
त्योहारी सीजन की खुशियों के बीच आम जनता की जेब पर महंगाई का भारी बोझ पड़ने वाला है। न केवल भारत बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने महंगाई एक बार फिर सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के ताजा फैसलों में यह चिंता साफ तौर पर दिखाई दी है। केंद्रीय बैंक के ताजा आकलन के अनुसार, वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में खुदरा मुद्रास्फीति 6 फीसदी के उच्च स्तर तक पहुंच सकती है। यही वह समय है जब देश में दिवाली, छठ और शादियों का फेस्टिव माहौल होता है। त्योहारी मांग के बीच कच्चे तेल की उछलती कीमतें, अल नीनो का असर और कमजोर होता रुपया आम आदमी की रसोई के बजट को बिगाड़ सकते हैं। यदि यही रुख जारी रहा, तो दिसंबर की आगामी एमपीसी बैठक में एक और ब्याज दर वृद्धि (Rate Hike) देखने को मिल सकती है, जिससे लोन की ईएमआई और महंगी हो जाएगी।
RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर किया 5.2%
रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित औसत महंगाई के अनुमान को 5.0 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है। केंद्रीय बैंक का यह संशोधित अनुमान ऐसे समय में आया है जब खुदरा महंगाई दर लगातार केंद्रीय बैंक के 4 फीसदी के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को नीतिगत घोषणा करते हुए बताया कि कीमतों का दबाव अब व्यापक हो रहा है। आरबीआई के डिफ्यूजन इंडेक्स के अनुसार, अगस्त महीने में 4 फीसदी से अधिक महंगाई वाली वस्तुओं का वेटेड शेयर बढ़कर लगभग 37 फीसदी तक पहुंच गया है। गवर्नर के अनुसार, निकट भविष्य में आपूर्ति से जुड़े अवरोध बने रहने के संकेत हैं।
केंद्रीय बैंक ने तिमाही-वार महंगाई अनुमान को इस प्रकार संशोधित किया है:
-
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2): 4.9 फीसदी
-
तीसरी तिमाही (Q3 – फेस्टिव तिमाही): 6.0 फीसदी (आरबीआई की ऊपरी सहनशीलता सीमा के बराबर)
-
चौथी तिमाही (Q4): 5.7 फीसदी
-
वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही (Q1): 5.6 फीसदी
इससे पहले अगस्त की समीक्षा में वित्त वर्ष 2027 के लिए यह अनुमान 5.1 फीसदी और पूर्व समीक्षा में 4.6 फीसदी आंका गया था, जिसमें अब व्यापक बढ़ोतरी की गई है।
क्यों बदला RBI का नजरिया? ये 4 प्रमुख वजहें बनीं विलेन
वर्ष 2025 में ब्याज दरों में की गई कटौतियों के बाद से आर्थिक परिदृश्य में कई अप्रत्याशित वैश्विक और घरेलू बदलाव आए हैं। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी पर पहुंच गई, जो लगातार तीसरा ऐसा महीना था जब यह 4 फीसदी के तय लक्ष्य से ऊपर रही। महंगाई अनुमान बढ़ाने के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण रहे हैं:
-
100 डॉलर के पार कच्चा तेल: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव गहराने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुके हैं। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। महंगे कच्चे तेल से ट्रांसपोर्टेशन, फ्रेट और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर पड़ता है।
-
कमजोर होता रुपया: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इस साल भारतीय रुपया करीब 6 फीसदी तक टूटा है। कमजोर मुद्रा के चलते कच्चे तेल, खाद्य तेल, फर्टिलाइजर और इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों का आयात भारत के लिए काफी महंगा हो जाता है, जिससे देश में ‘आयातित महंगाई’ (Imported Inflation) का खतरा बढ़ जाता है।
-
अल नीनो और कमजोर मानसून: भारत में अल नीनो की सक्रियता का सीधा असर मानसूनी बारिश पर पड़ा है। असमान और कम मानसूनी बारिश से खरीफ फसलों के उत्पादन और सब्जियों की आवक पर विपरीत असर पड़ा है। खाद्य उत्पादों के उत्पादन में गिरावट से सीधे तौर पर खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) भड़कने की आशंका है।
-
इनपुट कॉस्ट का दबाव: ऊर्जा और कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इनपुट कॉस्ट बढ़ गई है, जिसे कंपनियां अंततः खुदरा ग्राहकों पर डाल रही हैं।
अर्थशास्त्रियों के अनुमान पर खरा उतरा केंद्रीय बैंक का कदम
बाजार और अर्थशास्त्रियों को पहले से ही इस बात की आशंका थी कि अक्टूबर की बैठक में आरबीआई अपने रुख को सख्त करेगा। रॉयटर्स और अन्य वित्तीय एजेंसियों के सर्वेक्षण में शामिल 21 अर्थशास्त्रियों ने पहले ही अनुमान जताया था कि रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी किया जाएगा।
अगस्त में जहां एमपीसी ने न्यूट्रल रुख अपनाया था, वहीं ब्रेंट क्रूड के 85 डॉलर के आधार अनुमान से बहुत ऊपर जाने और खुदरा महंगाई के 4.82 फीसदी पर पहुंचने के बाद दरें बढ़ाना अनिवार्य माना जा रहा था। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने दिसंबर तिमाही में महंगाई 6.1 फीसदी और बंधन एएमसी ने 6 फीसदी से ऊपर रहने की संभावना जताई थी। वहीं एसबीआई रिसर्च ने भी अनुमान लगाया था कि अक्टूबर-नवंबर में महंगाई दर 6.5 फीसदी का स्तर छू सकती है।
वैश्विक स्तर पर भी केंद्रीय बैंकों ने कड़ा किया रुख
महंगाई पर लगाम कसने के लिए केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंक सख्त मौद्रिक नीतियां अपना रहे हैं:
-
यूएस फेडरल रिजर्व: फेडरल रिजर्व ने सितंबर में अपनी बेंचमार्क नीतिगत दरों को 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाकर 3.75%–4.00% के दायरे में कर दिया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि महंगाई को 2 फीसदी के लक्ष्य तक लाने के लिए दरों को ऊंचा बनाए रखना जरूरी है।
-
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB): ईसीबी ने भी मिडिल ईस्ट संकट और ऊर्जा संकट के चलते अपनी प्रमुख ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की है। यूरोप में 2026 के लिए महंगाई अनुमान बढ़ाकर 3 फीसदी कर दिया गया है।
-
बैंक ऑफ जापान (BOJ): दशकों तक शून्य या नकारात्मक ब्याज दरों पर चलने वाले बैंक ऑफ जापान ने अपनी पॉलिसी रेट को 31 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। गवर्नर काजुओ उएदा ने कमजोर येन और कच्चे माल की बढ़ती लागत को देखते हुए दरों में और सख्ती के संकेत दिए हैं।
voice of india