Tuesday , 6 October 2026

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर लगा ‘ब्रेक’? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- बातचीत ऐसे मोड़ पर जहां अब….

नई दिल्ली। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर चल रही बातचीत अब एक बेहद जटिल और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच नए समझौते को लेकर लंबे समय से खींचतान जारी है, लेकिन अब एक-दूसरे से अतिरिक्त रियायतें हासिल करना लगभग नामुमकिन सा दिखने लगा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पूरे गतिरोध पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि वार्ता अब ऐसे स्तर पर पहुंच चुकी है, जहां से आगे किसी भी पक्ष के लिए कुछ और देना या लेना बहुत कठिन होगा।

बातचीत पहुंची ‘प्लैटो’ स्तर पर: निर्मला सीतारमण म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान बातचीत करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस गतिरोध पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक की वार्ताएं बेहद सख्त रही हैं और दोनों पक्षों ने अपने राष्ट्रीय व आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए चर्चा आगे बढ़ाई है। सीतारमण ने कहा कि वह यह मानना चाहेंगी कि दोनों देश बातचीत में अब एक ‘प्लैटो’ (Plateau) यानी ठहराव के स्तर पर पहुंच चुके हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि समझौते को अगले मुकाम तक ले जाने के लिए दोनों पक्षों को अपनी वर्तमान तय सीमाओं से आगे बढ़ना पड़ेगा, जो कि मौजूदा आर्थिक और नीतिगत परिप्रेक्ष्य में कतई आसान नहीं है।

2025 से जारी है 500 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य की कवायद भारत और अमेरिका के बीच इस ट्रेड डील को लेकर गंभीर संवाद की शुरुआत फरवरी 2025 में हुई थी। वॉशिंगटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय शिखर वार्ता में दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक आपसी कारोबार को 500 अरब डॉलर के पार पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया था। इसके तहत एक व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में औपचारिक बातचीत शुरू करने पर सहमति बनी थी।

एक साल से अंतरिम समझौते पर मंथन, फिर भी नहीं बनी बात किसी बड़े व्यापक समझौते से पहले एक अंतरिम समझौते (Interim Trade Agreement) को लेकर दोनों देश एक साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। फरवरी 2026 में दोनों पक्षों ने इस अंतरिम समझौते के लिए एक बुनियादी रूपरेखा की घोषणा भी की थी। इसके साथ ही यह साफ कर दिया गया था कि समग्र समझौते के लिए आगे और दौर की वार्ताओं की जरूरत पड़ेगी। पूरे साल संवाद का सिलसिला जारी रहने के बावजूद अंतिम सहमति नहीं बन पाई। हाल ही में अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने 1 अक्टूबर को स्पष्ट किया था कि बातचीत लगातार जारी है, लेकिन डील फिलहाल अंतिम मुकाम के करीब नहीं पहुंची है।

टैरिफ और मार्केट एक्सेस पर फंसा है पेंच वर्तमान वार्ताओं में सबसे बड़ा रोड़ा टैरिफ (आयात शुल्क), दोनों देशों के बाजारों तक आसान पहुंच (Market Access) और बढ़ते व्यापार असंतुलन को लेकर अटका हुआ है। यह मुद्दा केवल सामान्य आयात शुल्क तक सीमित न रहकर गहरे आर्थिक और वाणिज्यिक हितों से जुड़ चुका है। इसी पेंच को सुलझाने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर रहे, जहां उन्होंने अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने के लिए गहन चर्चाएं कीं।

व्यापार घाटा पाटने के लिए टैरिफ बढ़ाने के अमेरिकी रुख पर सवाल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात को रेखांकित किया कि मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार में भारत व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) की स्थिति में है, जबकि अमेरिका अपने पुराने घाटे की भरपाई करने और इस व्यापारिक अंतर को घटाने का दबाव बना रहा है। सीतारमण ने व्यापार घाटे को कम करने के लिए अमेरिका द्वारा बार-बार आयात शुल्क बढ़ाने की नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने तर्क दिया कि व्यापार असंतुलन जैसे मसले केवल भारी टैक्स या टैरिफ लगाने से नहीं सुलझते। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बहुत बड़ा है, लेकिन इसे सिर्फ अत्यधिक टैरिफ लगाकर नहीं सुधारा जा सकता; इसके लिए संतुलित संवाद, आपसी समझ और लेन-देन का व्यावहारिक रास्ता ही अपनाना होता है।

 

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