नई दिल्ली। स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1ए की आपूर्ति में हो रही लगातार देरी पर भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तेजस विमानों को बेड़े में शामिल करने में विलंब वायुसेना की परिचालन क्षमता के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो रहा है। वायुसेना दिवस से पहले आयोजित सालाना संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत वायु शक्ति की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है, जबकि लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रन की संख्या लगातार घटती जा रही है। यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब पड़ोसी देश पाकिस्तान को चीन से पांचवीं पीढ़ी के उन्नत लड़ाकू विमान मिलने की चर्चाएं तेज हैं।
हर साल चाहिए 36 से 40 फाइटर जेट, तेजी से घट रही स्क्वाड्रन क्षमता
वायुसेना प्रमुख ने वायुसेना की वर्तमान स्थिति का आकलन साझा करते हुए कहा कि लड़ाकू बेड़े की ताकत को बनाए रखने और पुराने पड़ रहे विमानों की भरपाई के लिए इंडियन एयरफोर्स को अगले कुछ वर्षों तक सालाना करीब 36 से 40 नए फाइटर जेट शामिल करने की सख्त दरकार है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वायुसेना के लिए स्वीकृत फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या 42 तय है, लेकिन मौजूदा समय में यह संख्या सिमटकर महज 29 रह गई है। इस खालीपन को भरने के लिए स्वदेशी रूप से निर्मित तेजस मार्क-1ए और बहु-उद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एमआरएफए) परियोजना के तहत नए विमानों के आगमन पर काफी उम्मीदें टिकी हैं।
‘इससे हमें नुकसान होगा’: HAL की डिलीवरी पर एयर चीफ की दो टूक
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा तेजस मार्क-1ए की आपूर्ति समय पर न कर पाने को लेकर पूछे गए सवाल पर एयर चीफ मार्शल ने बेबाकी से जवाब देते हुए कहा कि इससे वायुसेना को सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2021 में करीब 48 हजार करोड़ रुपये के सौदे के तहत वायुसेना के लिए 83 तेजस एमके-1ए विमानों का ऑर्डर दिया था। अनुबंध के अनुसार, इन विमानों की पहली खेप मार्च 2024 तक वायुसेना को मिल जानी चाहिए थी, लेकिन निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बावजूद वायुसेना को अब तक एक भी विमान नहीं सौंपा गया है। इसके अलावा, मंत्रालय ने पिछले वर्ष सितंबर में 62,370 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से अतिरिक्त 97 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी थी।
114 राफेल की खरीद प्रक्रिया जारी, इसी वित्त वर्ष में समझौते की उम्मीद
वायुसेना प्रमुख ने जानकारी दी कि बहु-उद्देश्यीय लड़ाकू विमान कार्यक्रम के तहत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों के लंबित प्रस्ताव पर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। यदि सभी प्रक्रियाएं तय योजना के अनुरूप आगे बढ़ती रहीं, तो चालू वित्त वर्ष के अंत तक इस मेगा रक्षा सौदे को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। करीब दो दशक पहले भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस खरीद पहल को भारत ने इसी वर्ष फरवरी में आगे बढ़ाया था। परियोजना के तहत लागत निर्धारण और अन्य अहम तकनीकी पहलुओं पर वार्ता चल रही है।
एएमसीए और भविष्य के विकल्प: क्या रूस के एसयू-57 पर होगा विचार?
भविष्य के आधुनिकीकरण का खाका खींचते हुए वायुसेना प्रमुख ने बताया कि वायुसेना को तेजस मार्क-1ए, एमआरएफए परियोजना, तेजस मार्क-2 और स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) के बेड़े में शामिल होने की प्रतीक्षा है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि स्वदेशी एएमसीए परियोजना में किसी प्रकार का विलंब होता है, तो वायुसेना को आवश्यकता के आधार पर अन्य अंतरराष्ट्रीय विकल्पों पर विचार करने के लिए विवश होना पड़ सकता है। रूस की ओर से अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट एसयू-57 की पेशकश की गई है, जिस पर फिलहाल रक्षा मंत्रालय या वायुसेना की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
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