
देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी सियासी खींचतान के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची को नए सिरे से अपडेट करने के मकसद से विशेष संक्षिप्त संशोधन (SSR) कार्यक्रम का आधिकारिक बिगुल फूंक दिया है। इस राष्ट्रव्यापी कवायद का मुख्य उद्देश्य सूची में नए पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज करना, फर्जी या गलत प्रविष्टियों को हटाना और वोटर लिस्ट को त्रुटिरहित बनाना है।
SIR से कितना अलग है SSR का यह पूरा अभियान
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि विशेष संक्षिप्त संशोधन (SSR) और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की कार्यप्रणाली और दायरे में बुनियादी अंतर है। जहां SIR में जमीनी स्तर पर व्यापक पड़ताल होती है, वहीं SSR के तहत जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत सूचियों को संक्षेप में दुरुस्त किया जाता है। आयोग का पूरा जोर इस बार उन वर्गों को मतदाता सूची से जोड़ने पर है, जिनका प्रतिनिधित्व अब तक कम रहा है।
घर-घर सर्वे नहीं, इस बार इन 20 अहम बिंदुओं पर टिकी है आयोग की रणनीति
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जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के नियमों के तहत शुरू हुए इस अभियान के लिए 1 जनवरी 2027 को आधिकारिक अर्हता तिथि निर्धारित किया गया है।
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इस बार बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाताओं के घर-घर जाकर सर्वे या भौतिक गणना नहीं करेंगे, क्योंकि यह संक्षिप्त संशोधन की श्रेणी में आता है।
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युवाओं के लिए अग्रिम आवेदन की विशेष सुविधा शुरू की गई है। 1 जनवरी 2027 को उम्र पूरी करने वाले युवाओं के अलावा 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को वयस्क होने वाले नागरिक भी पहले से अपना दावा प्रस्तुत कर सकते हैं।
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मतदाताओं की सहूलियत को देखते हुए फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर जरूरत पड़ने पर नए पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे, जिसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारी राजनीतिक दलों की राय लेंगे।
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प्रवासी मजदूरों, कमजोर वर्गों और हाशिए पर खड़े नागरिकों के सुगम पंजीकरण के लिए जिला और विधानसभा स्तर पर विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किए जा रहे हैं।
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नाम जोड़ने और गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए तय तिथियों पर विशेष कैंप और अभियान चलाए जाएंगे।
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पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) हर हफ्ते राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर दावों और आपत्तियों की छपी हुई सूची सौंपेंगे।
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ड्राफ्ट मतदाता सूची छपने से ठीक पहले जोड़े गए, हटाए गए और सुधारे गए नामों के पूरक दस्तावेज राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
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सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को ड्राफ्ट व फाइनल मतदाता सूची की हार्ड कॉपी के साथ-साथ आसानी से पढ़ने योग्य डिजिटल पीडीएफ फाइल भी दी जाएगी।
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चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों को अंतिम मतदाता सूची और सॉफ्टवेयर से बनी पूरक सूची की एक प्रतिलिपि चुनाव आयोग की ओर से पूरी तरह नि:शुल्क मुहैया कराई जाएगी।
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फर्जी आपत्तियों पर नकेल कसने के लिए आयोग ने 9 अक्टूबर 2026 के पत्र संख्या 23/Inst/2026-ERS के जरिए नाम काटने या आपत्ति दर्ज कराने वाले फॉर्म-7 को जमा करने की सीमा तय कर दी है।
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चुनाव के समय रिटर्निंग ऑफिसर या जिला निर्वाचन अधिकारी प्रत्याशियों की मांग पर अल्फाबेटिकल क्रम में व्यवस्थित मतदाता सूची की पढ़ने योग्य पीडीएफ पेनड्राइव या स्टोरेज डिवाइस में उपलब्ध कराएंगे।
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नया नाम जुड़ते ही मतदाता ECINET ऐप के जरिए डिजिटल ई-एपिक (e-EPIC) डाउनलोड कर सकेंगे, जिसका अलर्ट एसएमएस से मिलेगा। इसके अलावा भौतिक वोटर कार्ड डाक विभाग की स्पीड पोस्ट या बीएलओ के जरिए सीधे पते पर भेजा जाएगा।
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प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी रोकने के लिए ईआरओ और एईआरओ के आदेशों की गहन जांच डीईओ, रोल ऑब्जर्वर और सीईओ स्तर पर की जाएगी।
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मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और जिला स्तर के अधिकारी राजनीतिक दलों के साथ सतत समन्वय बनाकर कार्यक्रम और आपत्तियों का ब्योरा साझा करते रहेंगे।
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फील्ड स्तर पर बीएलओ अपने क्षेत्र के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के साथ बैठक करके उन्हें एसएसआर के पूरे कैलेंडर और तकनीकी प्रक्रियाओं से रूबरू कराएंगे।
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दोनों स्तरों पर पारदर्शिता के लिए बीएलओ और राजनीतिक दलों के बीएलए मिलकर ड्राफ्ट सूची का संयुक्त मिलान करेंगे ताकि जरूरी संशोधन छूट न जाएं।
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यदि बीएलए किसी नागरिक का आवेदन जमा करते हैं, तो उन्हें अनिवार्य रूप से लिखित घोषणापत्र देना होगा कि उन्होंने फॉर्म में भरे गए विवरणों की स्वयं मौके पर पुष्टि की है।
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महिलाओं, थर्ड जेंडर, अनुसूचित जनजाति, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG), दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों को जोड़ने के लिए खास टारगेटेड ड्राइव चलाई जाएगी।
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समूची प्रक्रिया के दौरान सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों का रख-रखाव और सुरक्षा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 32 के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएगी।
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