर्गत तिलेटाड़ से हिसीर जाने वाले रास्ते पर चलाए गए संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने 9 एमएम कार्बाइन, दो मैगजीन, देशी राइफल, कट्टा, पिस्तौल, वॉकी-टॉकी और कुल 92 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।

संयुक्त सर्च ऑपरेशन में खुली जमीन में दबे जखीरे की पोल

बुधवार को सशस्त्र सीमा बल (SSB) और गयाजी जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने बिहार-झारखंड सीमावर्ती जंगलों में सघन तलाशी अभियान शुरू किया था। भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम और घने इस जंगली इलाके में गश्त के दौरान जवानों को तिलेटाड़-हिसीर मार्ग पर जमीन के एक हिस्से की मिट्टी पर कुछ संदिग्ध हलचल का अंदेशा हुआ।

संदेह गहराने पर सुरक्षाबलों ने उस स्थान की घेराबंदी कर सावधानीपूर्वक खुदाई शुरू करवाई। कुछ ही फीट नीचे प्लास्टिक में मजबूती से पैक किया हुआ बड़ा पार्सल बरामद हुआ। जैसे ही पैकेट खोला गया, उसमें घातक हथियार, भरी हुई मैगजीन और भारी मात्रा में कारतूस देखकर जवान सतर्क हो गए। इसके बाद खोजी दलों ने पूरे इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन और तेज कर दिया।

9 एमएम कार्बाइन से लेकर भरमार राइफल और वॉकी-टॉकी बरामद

सर्च ऑपरेशन के दौरान बरामद हथियारों की सूची इस प्रकार है:

  • घातक हथियार: एक 9 एमएम कार्बाइन, उसकी 2 मैगजीन, एक देशी भरमार राइफल, एक देशी कट्टा और एक पिस्तौल।

  • कारतूस का जखीरा: 9 एमएम के 79 जिंदा कारतूस और 7.62 एमएम के 13 कारतूस (कुल 92 कारतूस)।

  • संचार उपकरण: एक वायरलेस वॉकी-टॉकी सेट, जिसका इस्तेमाल आपसी संपर्क साधने के लिए किया जाता था।

इतनी बड़ी संख्या में घातक हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी को सुरक्षा एजेंसियां बेहद संवेदनशील मान रही हैं।

नक्सलियों के गुप्त डंप होने का अंदेशा, बैकवर्ड लिंकेज की जांच तेज

इस जब्ती के बाद जांच एजेंसियां इस बात की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं कि आखिर जमीन के नीचे यह शस्त्रागार किसने और कब डंप किया था। प्राथमिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि यह हथियार प्रतिबंधित नक्सली संगठनों द्वारा किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के मकसद से सुरक्षित ठिकाने (आर्म्स डंप) के तौर पर छिपाकर रखे गए थे।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इलाके में सक्रिय पुराने नक्सली नेटवर्क, मददगारों और संदिग्धों का ब्योरा खंगाल रही हैं। यह भी जांच की जा रही है कि वॉकी-टॉकी किस फ्रीक्वेंसी पर सेट था और हथियार किस रूट से जंगल तक पहुंचाए गए थे।

एसएसबी और जिला पुलिस के समन्वय से मिली बड़ी कामयाबी

इस सफल नक्सल विरोधी अभियान का नेतृत्व एसएसबी के उप कमांडेंट रवि भूषण ने किया। कार्रवाई में धनगांई थानाध्यक्ष श्रवण राम और एसएसबी 29वीं वाहिनी के धनगांई कैंप के सहायक कमांडेंट सनोज कुमार की अहम भूमिका रही। बिहार-झारखंड सीमावर्ती इलाके से जमीन खोदकर हथियारों की इस बरामदगी को नक्सल विरोधी अभियान के लिहाज से बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।

 

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