दिल्ली के ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए हंगामे और महिला पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता के गंभीर आरोपों के बीच दिल्ली पुलिस ने मीडिया कर्मियों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। पुलिस द्वारा जारी किए गए इन ताजा निर्देशों में फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को अपनी पहचान स्पष्ट रखने, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने और कानून-व्यवस्था की कार्रवाई के वक्त उचित दूरी बनाए रखने की सख्त हिदायत दी गई है।
क्यों जारी करनी पड़ी नई गाइडलाइंस?
यह एडवाइजरी उस घटनाक्रम के बाद सामने आई है जब बीते 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही तीन महिला पत्रकारों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर गंभीर दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। इसमें एसीपी स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम भी सामने आया था। फिलहाल इस संवेदनशील मामले की विस्तृत जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है, जो मौके के सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को खंगाल रही है। पुलिस का कहना है कि स्टोरी कवर करना जितना अहम है, उतना ही यह भी मायने रखता है कि कवरेज का तरीका सुरक्षित और व्यवस्थित हो।
पत्रकारों के लिए दिल्ली पुलिस के 4 मुख्य निर्देश
फील्ड रिपोर्टिंग और लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति को संतुलित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने 4 प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया है:
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वैध पहचान पत्र अनिवार्य: प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पत्रकारों के पास उनके मीडिया संस्थान का अधिकृत आईडी कार्ड होना आवश्यक है। इसके साथ ही पीआईबी (PIB) या डीआईपी (DIP) एक्रिडिटेशन कार्ड साथ रखने की सलाह दी गई है, जिससे ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों को मीडियाकर्मियों की पहचान करने में सहूलियत हो।
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आईडी कार्ड साफ दिखना चाहिए: केवल जेब या बैग में प्रेस कार्ड रखना काफी नहीं होगा। रिपोर्टरों और कैमरापर्सन्स को इसे गले में या स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने को कहा गया है, ताकि उग्र भीड़ और पुलिस बल के बीच पत्रकारों की अलग पहचान तुरंत हो सके।
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पुलिस ऑपरेशन में बाधा न बने रिपोर्टिंग: दिशा-निर्देशों में साफ किया गया है कि ग्राउंड रिपोर्टिंग की वजह से सुरक्षाबलों की मूवमेंट या कानून-व्यवस्था नियंत्रण के काम में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।
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तनाव बढ़ने पर बनाएं सुरक्षित दूरी: टकराव या लाठीचार्ज जैसी तनावपूर्ण स्थितियों के दौरान पत्रकारों को सुरक्षित दूरी से कवरेज करने की सलाह दी गई है। मीडिया कर्मियों को ऐसी जगह खड़े होने को कहा गया है, जहां वे प्रदर्शनकारियों की भीड़ से पूरी तरह अलग नजर आएं।
पुलिसकर्मियों के नेम टैग विवाद पर डीसीपी की सफाई
इस पूरे घटनाक्रम के बीच 5 अक्टूबर को भी जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों की वर्दी पर नेम टैग न होने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस पर नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सचिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया था। उन्होंने बताया कि ड्यूटी पर तैनात सभी कर्मियों के लिए नेम टैग लगाना अनिवार्य है और भीड़ को नियंत्रित करने की धक्का-मुक्की के दौरान कुछ कर्मियों के बैच टूटकर गिर गए होंगे।
क्या बिना PIB या DIP कार्ड के कवरेज पर रोक है?
गाइडलाइंस के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या केवल मान्यता प्राप्त पत्रकार ही प्रदर्शन कवर कर पाएंगे। जानकारों के मुताबिक, ऐसा कोई कानूनी नियम नहीं है जो गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों को सार्वजनिक स्थलों पर रिपोर्टिंग करने से रोकता हो।
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PIB कार्ड: केंद्र सरकार के पत्र सूचना कार्यालय द्वारा जारी किया जाता है, जो केंद्रीय मंत्रालयों और आधिकारिक कार्यक्रमों तक पहुंच प्रदान करता है।
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DIP कार्ड: दिल्ली सरकार के सूचना एवं प्रचार विभाग द्वारा जारी राज्य स्तरीय मान्यता कार्ड है।
दिल्ली पुलिस द्वारा इन कार्ड्स का उल्लेख केवल इसलिए किया गया है ताकि अत्यधिक भीड़ और अफरा-तफरी के माहौल में प्रामाणिक मीडियाकर्मियों की पहचान तुरंत की जा सके और किसी भी तरह के टकराव या गलतफहमी से बचा जा सके।
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