Tuesday , 6 October 2026

ब्रिटेन से अमेरिकी B-1 बॉम्बर विमानों की अचानक वापसी, ट्रंप बोले- ‘ईरान से खतरे की थी भनक, इसलिए उठाया कदम’

अमेरिका ने ब्रिटेन स्थित रणनीतिक एयरबेस आरएएफ फेयरफोर्ड (RAF Fairford) से अपने सभी शक्तिशाली बी-1 बॉम्बर (B-1 Bomber) विमानों को अचानक वापस बुला लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कदम की आधिकारिक पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि यह फैसला ईरान से जुड़े संभावित खतरे को देखते हुए लिया गया है। उन्होंने साफ कहा कि जब एयरबेस और विमानों पर आतंकी खतरे का अंदेशा था, तो लड़ाकू बेड़े को वहां जोखिम में छोड़ना कतई सही नहीं था।

ट्रंप ने कहा- ‘धमकी मिलने पर जोखिम लेना समझदारी नहीं’

आरएएफ फेयरफोर्ड से बॉम्बर विमानों की स्वदेश वापसी पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दो टूक शब्दों में रणनीति स्पष्ट की। ट्रंप ने कहा कि प्रशासन को पहले ही इस बात का आभास था कि वहां खतरा उत्पन्न हो सकता है, इसलिए सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने तर्क दिया कि विमानों को दूसरे सुरक्षित सैन्य ठिकाने पर स्थानांतरित करने में बहुत कम खर्च आता है, ऐसे में अगर कोई खतरा या धमकी सामने आती है तो विमानों को वहां से हटाना ही सबसे उपयुक्त कदम है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि धमकी देने वालों की पहचान के बारे में अमेरिका को जानकारी है और जब उनसे पूछा गया कि क्या इन धमकियों के तार तेहरान से जुड़े हैं, तो उन्होंने संकेत दिया कि निश्चित रूप से उनका संबंध ईरान से हो सकता है।

संदिग्ध आतंकी साजिश की जांच के बाद पेंटागन का फैसला

ब्रिटेन के इस प्रमुख एयरबेस का इस्तेमाल हाल ही में ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के दौरान अमेरिकी सेना द्वारा किया गया था। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस पर संभावित आतंकी हमले की जांच शुरू होने के तुरंत बाद अमेरिकी वायुसेना ने तैनात बी-1 बॉम्बर विमानों को इंग्लैंड से सीधे अमेरिका स्थित उनके मूल सैन्य ठिकानों पर रवाना कर दिया। इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में पिछले सप्ताह लंदन से एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक को आतंकी हमले की साजिश रचने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले सितंबर में भी इसी एयरबेस पर सुरक्षा में चूक की एक घटना सामने आई थी, जिसके बाद छह संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

जेडी वेंस ने ईरान को घेरा, मार्को रुबियो ने बताया नियमित प्रक्रिया

इस पूरे प्रकरण पर अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष नेताओं के बयानों में अलग-अलग पहलू सामने आए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस फैसले को एहतियाती कदम बताते हुए ईरान के इतिहास पर सवाल उठाए। वेंस ने कहा कि ईरानी हुकूमत दशकों से आतंकी गतिविधियों और अमेरिका विरोधी अभियानों में शामिल रही है, इसी कारण अत्यधिक सतर्कता बरती जा रही है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे संदिग्ध ईरानी साजिश से सीधे जोड़ने से इनकार करते हुए कहा कि पेंटागन अपनी रणनीतिक जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर सैन्य संसाधनों और विमानों को विभिन्न ठिकानों पर तैनात करता रहता है।

ईरानी विदेश मंत्री का पलटवार, ब्रिटेन के आरोपों पर उठाए सवाल

दूसरी तरफ, ब्रिटेन और अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर ब्रिटेन के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि विदेशी साजिशों के नाम पर कथित संदिग्धों को गिरफ्तार कर बाद में छोड़ देना ही दावों की पोल खोल देता है। उन्होंने ब्रिटिश प्रशासन को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे गलत दिशा में जांच कर रहे हैं। गौरतलब है कि ब्रिटेन की ओर से इस बात के संकेत दिए गए थे कि आरएएफ फेयरफोर्ड सुरक्षा घटनाक्रम में ईरानी संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं, जिसे ईरान ने पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया है।

 

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